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सबसे बड़ा हथियार | Sabse Bada Hathiyar Story In Hindi

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Sabse Bada Hathiyar Story In Hindi

Sabse Bada Hathiyar Story In Hindi- अकबर और बीरबल के बीच कभी-कभी ऐसी बातें भी हुआ करती थीं, जिनकी परख करने में जान का भी खतरा रहता था। एक बार अकबर ने बीरबल से पूछा, “बीरबल, संसार में सबसे बड़ा हथियार कौन-सा है? “बादशाह सलामत! संसार में सबसे बड़ा हथियार है आत्मविश्वास।

Sabse Bada Hathiyar Story In Hindi

बीरबल ने जवाब दिया। अकबर ने बीरबल की इस बात को सुनकर अपने दिल में रख लिया और किसी समय इसकी परख करने का निश्चय किया। संयोग से एक दिन एक हाथी पागल हो गया। ऐसे में हाथी को जंजीरों में जकड़ कर रखा जाने लगा। अकबर ने बीरबल के आत्मविश्वासे की परख करने के लिए उधर तो बीरबल को बुलवा भेजा और इधर हाथी के महावत को हुक्म दिया कि जैसे ही बीरबल को आता देखे, वैसे ही हाथी की जंजीर खोल दे।

बीरबल को इस बात का पता नहीं था। जब वे बादशाह अकबर से मिलने उनके दरबार की ओर जा रहे थे तो पागल हाथी को छोड़ा जा चुका था। बीरबल अपनी मस्ती में चले जा रहे थे कि उनकी नजर पागल हाथी पर पड़ी, जो चिंघाड़ता हुआ उनकी तरफ आ रहा था।

बीरबल हाजिर जवाब, बेहद बुद्धिमान, चतुर और आत्मविश्वासी थे। वे समझ गए कि बादशाह अकबर ने उनके आत्मविश्वास और बुद्धि की परीक्षा के लिए ही पागल हाथी को छुड़वाया है। दौड़ता हुआ हाथी सूँड को उठाए तेजी से बीरबल की ओर चला आ रहा था। बीरबल ऐसे स्थान पर खड़े थे कि वे इधर उधर भागकर भी नहीं बच सकते थे।

ठीक उसी वक्त बीरबल को एक कुत्ता दिखाई दिया। हाथी बहुत निकट आ गया था। इतना करीब कि वह बीरबल को अपनी सूँड में लपेट लेता। तभी बीरबल ने झपटकर कुत्ते की पिछली दोनों टाँगें पकड़ीं और पूरी ताकत से घुमाकर हाथी पर फेंका। बुरी तरह घबराकर चीखता हुआ कुत्ता जब हाथी से जाकर टकराया तो उसकी भयानक चीखें सुनकर हाथी भी घबरा गया और पलटकर भागा।

अकबर को बीरबल की इस बात की खबर मिल गई और उन्हें यह मानना पड़ा कि बीरबल ने बिल्कुल सच कहा कि आत्मविश्वास ही सबसे बड़ा हथियार है।

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मनहूस कौन | Manahus Kon Story In Hindi

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Manahus Kon Story In Hindi

Manahus Kon Story In Hindi- एक दिन सुबह के समय बादशाह अकबर अपने महल के झरोखे में खड़े थे। उसी समय एक ऐसा व्यक्ति महल के नीचे रास्ते से गुजरा, जिसके बारे में कहा जाता था कि वह मनहस है और सुबह-सुबह जो भी उसकी सूरत देख लेता है, उस दिन वह मुसीबतों से घिरा रहता है।

Manahus Kon Story In Hindi

उस व्यक्ति ने बादशाह को सलाम किया और आगे बढ़ गया। बादशाह अकबर सोचने लगे कि क्या यह बात सही है? आज हमने इसका मुँह देख लिया है, देखते हैं, हमारे साथ क्या गुज़रती है। अभी अकबर स्नान कर दरबार में जाने के लिए तैयार हुए ही थे कि उन्हें समाचार मिला कि उनकी बेगम का भाई दुर्घटना में घायल हो गया है।

