Birbal Ke Tir Story In Hindi- बादशाह अकबर के सभी सभासद बीरबल की बातों का आघात सहते हुए थक चुके थे। एक दिन मौका देखकर उन्होंने बीरबल पर प्रहार करते हुए कहा, “बीरबल! तुम सिर्फ बातों के तीरंदाज़ हो। अगर सचमुच तीर चलाना पड़े तो तुम्हें नानी दादी याद आ जाए। “बीरबर ने कहाँ हार माननी थी। उन्होंने मूँछें उमेठकर कहा, “मैं सचमुच का तीरंदाज़ भी हूँ, अगर बीरबल का निशाना गलत हो जाए तो जो चोर की सज़ा वह मेरी।
दरबारियों को लगा कि बीरबल अपनी बातों के जाल में खुद फँस गए हैं। उन्होंने बादशाह पर जोर डाला कि इसी समय बीरबल की तीरंदाजी की परीक्षा ली जाए। सब मैदान में पहुँचे। बीरबल के हाथ में कमान और तीर थमाए गए। कुछ ही दूरी पर स्थित पेड़ को लक्ष्य बनाकर तीर चलाने को कहा गया।
उनका ख्याल था कि बुद्धि का तीर चलाने वाला सचमुच के तीर से निशाना लगाना क्या जाने । बीरबल ने पहला तीर छोड़ा। तीर लक्ष्य पर न लगकर आगे निकल गया। बीरबल को तो पहले ही मालूम था कि निशाना चूकेगा। मगर अपनी इस असफलता को भी वे स्वीकार करके दूसरे के सिर मढ़ना चाहते थे।
बीरबल ने झट चीखकर कहा, “यह रही मुल्ला दो प्याजा की तीरंदाज़ी। “मुल्ला झेंप गए। बाकी दरबारी ठहाका लगाकर हँस पड़े। उन्होंने दूसरा तीर निकालकर कमान पर चढ़ाया। वह तीर भी लक्ष्य को पार कर गया। बीरबल अब भी भला कहाँ चूकने वाले थे, बुलन्द आवाज में बोले, “यह रही राजा टोडरमल की तीरंदाज़ी।
“राजा टोडरमल भी मुस्कराकर मुँह छुपा बैठे। एक बार फिर दरबारियों का ठहाका गूंजा। बीरबल ने तीसरा तीर कमान पर चढ़ाया। संयोग से वह तीर ठीक निशाने पर जा लगा। इस पर बीरबल ने बड़े रुआब से कहा, “और यह रही बीरबल की तीरंदाज़ी।
“वाकई!” अकबर हँसकर बोले, “तुमने तीरंदाज़ी के साथ-साथ बातों के भी तीर छोड़े।” • इस प्रकार बीरबल की बुराइयाँ करने वालों को एक बार फिर मुँह की खानी पड़ी।
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Sabse Ujli Vastu Story In Hindi- एक बार बादशाह अकबर ने दरबारियों से सवाल पूछा कि दुनिया में सबसे उजली वस्तु कौन-सी है?, दरबारी थोड़ी देर विचार करते रहे, फिर उनमें से एक कहा, “जहाँपनाह! दुनिया में सबसे उजली वस्तु रूई है। ” ने ‘दूसरे दरबारी ने कहा, “दुनिया में सबसे उजली वस्तु दूध है।
“फिर तो रुई और दूध दोनों में से अधिक उजली वस्तु कौन-सी है, इसी की चर्चा होने लगी। यह देखकर बीरबल को हँसी आ गई। अकबर ने उन्हें देखकर कहा, “बीरबल, तुम्हें हँसी क्यों आ रही है? क्या तुम कुछ और कहना चाहते हो?” बीरबल ने कहा, “सरकार! मैं तो मानता हूँ कि प्रकाश सबसे अधिक उजली वस्तु है।
प्रकाश के बिना हर चीज़ काली है, वह चाहे रूई हो या दूध। “देखो बीरबल! सिर्फ कह देने से ही कुछ नहीं होगा, तुम्हें अपनी बात सिद्ध करनी होगी। “बीरबल ने कहा, “जब समय आएगा तब मैं इसे सिद्ध कर दूँगा।” बादशाह ने उनकी बात मान ली और दरबार बरखास्त हो गया।
कुछ दिनों के बाद बीरबल बादशाह से मिलने महल में “गए। बादशाह सिर पकड़ कर बैठे थे। बीरबल ने पूछा, ‘क्या हुआ जहाँपनाह? “मेरे सिर में बहुत दर्द है। इसलिए मुझे कुछ भी अच्छा नहीं लग रहा है। “बीरबल ने कहा, “कई बार अधिक प्रकाश के कारण ऐसा होता है। आप थोड़ी देर के लिए सिर पर कपड़ा बाँध कर सो जाइए। मैं कमरे के दरवाजे और खिड़कियाँ बन्द कर देता हूँ।
“अकबर सिर पर कपड़ा बाँध कर सो गए। बीरबल ने उनके कमरे के दरवाजे के पास रूई का ढेर लगा दिया। रूई के ढेर के पास ही एक पतीली में दूध भरकर रख दिया। खिड़की दरवाजे बन्द करने के बाद वे बाहर जाकर बैठ गए। सभी दरवाजे-खिड़कियाँ बन्द होने के कारण कमरे में अँधेरा हो गया।
इसलिए बादशाह को गहरी नींद आ गई। एक घंटे के बाद जब वे जागे, तो उनका सिर हल्का हो गया था।वह कमरे से बाहर निकलने के लिए उठे, अँधेरे में दरवाजा खोजते खोजते उनका पैर रूई के ढेर पर पड़ गया। वह वहाँ से कुछ हटकर जाने लगे तो दूध की पतीली से टकरा गए। जैसे तैसे उन्होंने दरवाजा खोला।
दरवाजा खुलते ही कमरे में उजाला हो गया। उन्होंने दरवाजे के पास रूई का ढेर और दूध की पतीली देखी। बाहर आकर उन्होंने बीरबल से पूछा, “यह सब तुमने क्या तमाशा किया है बीरबल ! कमरे में तुमने रूई और दूध की पतीली क्यों रखवाई है?” बीरबल ने कहा, “जहाँपनाह! कमरे में अँधेरा हो गया था।
आप अँधेरे में दरवाजा ठीक से देख सकें, इसलिए मैंने दो उजली वस्तुएँ आपके कमरे में रखवाई थीं। “अकबर ने कहा, “कोई वस्तु चाहे जितनी उजली हो, पर जब तक उस पर प्रकाश नहीं पड़ता, तब तक उसे कैसे देखा “जा सकता है? “बीरबल ने कहा, “एक महीने पहले मैंने भी आपसे यही कहा था। तब आप मेरी बात नहीं मान रहे थे। अब आपको मेरी बात पर विश्वास हो गया न कि सबसे अधिक उजली वस्तु प्रकाश है।”
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Beiman Mitr Story In Hindi- दो मित्र थे। रामलाल और श्यामलाल। रामलाल गरीब और सीधा था। श्यामलाल लालची और बेईमान । एक बार रामलाल को परदेस जाना पड़ा। वह अपना सारा कीमती सामान श्यामलाल के पास रखवा गया ताकि सुरक्षित रहे। वर्ष भर बाद वह वापस आया और श्यामलाल से अपना सामान माँगा, मगर बेईमान श्यामलाल ने सामान देने से साफ इन्कार कर दिया।
रामलाल ने उसकी बड़ी मिन्नत की, मगर वह नहीं पसीजा। अन्त में दुःखी होकर रामलाल बीरबल के पास पहुँचा और सारी बात बताई। बीरबल ने पूरी बात सुनकर कहा, “तुम दो-दिन बाद जाकर अपना सामान माँगना और न देने पर उसे धमकाना 1.1 कि मैं दीवानजी के पास जा रहा हूँ।’
रामलाल बेचारा अपने घर चला गया। इधर, बीरबल ने दूसरे दिन श्यामलाल को बुलवाया। उसकी अच्छी आवभगत की फिर कहा, “श्यामलालजी! जहाँपनाह एक नई अदालत खुलवाना चाहते हैं, जहाँ हिन्दुओं के मुकदमें सुने जाएँ। बादशाह सलामत ने मुझे उस अदालत के लिए न्यायाधीश चुनने की जिम्मेदारी सौंपी है।