दरबार में जाने के बदले वह अपने साले को देखने चले गए। लौटते वक्त महल की सीढ़ियों पर चढ़ते समय उनका पाँव फिसल गया और पैर में मोच आ गई। पैर में पट्टी बंधवाकर वे दरबार में पहुँचे। उस दिन बीरबल दरबार में नहीं आया, इसलिए कोई काम नहीं हो सका। ऊबकर वे अपने महल में लौट आए और थोड़ा आराम करने का विचार किया।

अभी उन्हें जरा-सी झपकी आई थी कि बेगम ने उन्हें भोजन करने के लिए बुलाया। आज भोजन करने का उनका मन नहीं था। फिर भी भोजन करने बैठ गए, किन्तु अभी पहला ग्रास ही मुँह में डाला था कि अचानक कहीं से एक मक्खी उनकी थाली में आ गिरी। वे खाना छोड़ कर खड़े हो गए। अब तो उनका गुस्सा सातवें आसमान पर पहुँच गया। बेगम से भी उनकी कहा-सुनी हो गई और बेगम नाराज़ हो गईं। जैसे-तैसे वह दिन पूरा हुआ।

शाम को वे महल की छत पर गए और एकान्त में बैठकर सोचने लगे कि आज मेरा पूरा दिन खराब गया। ऐसा पहले कभी नहीं हुआ था। आज ही ऐसा क्यों हुआ? यह जरूर उस मनहूस की सूरत देखने का परिणाम है। उन्होंने उसी समय सिपाहियों को हुक्म दिया कि उस मनहूस को गिरफ्तार करके हमारे सामने पेश किया जाए।

सिपाही फौरन उसे पकड़कर ले आए। बादशाह ने उसे फाँसी की सज़ा सुनाई। दरबारियों के पूछने पर उन्होंने पूरी बात बताई कि किस प्रकार इसका मुँह देखने पर उन्हें पूरा दिन परेशान रहना पड़ा।

खबर बीरबल तक भी पहुँची। उन्हें यह गरीब मार होती अच्छी नहीं लगी। वे सीधे कारागार पहुँचे और उस व्यक्ति से मिले और कुछ समझाकर लौट आए।

फाँसी के दिन सिपाही उसे फाँसी के तख्ते के पास ले गए। फाँसी देने के पहले कोतवाल ने उससे उसकी अन्तिम इच्छा पूछी। उसने कहा, “कल सुबह बादशाह ने मेरा मुँह देखा था, इसलिए उन्हें कुछ तकलीफें उठानी पड़ी। कल ही मैंने सबसे पहले उनका मुँह देखा था, इसलिए मुझे आज फाँसी पर चढ़ना पड़ रहा है। कोतवाल साहब! आप दरबार में जाकर बादशाह, दरबारी और नगर की जनता को मेरा यह सन्देश पहुँचा दें कि आज से सुबह के समय कोई बादशाह का मुँह न देखे। जो भी व्यक्ति सुबह के समय बादशाह का मुँह देखेगा, • उसे मेरी तरह फाँसी पर चढ़ना पड़ेगा। बस, यही मेरी अंतिम इच्छा है। “

उस व्यक्ति की यह बात सुनकर कोतवाल स्तब्ध रह गया। कैदी की अन्तिम इच्छा पूरी किए बिना उसे फाँसी नहीं दी जा सकती थी। अतः वह फौरन दरबार की ओर रवाना हो गया और बादशाह को उस व्यक्ति की अंतिम इच्छा बताई, उसकी इच्छा सुनकर भी स्तब्ध रह गए। उन्होंने तुरन्त कैदी की दरबार बुलवाया।

बादशाह ने उससे कहा, “मैं समझ गया, बीरबल की सलाह से ही तुमने इस तरह की समझदारी की बात की है। मुझसे वाकई अन्याय होने जा रहा था। जाओ, मैं तुम्हारी सजा माफ करता हूँ।”

बादशाह ने उस व्यक्ति को पाँच सौ मुहरें भी भेंट में दीं। वह व्यक्ति खुश होकर चला गया। एक निर्दोष के प्राण बचाने के लिए बादशाह ने बीरबल का बहुत आभार माना।

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अनोखा बुद्धिमान | Anokha Budhhiman Story In Hindi