काफी सोचने-समझने के बाद मैंने सोचा है कि क्यों न तुम्हारा नाम बादशाह को सुझाऊँ। ‘आपने बिल्कुल ठीक सोचा है दीवानजी!” श्यामलाल खुश होकर बोला, “मैं तो आपको ही आदर्श मानता हूँ, इसलिए पूरी ईमानदारी से अपना कर्तव्य निभाऊँगा। “ठीक है! तुम्हारी इच्छा जान ली। अब मैं जहाँपनाह से बात करूँगा। अब तुम जाओ।” ★ श्यामलाल खुशी-खुशी वापस चला गया और सोचने लगा कि अगर मैं शहर का काजी बन गया तो मजा आ
जाएगा। अभी घर पहुँचा ही था कि रामलाल आ धमका। उसने फिर अपने सामान का तगादा किया। इस बार श्यामलाल ने उसे धमका दिया। “ठीक है, अब भी अगर तुम मेरा सामान वापस नहीं करते, तो मैं दीवानजी के पास जाता हूँ।” रामलाल ने कहा, “अब वही इंसाफ करेंगे।”
कहकर रामलाल जाने को हुआ तो श्यामलाल ने घबराकर उसके पाँव पकड़ लिए, “अरे….रे.. यार! क्यों नाराज़ होकर जाता है। मैं तो तुझसे मजाक कर रहा था। ले अपना सारा सामान ले जा। “और फिर श्यामलाल ने उसे सारा सामान दे दिया। दरअसल, श्यामलाल के मन में यह बात बैठ गई थी कि अगर रामलाल ने बीरबल से शिकायत कर दी तो मुझे काजी का पद मिलने से पहले ही छिन जाएगा।
कुछ दिनों तक वह बीरबल के बुलावे का इन्तज़ार करता रहा, मगर जब बुलावा नहीं आया तो उसने खुद ही जाकर पूछा, “मैं कब न्यायाधीश बनूँगा?” बीरबल बोले, “किसी बेईमान को न्यायाधीश बनाने से अच्छा है कि न्यायालय खोला ही न जाए। दोस्त के साथ बेईमानी करने वाला बेईमान कतई काजी नहीं बन सकता। श्यामलाल का सिर शर्म से झुक गया।
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Asli Badshah Story In Hindi- बीरबल की चतुराई और सूझ-बूझ के किस्से अब देश विदेश तक फैल चुके थे। लोग उनकी सूझ-बूझ की प्रशंसा करते। कुछ लोग उनकी ख्याति सुन उनका इम्तिहान तक लेने आ चुके थे। मिस्र के बादशाह ने भी बीरबल की चतुराई की बड़ी प्रशंसा सुनी तो उसने सोचा कि मैं भी बीरबल की चतुराई की परीक्षा लूँ। देखूं तो सही कि वह कितना चतुर है।
अतः उसने अकबर को पत्र लिखा और बीरबल को मिस्र भेजने की गुज़ारिश की। अकबर ने बीरबल को मिस्र भेज दिया। मिस्र के मंत्री ने बड़े जोर-शोर से बीरबल का स्वागत किया। फिर उसने बीरबल को शाही मेहमानखाने में ठहरा दिया और कहा, “आप कल दरबार में आएँ। वहाँ बादशाह से आपकी मुलाकात होगी।
“बीरबल तो पहले ही समझ चुके थे कि उन्हें यहाँ अकारण नहीं बुलाया गया है। हो न हो कल बादशाह के दरबार में उनका इम्तिहान लिया जाएगा। मगर बीरबल भला ऐसी परिस्थितियों से कहाँ घबराने वाले थे। वे खा-पीकर आराम से पाँव फैलाकर सो गए।
सुबह वे तैयार होकर बैठे ही थे कि उन्हें दरबार में ले जाने के लिए मंत्री आ पहुँचा। बीरबल दरबार में पहुँचे तो उन्होंने वहाँ पाँच-पाँच बादशाह बैठे देखे। सभी एक जैसे! ज़रा-सा भी फर्क नहीं। बीरबल समझ गए कि ये लोग मेरा इम्तिहान लेना चाहते हैं। बीरबल ने बड़े ध्यान से उन पाँचों बादशाहों को देखा। उनका अच्छी तरह निरीक्षण किया।
अन्त में वह एक बादशाह के सामने पहुँचे और उनका अभिवादन किया। बादशाह को बहुत आश्चर्य हुआ। उन्होंने बीरबल से पूछा, “मैं ही असली बादशाह हूँ, यह तुम्हें कैसे मालूम हुआ? “बीरबल ने कहा, “जहाँपनाह! जो नकली बादशाह थे, वे अपने-आपको असली बादशाह जताने के लिए तरह-तरह की चेष्टाएँ कर रहे थे।
वे नज़रें बचाकर आपकी ओर देख रहे थे, परंतु आपको ऐसा करने की आवश्यकता ही नहीं थी। इसलिए आप स्थिर बैठे हुए थे। इस प्रकार मैंने फौरन आपको पहचान लिया। “बीरबल की चतुराई से मिस्र का बादशाह बहुत खुश हुआ । उसने बीरबल को कीमती पुरस्कार दिए और कई दिनों तक शाही मेहमान बनाए रखने के बाद विदा किया।
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Padha Likha Gadha Story In Hindi- बीरबल की ख्याति दूर-दूर तक के राज्यों में फैल चुकी थी। इस बात में कोई शक नहीं था कि वह काफी बुद्धिमान, चतुर और हाजिरजवाब थे। एक दिन वह अकबर के साथ दरबार में बैठे थे। तभी कर-चोरों से जब्त की गई चीज़ों में एक गधा दरबार में हाजिर किया गया।
बादशाह का मन बहलाव करने के इरादे से बीरबल ने गधे की तारीफ के पुल बाँधते हुए कहा, “जहाँपनाह, इसके चेहरे से ऐसी बुद्धिमानी झलक रही है। कि शायद सिखाने पर ये पढ़ना-लिखना भी सीख जाए।” बादशाह ने बात पकड़ ली और सेवक को आदेश दिया कि वह मधे की रस्सी बीरबल के हाथ में थमा दे।
तत्पश्चात बीरबल से उन्होंने कहा, “बीरबल! ले जाओ इसे महीने भर में पढ़ा-लिखाकर वापस लाना। “बीरबल को यह समझने में देर नहीं लगी कि अगर वह इस काम में विफल हो गया तो नतीजा क्या होगा। ठीक एक महीने बाद उसी गधे की रस्सी थामे बीरबल दरबार में हाजिर हुए।
बादशाह ने पूछा, “क्या गधा पढ़-लिख गया है? “हाँ, जहाँपनाह ।” कहते हुए एक मोटी-सी पोथी गधे के सामने रख दी। गधा जुबान से पोथी पन्ने पलटते चला गया। और तीसवें पन्ने पर पहुँचकर जोर-जोर से रेंकने लगा।
“देखिए जहाँपनाह! अपनी भाषा में किताब पढ़कर सुना रहा है। “बादशाह और उनके दरबारी चकित रह गए। बादशाह ने पूछा, “तुमने यह चमत्कार कैसे किया? “बीरबल ने बड़ी शान के साथ समझाया, “जहाँपनाह! पहले रोज मैंने मुट्ठी भर घास पोथी की जिल्द और पहले पन्ने के नीचे रख दी। दूसरे दिन मैंने घास दूसरे पन्ने पर रख दी और पोथी बन्द कर दी।
गधे ने उसे खोलकर घास खा ली। फिर रोजाना इसी तरह से आगे के पन्ने पलटने लगा। जहाँ घास नहीं “मिलती, वहीं गधा गुस्से से रेंकने लगता।” बादशाह बीरबल की चतुराई पर मुस्कराए बगैर नहीं रह सके। सारे दरबारी भी उनकी तारीफ करने लगे।
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Gay Ka Malik Kaun Story In Hindi- शाम के समय एक ग्वाला अपनी गाय चराकर जंगल से वापस लौट रहा था। उसे रास्ते में एक बदमाश मिला, जिसने उसे डरा-धमकाकर उसकी गाय छीन ली। इससे बेचारा ग्वाला बहुत दुःखी हुआ। वह उसी गाय का दूध बेचकर अपने परिवार का पालन-पोषण करता था।