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Anokha Budhhiman Story In Hindi

Anokha Budhhiman Story In Hindi- एक दिन बादशाह ने बीरबल से कहा, “बीरबल, कोई एक ऐसा आदमी ढूंढकर लाओ जो बुद्धिमानों से भी ज्यादा बुद्धिमान हो। “जैसा हुक्म जहाँपनाह! बहुत जल्दी ऐसा आदमी आपके सामने हाजिर कर दूँगा, पर इसके लिए समय और धन की आवश्यकता पड़ेगी।

Bat Kahane Ka Dhang Story In Hindi

“पाँच सौ स्वर्ण मोहरें ले लो और तुम्हें एक सप्ताह का समय दिया जाता है। “बीरबल समय और धन पाकर अपने घर पर आराम करने लगे। अधिकांश धन को उन्होंने दीन-दुःखियों की सहायता में लगा दिया। सातवें दिन बीरबल ने इधर-उधर घूमकर गाय भैंस चराते एक ग्वाले को पकड़ा।

उसे नहला-धुलाकर अच्छे वस्त्र पहनाए। फिर सौ स्वर्ण मुद्राएँ देकर उसे राज दरबार में ले गए। साथ ही उसे रास्ते में अच्छी तरह सिखा-पढ़ा दिया कि वहाँ जाकर उसे क्या करना है। दरबार में पहुँचकर ग्वाले ने निःशब्द हाथ जोड़कर बादशाह को प्रणाम किया, तत्पश्चात् बीरबल ने बादशाह से कहा, “आपके आदेशानुसार मैं बुद्धिमानों से भी बुद्धिमान व्यक्ति ले आया हूँ।

बादशाह ने ग्वाले से पूछा, “तुम कहाँ रहते हो? तुम्हारा नाम क्या है? तुम कौन-सा विशेष कार्य जानते हो? “बादशाह ने उससे प्रश्न पर प्रश्न किए, परन्तु वह तो बीरबल द्वारा सिखा-पढ़ाकर लाया गया था। अतः उसने कोई उत्तर नहीं दिया। बादशाह सवाल करते रहे और वह व्यक्ति खामोशी से बैठा उनका चेहरा देखता रहा। बादशाह को लगा कि यह तो उनका अपमान है कि मैं बोलता जा रहा हूँ और ये व्यक्ति खामोश है।

जब उसकी खामोशी उनसे और बरदाश्त न हुई तो झुंझला कर वे बोले, “यह तुम किस बेवकूफ को पकड़ लाए बीरबल ? यह गूँगा – ब इसने नहीं दिया।” -बहरा तो नहीं? मेरे किसी प्रश्न का उत्तर तब बीरबल ने मुस्कराकर कहा, “यह इसकी बुद्धिमत्ता है अन्नदाता ! बुजुर्गों से इसने सुन रखा है कि राजा और अपने से अधिक बुद्धिमान व्यक्ति के सामने चुप रहने में ही भलाई है। इसलिए यह उन सुनी हुई बातों पर अमल कर रहा है।

आपको शायद याद नहीं कि आपने मुझसे कहा था कि कोई ऐसा व्यक्ति ढूँढकर लाऊँ जो बुद्धिमानों से भी बुद्धिमान हो। यह वही आदमी है। “बादशाह अकबर बीरबल की हाजिरजवाबी सुनकर मुस्कराए और ग्वाले को इनाम देकर विदा कर दिया।

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बात कहने का ढंग | Bat Kahane Ka Dhang Story In Hindi

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Bat Kahane Ka Dhang Story In Hindi

Bat Kahane Ka Dhang Story In Hindi- एक रात बादशाह अकबर को सपना आया कि उनके सारे दाँत गिर गए हैं और मुँह में केवल एक दाँत बचा है। सुबह होते ही अकबर ने एक प्रसिद्ध ज्योतिषी को महल में बुलाया और उससे सपने का अर्थ पूछा। कई ग्रन्थों का अध्ययन करने के बाद ज्योतिषी गम्भीर हो गया और बोला, “बादशाह सलामत! आपका सपना अच्छा नहीं है।

Bat Kahane Ka Dhang Story In Hindi

“सपने का जो भी अर्थ है, साफ-साफ कहो। याद रहे, कोई बात छिपाना नहीं है।” बादशाह ने अपना मन कड़ा करके कहा। ज्योतिषी ने कहा, “आपके सभी दाँत गिर जाने का मतलब है कि आपके सभी सगे-सम्बंधी आपकी आँखों के सामने एक-एक कर मर जाएँगे। आपका एक दाँत रह गया, मतलब यह कि अंत में आप अकेले ही रह जाएँगे।

ज्योतिषी की बात सुनकर अकबर को बहुत गुस्सा आया। उन्होंने तुरन्त ज्योतिषी को महल से बाहर निकलवा दिया और आज्ञा दी कि कोई दूसरा ज्योतिषी दरबार में आकर उनके सपने का अर्थ बताए। कुछ घंटों बाद ही एक दूसरा ज्योतिषी आया। वह बीरबल का भेजा हुआ था।

बीरबल ने उसे समझा दिया था कि वह अपनी बात किस ढंग से कहे। उसने बादशाह से उनका सपना पूछा। अकबर ने उसे अपना सपना सुना दिया। ज्योतिषी थोड़ी देर तक तो पोथे-पत्री पलटता रहा, फिर काफी देर तक सोचकर बोला, “आपका सपना तो बहुत अच्छा है महाराज! आपके सभी सगे-सम्बंधियों की अपेक्षा आपकी उम्र लम्बी है।

बहुत समय तक आप सुख से राज्य करेंगे और आपके राज्य में प्रजा बहुत सुखी रहेगी। यह सुनकर अकबर खुश हुआ। उसने ज्योतिषी को ढेर सारा इनाम दिया। ज्योतिषी आशीर्वाद देकर अपने घर लौट आया। बीरबल की सलाह से एक ही बात को दूसरे ढंग से कहने पर ज्योतिषी को काफी लाभ हुआ। दरअसल, किसी को भी कड़वी परन्तु सच्ची बात सुननी अच्छी नहीं लगती, किन्तु समझदार आदमी वही होता है, जो सच्ची बात कह भी देता है। और सुनने वाले को बुरा भी नहीं लगता।

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तोते की समाधि | Tote Ki Samadhi Story In Hindi

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Tote Ki Samadhi Story In Hindi

Tote Ki Samadhi Story In Hindi- एक बार बादशाह अकबर ने एक तोता खरीदा। तोता बड़ा ज्ञानी था। बड़ी अच्छी-अच्छी बातें करता था। बादशाह ने ‘उसकी देखभाल के लिए एक आदमी नियुक्त कर दिया और उसे सख्त हिदायत दी कि अगर तुम्हारी लापरवाही से तोता मर गया और यह खबर तुम मेरे पास लेकर आए तो तुम्हें फाँसी पर चढ़ा दिया जाएगा।

Tote Ki Samadhi Story In Hindi

नौकर तन-मन से तोते की सेवा करने लगा। मगर इसे वक्त की मार ही कहेंगे कि इतनी अच्छी देखभाल के बाद भी तोता मर गया। अब तोते का रखवाला बड़ा घबराया। उसके पसीने छूटने लगे। वह जानता था कि इधर उसने बादशाह अकबर को जाकर तोते के मरने की खबर सुनाई, उधर बादशाह ने उसकी फाँसी का हुक्म जारी किया।

सुबह से दोपहर हो गई। वह रोता रहा और अपनी किस्मत कोसता रहा। अचानक उसे बीरबल का ख्याल आया तो वह उछलकर खड़ा हो गया और कुछ ही पलों बाद बीरबल के पास जा पहुँचा। उसने जाते ही बीरबल के पाँव पकड़े और बोला, “रक्षा! हुजूर रक्षा।

“अरे….रे… कौन हो तुम, उठो । बताओ क्या बात है?” तोते के रखवाले ने उसे बताया कि क्या बात थी। पूरी बात सुनकर बीरबल गम्भीर हो गए। फिर उन्होंने रखवाले को एक युक्ति बताकर विदा कर दिया और स्वयं भी राजदरबार के लिए चल दिए। कुछ समय बाद रखवाला दरबार में हाजिर हुआ और बोला, “महाराज! जल्दी चलिए।” ‘क्या बात है? तोता तो ठीक है न?