वह फरियाद करने के लिए अकबर के दरबार में जा रहा था कि रास्ते में उसे बीरबल मिल गए। उसने बीरबल को सारा किस्सा सुनाया। दूसरे दिन बीरबल ने ग्वाले को और उस बदमाश को दरबार में बुलाया। ग्वाले की शिकायत पर गाय रात ही में जब्त कर ली गई थी।
बदमाश नाटक करके कहने लगा कि यह गाय उसी की है, ग्वाला झूठ बोल रहा है। बीरबल ने दोनों से पूछा, “सच-सच बताओ, यह गाय किसकी है? “यह गाय मेरी है श्रीमान !” दोनों ने एक साथ कहा। बीरबल बोले, “ठीक है। यदि गाय तुम्हारी है तुम्हें इसका नाम भी मालूम होगा। तुम दोनों बारी-बारी से मेरे पास आओ और मेरे कान में गाय का नाम बताओ। फिर मैं तुम्हारा न्याय करूँगा।” दोनों ने बारी-बारी से बीरबल के कान में गाय का नाम ‘बताया।
बीरबल ने पहले उस बदमाश से कहा, “तुमने मुझे गाय का जो नाम बताया है, अब उसी नाम से गाय को पुकारकर अपने पास बुलाओ। ‘उसने बड़े प्यार से गाय को पुकारा, “गौरी! गौरी! आओ गौरी।” मगर यह क्या गाय तो अपनी जगह से टस से मस नहीं हुई।
अब ग्वाले की बारी आई। उसने अपने विशेष अंदाज में गाय को पुकारा,” कपिला! मेरी गौमाता! आओ।” अपने असली मालिक के पुकारे जाते ही गाय के कान खड़े हो गए और वह खूँटे से छूटने का प्रयत्न करने लगी। ग्वाला आँखों में आँसू भरकर उसके करीब गया और बड़े प्यार से उसके शरीर पर हाथ फेरने लगा।
बीरबल ने उस बदमाश से कहा, “देखा? गाय ग्वाले की है। तूने डरा-धमकाकर इसकी गाय छीन ली थी। ऊपर से तू झूठ भी बोला और अदालत का समय बरबाद किया। “.बदमाश घबरा गया और बीरबल के पैर पकड़कर माफी माँगने लगा।
बीरबल ने उसे पचास कोड़े मारने की सजा सुनाई और ग्वाले को उसकी गाय सौंप दी। ग्वाला अपनी गाय लेकर बीरबल को दुआएँ देता खुशी-खुशी अपने घर चला गया और बादशाह अकबर ने भी बीरबल की प्रशंसा की।
Tiriya Se Raj Na Chipaye Story In Hindi- एक पति-पत्नी का आपस में बहुत प्रेम था। दोनों एक-दूसरे पर पूरा विश्वास करते थे। यहां तक कि पति ने अपनी पत्नी के प्रेम के आगे पूरे परिवार को दरकिनार कर दिया था। पत्नी के लिए वह घर के सब लोगों से लड़ लेता था। वह जानता था कि उसके माता-पिता कितने सीधे और सच्चे हैं, लेकिन जब कोई मौका आता, तो पत्नी का ही पक्ष लेता था।
भाई से अच्छे संबंध होने के बाद भी वह कोई विशेष बात उसे नहीं बताता था। अपनी पत्नी को सब कुछ बता देता था। एक दिन वह घूमता हुआ गांव के एक अनुभवी व्यक्ति काका के पास गया। काका बहुत अनुभवी व्यक्ति थे और उसके पिता के पक्के दोस्त थे। दोस्त तो अब भी थे, लेकिन पहले जैसा घूमना-फिरना उठना-बैठना नहीं हो पाता था।