‘हाँ महाराज! ठीक तो है, किन्तु अजीब सी हालत में उसने समाधि ले ली है।” रखवाला बोला, “न कुछ बोल रहा है, न खा रहा है, न पी रहा है, न हिल रहा है, न डुल रहा है। अब आप ही चल कर देखिए। “महाराज बीरबल के साथ वहाँ पहुँचे और तोते की हालत देखकर बोले, “अरे मूर्ख! सीधी तरह क्यों नहीं बताया कि तोता मर गया!

“यह ऐसा कैसे कह सकता था जहाँपनाह। इसने फाँसी पर थोड़े ही लटकना था। “ओह!” महाराज ने कहा, “तो यह कारस्तानी तुम्हारी है। सच बीरबल ! तुमने आज एक गरीब की जान और बचा ली। “बीरबल मुस्कराकर रह गए।

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दोस्ती में दरार | Dosti Me Darar Story In Hindi

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Dosti Me Darar Story In Hindi

Dosti Me Darar Story In Hindi- अकबर बादशाह के एक शहज़ादे की शहर के एक प्रतिष्ठित साहूकार के लड़के से घनिष्ठ मित्रता थी। वह सारा दिन अपने मित्र के साथ सैर-सपाटा किया करता था। दोनों कोई काम-धाम नहीं करते थे। इसीलिए अकबर बादशाह तथा साहूकार को यह मित्रता पसंद नहीं थी। दोनों ही चाहते थे कि इनकी मित्रता टूट जाए ताकि दोनों ही किसी काम-धंधे में ध्यान लगाएँ।

Dosti Me Darar Story In Hindi

इन दोनों की मित्रता कैसे भंग हो, इस विषय पर एक दिन बादशाह विचार कर रहे थे, तभी बीरबल वहाँ पहुँच गए। उन्हें देख अकबर बहुत खुश हुए और पास बैठाकर बोले, “साहूकार के पुत्र तथा शहज़ादे की दोस्ती किसी न किसी तरह से छुड़ानी चाहिए। मेरे विचार से तुम ही इस काम को कर सकते हो।

“महाराज की समस्या की गंभीरता को समझकर बीरबल बोले, “जहाँपनाह! हुक्म जारी कीजिए कि आज शहज़ादा तथा साहूकार – पुत्र दोनों एक साथ दरबार में उपस्थित हों। “अकबर बादशाह ने ऐसा हुक्म जारी कर दिया। दोनों मित्र नियत समय पर दरबार में उपस्थित हुए। कुछ देर तक इधर-उधर मन बहलाव की बातें होती रहीं।

जब बीरबल ने देखा कि अब शहजादे का मन यहाँ नहीं लग रहा है, तो उन्होंने उसके साहूकार मित्र के पास जाकर उसके कान में फुसफुसा कर कुछ कहा। बात साफ नहीं थी, अतः साहूकार का लड़का कुछ नहीं समझ पाया। इसके पश्चात् बीरबल ने शहज़ादे के मित्र को संबोधित करके चेतावनी दी, “ध्यान रहे, यह बात बिल्कुल गुप्त रखी जाए। अपने इष्ट मित्रों से भी तुम इसकी चर्चा मत करना।

“बीरबल की इस चेतावनी को सभी उपस्थित लोगों ने सुना। इसके बाद दरबार दूसरे दिन के लिए उठ गया। दरबार से बाहर निकलने के पश्चात शहज़ादे ने मित्र से पूछा, “बीरबल ने तुम्हारे कान में क्या कहा था? “साहूकार पुत्र शहज़ादे को कुछ नहीं बता सका। आखिर, कोई बात बीरबल कहते या वह समझता तो बताता भी। इससे शहज़ादे को कुछ शंका उत्पन्न हुई। वह बोला, “मित्र, आज तुमने यह नया तरीका खूब अपनाया है।

“नहीं दोस्त, बिल्कुल नहीं। बीरबल ने मुझसे कुछ कहा ही नहीं, केवल कान के पास मुँह ले जाकर कुछ अस्पष्ट-सा फुसफुसाया और खुलेआम यह कहा कि जो बात मैंने तुमसे कही है, इस बात को गुप्त रखना।” साहूकार मित्र ने शहज़ादे को समझाते हुए कहा।

लेकिन शहज़ादे को उसकी बात पर विश्वास नहीं हुआ। उसने सोचा, उसका मित्र सब कुछ जानते हुए भी बता नहीं रहा है। शहजादे के दिल में संशय पैदा हो गया। धीरे-धीरे दोनों के दिलों में एक-दूसरे के प्रति अविश्वास का गहरा परदा खिंच गया। दोनों की घनिष्ठ मित्रता आखिर भंग हो गई।

फिर, हमेशा के लिए दोनों मित्रों का मन एक-दूसरे से हट गया। वे अपने-अपने काम-काज देखने लगे। साहूकार को भी बड़ी खुशी हुई। अकबर बादशाह बीरबल की चतुराई से अत्यधिक प्रसन्न हुए और सदा की तरह बीरबल को इस कार्य के लिए भी पुरस्कृत किया।

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खिज़ाब लगाने वाले | Khijab Lagane Wale Story In Hindi

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Khijab Lagane Wale Story In Hindi

Khijab Lagane Wale Story In Hindi- वृद्धावस्था में अकबर खिज़ाब लगाया करते थे। एक बार खिजाब लगाने के दौरान उन्होंने बीरबल से पूछा, “बीरबल! खिज़ाब दिमाग को नुकसान तो नहीं पहुँचाता?’ “

बीरबल चुप रहे। क्या जवाब देते। जो । जवाब देते, वह बादशाह को पसंद न आता, इसलिए वे चुप ही रहे।

Khijab Lagane Wale Story In Hindi

बादशाह अकबर ने सोचा कि शायद बीरबल के पास इस सवाल का जवाब नहीं है और इस सवाल को लेकर बीरबल का मजाक बनाया जा सकता है।

अतः उन्होंने फिर पूछा, “बताओ न। खिज़ाब लगाने से दिमाग को नुकसान तो नहीं पहुँचता ?” अब बीरबल से न रहा गया। तपाक से बोले, “हुजूर! खिज़ाब लगाने वालों के दिमाग ही नहीं होता। यदि होता तो क्यों बनावटी सुन्दरता लादकर बूढ़े से जवान बनते।”

यह उत्तर पाकर अकबर बादशाह चुप हो गए। बीरबल ने अपने जवाब में उनकी ओर संकेत कर दिया था कि उनमें दिमाग नहीं है। मगर उनका उत्तर था बिल्कुल ठीक। अकबर ने उस दिन से खिज़ाब लगाना ही छोड़ दिया।

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भक्तों के कृष्ण | Bhakto Ke Krushna Story In Hindi

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Bhakto Ke Krushna Story In Hindi (2)

Bhakto Ke Krushna Story In Hindi- एक दिन बादशाह अकबर ने बीरबल से पूछा, “तुम्हारे धर्म ग्रन्थों में यह लिखा है कि हाथी की गुहार सुनकर श्री कृष्णजी पैदल दौड़े थे। न तो उन्होंने किसी सेवक को ही साथ लिया, न सवारी पर ही गए। इसकी वजह समझ में नहीं आती। क्या उनके यहाँ सेवक नहीं थे?

Bhakto Ke Krushna Story In Hindi (2)

“बीरबल बोले, “इसका उत्तर आपको समय आने पर ही दिया जा सकेगा जहाँपनाह । “कुछ दिन बीतने पर एक दिन बीरबल ने एक नौकर को, जो शहज़ादे को इधर-उधर टहलाता था, एक मोम की बनी हुई मूर्ति दी, जो कि हू-ब-हू बादशाह के पोते की तरह थी।