काका को अपनी राजी-खुशी बताते समय अपनी पत्नी के बारे में अधिक बोलता था। उसकी प्रशंसा करता रहा था। उसने यह भी बताया कि जो भी राज की बात होती है, पत्नी से छिपाता नहीं है। विश्वास के मामले में उसने पूरे परिवार को शक की नजर से देखना शुरू कर दिया था। जब वह सब कुछ बताकर थक गया, तब काका ने कहा, “जो तुम सोच रहे हो, वह सही नहीं है। अपनी पत्नी के बारे में तुमको जरूरत से ज्यादा विश्वास है।
किसी समय परीक्षा लेकर देखो, फिर पता चलेगा कि कौन कितनी राज की बात छिपा सकता है? में यह नहीं कह रहा कि तुम्हारी पत्नी का प्रेम सच्चा नहीं है। कभी-कभी सच्चा प्रेम करने वाला नासमझी में अपने प्रिय का हित करने के चक्कर में अहित कर बैठता है।” सारी बात सुनकर वह अधीर हो उठा। उसने जल्दी से जल्दी पत्नी की परीक्षा लेनी चाही।
उसने काका से कुछ करने के लिए पूछा, तो काका ने उससे एक नाटक रचने को कहा और उसे विस्तार से समझा दिया। एक दिन रात के समय वह एक कटा तरबूज अंगोछे में लपेटे हुए लाया। उसकी पत्नी ने देखा अंगोछे से टपक-टपककर ताल बूँदें गिर रही हैं। वह अपनी पत्नी से बोला, “देख किसी से कहना मत। मैंने एक आदमी का सिर काट लिया है। इसे छिपाना है, नहीं तो मुझे सिपाही पकड़ लेंगे और मुझे फांसी की सजा मिलेगी।
“उसने अपनी पत्नी से एक फावड़ा मंगवाया और घर के बाएं ओर थोड़ा चलकर एक पेड़ के नीचे उस अंगोछे में लिपटे तरबूज को रख दिया। वहीं उसने एक गड्ढा खोदा और उसमें उस तरबूज को अंगोछे सहित गाड़ दिया। ऊपर से मिट्टी डालकर वह जगह समतल बना दी।
उसकी पत्नी इस घटना से बेचैन हो उठी। अपने पति से कुछ नहीं कहती थी, बल्कि अंदर-ही-अंदर घुटन महसूस कर रही थी। उसे एक दुख-सा महसूस होता था। अब वह मन में रखे इस बोझ से हलका होना चाहती थी। एक दिन उसने अपनी पक्की दोस्त पड़ोसन को यह बात सुना दी और कहा, “देख बहन, किसी से कहना मत, नहीं तो मेरे पति को फांसी हो जाएगी।
“उस महिला को भी वह बात नहीं पची। उसने अपनी पक्की दोस्त पड़ोसन महिला को यह घटना सुनाई और कहा, “देख बहन, किसी से कहना मत। नहीं तो उसके पति को फांसी हो जाएगी।” इसी प्रकार एक ने दूसरे से, दूसरे ने तीसरे से, तीसरे ने चीथे से कहा और फिर यह खबर पूरे गांव में फैल गई। बहुत-सी औरतों ने यह घटना अपने आदमियों से भी कहीं। एक दिन ऐसा आया, जब यह खबर इलाके के थाने में पहुंच गई।
फिर क्या था? सुबह तड़के दरोगा और सिपाही उसके घर जा पहुंचे। जब गांव वालों को पता चला तो गांव के तमाम लोग आए काका भी उसके घर पहुंच गए थे। दरोगा ने सबसे पहले उसकी औरत को धमकाकर पूछा, “बता तेरे आदमी ने सिर कहां गाड़ा है? नहीं तो तुझे फांसी हो जाएगी।” उसने डर के मारे वह स्थान इशारा करके दिखा दिया।
जब उस स्थान को खोदा गया तो अंगोछे में लिपटा हुआ एक कटा तरबूज निकला। जब उसके आदमी को डांटा गया, तो उसने पूरी घटना कह सुनाई। काका ने भी कहा कि इसने अपनी पत्नी की परीक्षा लेने के लिए यह किया था। सब लोग चले गए। दरोगा भी चला गया। वह अपने पति के आगे पानी-पानी हो गई। अपनी पत्नी के सामने ही उसके मुंह से निकल गया ‘तिरिया से राज छिपे न छिपाए ।