मूर्ति यथोचित गहने-कपड़ों से सुसज्जित होने के कारण दूर से देखने में बिल्कुल शहज़ादा मालूम होती थी। बीरबल ने नौकर को अच्छी तरह समझा दिया कि उसे क्या करना है। “जिस तरह तुम नित्य-प्रति बादशाह के पोते को लेकर ‘उनके सम्मुख जाते हो, ठीक उसी तरह आज मूर्ति को लेकर जाना और बाग में जलाशय के पास फिसल जाने का बहाना कर गिर पड़ना। तुम सावधानी से जमीन पर गिरना, लेकिन मूर्ति पानी में अवश्य गिरनी चाहिए।

यदि तुम्हें इस कार्य में सफलता मिली तो तुम्हें इनाम दिया जाएगा। “उस दिन बादशाह बाग में बैठे थे। वहीं एक जलाशय था। नौकर शाहजादे को खिला रहा था कि अचानक उसका पाँव फिसला और उसके हाथ से शहज़ादा छिटककर पानी में जा गिरा। बादशाह यह देखकर बुरी तरह घबरा गए और उठकर जलाशय की तरफ लपके।

कुछ देर बाद मोम की मूर्ति को लिए पानी से बाहर निकले। बीरबल भी उस वक्त वहाँ उपस्थित थे, बोले, “जहाँपनाह ! आपके पास सेवकों और कनीज़ों की फौज है, फिर आप स्वयं और वह भी नंगे पाँव अपने पोते के लिए क्यों दौड़ पड़े? आखिर सेवक सेविकाएँ किस काम आएँगी?

“बादशाह बीरबल का चेहरा देखने लगे। वे समझ नहीं पा रहे थे कि बीरबल कहना क्या चाहते हैं। बीरबल ने कुछ देर रुककर फिर कहा, “अब भी आप नहीं समझे तो सुनिए, जैसे आपको अपना पोता प्यारा है। उसी तरह श्री कृष्णजी को अपने भक्त प्यारे हैं। इसलिए उनकी पुकार पर ही वे दौड़े चले गए थे। ‘यह सुनकर बादशाह को अपनी भूल का अहसास हुआ।

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अकबर का गुस्सा | Akbar Ka Gussa Story In Hindi

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Akbar Ka Gussa Story In Hindi

Akbar Ka Gussa Story In Hindi- एक दिन अकबर दरबार में आए, तो बहुत गुस्से में थे। कोई कुछ भी पूछता तो भी वह गुस्से में ही उत्तर देते । दरबारी समझ गए आज बादशाह का मिजाज ठीक नहीं है। दरबार समाप्त होने पर बीरबल ने अकबर से उनके गुस्से का कारण पूछा। अकबर ने कहा, “अरे, छोड़ो इस बात को ! मेरा दामाद बड़ा पाजी है।

Akbar Ka Gussa Story In Hindi

मैं गुस्सा न करूँ तो क्या करूँ? हमेशा उल्टी-सीधी हरकतें करता रहता है। “अब देखो न अपनी बेटी से मिले हुए एक वर्ष हो गया है। 44 फिर भी मेरा दामाद उसे नहीं भेजता।” अकबर ने गुस्से में कहा। जहाँपनाह! इसमें इतना नाराज़ होने वाली क्या बात है? मैं आज ही बेटी को लाने के लिए आदमी भेज देता हूँ।

‘आदमी तो मैंने भेजा ही था, पर दामाद मानता ही नहीं। वास्तव में ये दामाद जाति होती ही बहुत खराब है। अब तुम एक काम करो। मैदान में कुछ शूलियाँ तैयार करवाओ। हम अपने राज्य के सभी दामादों को शूली पर चढ़ा देंगे। “बीरबल ने बादशाह अकबर को बहुत समझाया, फिर भी उनका गुस्सा शान्त नहीं हुआ।

वह कोई बात सुनने को तैयार नहीं थे। आखिरकार बीरबल ने एक मैदान में कुछ शूलियाँ तैयार करा दीं। जब बीरबल अकबर को मैदान में शूलियाँ दिखाने ले • गए, तो शूलियाँ देखकर बादशाह को तसल्ली हो गई। वह बोले, “ठीक है, अब मैं राज्य से दामादों का नामोनिशान मिटा दूँगा।

“इतने में एक सोने और एक चाँदी की शूली पर अकबर की नजर पड़ी तो वे चौंके। उन्होंने बीरबल से पूछा, “अरे बीरबल, तुमने ये दो कीमती शूलियाँ किसके लिए बनवाई हैं? “बीरबल ने सिर झुकाकर कहा, “हुजूर! सोने की शूली आपके लिए और चाँदी की मेरे लिए।

“बादशाह अकबर सोच में पड़ गए। उन्होंने बीरबल से कहा, “मैंने तुम्हें ऐसा करने के लिए कब कहा था? हम दोनों को शूलियों पर थोड़े ही चढ़ना है?” “जहाँपनाह! आपने राज्य के सभी दामादों को शूली पर चढ़ाने के लिए कहा था। आप और मैं भी तो किसी के दामाद हैं। यदि सभी दामाद शूलियों पर चढ़ाए जाएँगे, तो हम भी कहाँ बच पाएँगे।

आप बादशाह हैं, इसलिए आपके लिए सोने की शूली बनवाई है और मैं आपका खास खिदमदगार हूँ इसलिए अपने लिए चाँदी की शूली बनवाई है। देखिये, दोनों शूलियाँ कितनी अच्छी बनी हैं। “बीरबल की बात सुनकर बादशाह अकबर सन्न रह गए। उन्हें अपनी भूल समझ में आ गई। उन्होंने फौरन राज्य दामादों को शूलियों पर चढ़ाने का आदेश रद्द कर दिया।

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शेर का दूध | Sher Ka Dudh Story In Hindi

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Sher Ka Dudh Story In Hindi

Sher Ka Dudh Story In Hindi- बादशाह अकबर का साला मुल्ला दो प्याजा बीरबल का कट्टर दुश्मन था। वह हमेशा बीरबल के खिलाफ षड्यंत्र रचता रहता था। एक बार उसने अपनी बहन ‘बेगम साहिबा’ को अपने साथ मिलाकर एक योजना बनाई। योजना के अनुसार बेगम एक दिन बीमार पड़ गई। फौरन शाही हकीम को बुलाया गया, जिसने बेगम को देखकर कहा कि बेगम तभी ठीक हो सकती हैं, जब उन्हें शेर का दूध पिलाया जाए।

Sher Ka Dudh Story In Hindi

बादशाह ने यह बात अपने सभासदों के बीच रखी। अधिकांश सभासद तो थे ही बीरबल के खिलाफ। अतः सभी ने मुल्ला दो प्याजा की शह पाकर एक स्वर में कहा, “बादशाह सलामत, शेर का दूध बीरबल लेकर आएँगे, क्योंकि वे बुद्धिमान और साहसी हैं।

“बादशाह ने बीरबल की तरफ देखा, “क्यों बीरबल! क्या तुम ला सकते हो शेर का दूध ?” बीरबल समझ गए कि यह उनके दुश्मनों की चाल है और लगता है कि हकीम और बेगम साहिबा भी उनसे मिल चुके हैं।

वे अपने स्थान से उठे और बादशाह के आगे सिर झुकाकर बोले, “मैं पूरी कोशिश करूँगा जहाँपनाह।” और फिर वे कुछ दिन का अवकाश लेकर चले गए। घर जाकर उन्होंने यह बात अपनी बेटी को बताई। बीरबल की बेटी भी बहुत होशियार थी। वह बोली, “पिताजी! इस बात के लिए आपको चिन्ता करने की कोई आवश्यकता नहीं है।

इसका हल मैं आपको बता दूँगी। छुट्टियाँ समाप्त होने के बाद भी आप दरबार में न जाएँ।” यह कहकर बीरबल की बेटी ने युक्ति समझाई। बीरबल की छुट्टियाँ समाप्त हो जाने पर बादशाह का दूत उन्हें बुलाने आया तो बीरबल की लड़की ने कह दिया कि उनको बच्चा हुआ है। वे प्रसूति गृह में हैं। अभी नहीं आ सकते। दूत ने दरबार में जाकर वैसा ही कह दिया।

तब अकबर बादशाह और उनके सदस्यों को अपनी चूक का अहसास हुआ कि दूध शेर नहीं शेरनी देती है। अकबर ने बीरबल को वापस सभा में बुलवा लिया।

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