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Din Se Bedin Bhaye, Gang Nir Piye Se Story In Hindi- रतन नाम का एक पटवारी था। यह हमेशा किसानों के खेतों की नाप-तोल में हेराफेरी किया करता था। गरीब किसानों को वह परेशान करता था और जमींदारों का खैरख्वाह बना रहता। अपने पेशे में वह बदनाम व्यक्ति था। ऐसा रौब बनाए रखता था, जैसे कि बहुत बड़ा अधिकारी हो । नेकी और अच्छे कामों से उसका दूर का भी रिश्ता नहीं था।
राम का नाम तो वह स्वप्न में भी नहीं लेता था। धर्म के नाम पर उसकी पत्नी ने घर में एक छोटी मूर्ति रख ली थी। वह भी अपने आदमी को तरक्की और धन की बढ़ोतरी के लिए पूजा करती रहती थी। रतन पटवारी निकलने ही वाला था कि दरवाजे पर यमदूत पहुंच गए। यमदूत ने आवाज लगाई, तो रतन पटवारी बाहर आया। रतन पटवारी के पूछने पर यमदूत ने कहा, “आपको यमराज ने बुलाया है।
मेरे साथ चलिए।” रतन पटवारी ने कहा, “थोड़ा रुकिए। अभी आता हूं।” इतना कहकर रतन पटवारी अंदर गया और सोचने लगा कि इस तरह यमराज ने बुलाया है, जरूर कोई बात है। इसका लाभ उठाना चाहिए। उसने एक कागज पर कुछ लिखा और कागज को तोड़-मरोड़कर रख लिया। फिर वह घर से बाहर निकल आया।
यमदूत रतन पटवारी को लेकर चल दिए। थोड़ी देर में ही यमलोक पहुंच गए। रतन पटवारी ने यमराज को नमस्कार किया और जेब से कागज निकालकर देते हुए कहा, “फरमान है, आपके लिए।” यमराज ने कागज को पढ़ा। उसमें लिखा था- “यमराजजी, रतन पटवारी आपके पास आ रहे हैं। इन्हें अपना कार्य-भार साँप दें। आपको अवकाश पर भेजा जाता है, विष्णु भगवान।” यमराज ने रतन पटवारी को कार्य-भार सौंपा और चले गए।
रतन पटवारी यमलोक के राजा हो गए। नया क्या होना चाहिए, इसके लिए रतन पटवारी की खोपड़ी काम करने लगी। उसने यमदूतों को आदेश दिया कि जितने लोग स्वर्ग में हैं, उन्हें नरक में डाल दिया जाए और नरक के लोगों को स्वर्ग में यही हुआ। स्वर्ग के लोग नरक में और नरक के लोग स्वर्ग में डाल दिए गए।
तीनों लोकों में हाहाकार मच गया। देवता हाय-हाय करते हुए विष्णु भगवान के दरबार में पहुंचे। देवताओं ने विष्णुजी से कहा, “हे करुणानिधान, आपके यहां तो अब अनर्थ होने लगा है। हमारे भक्त और पुण्यात्माएं नरक में डाल दिए गए हैं और नरक के पापियों को स्वर्ग में पहुंचा दिया गया है।” विष्णुजी ने देवताओं से कहा, “आप लोग निश्चिंत होकर जाइए। अभी सब ठीक कराता हूँ।” देवता लोग चले गए।
विष्णुजी ने यमराज को बुलवाया। यमराज आए और हाथ जोड़कर खड़े हो गए। विष्णुजी ने पूछा कि आपके यमलोक में यह क्या हो रहा है? विष्णुजी की बात सुनकर यमराज ने कहा, “प्रभु क्षमा करें। यह सब आपके प्रिय भक्त रतन पटवारी का काम है। आपके ही फरमान से उसे मैंने अपना कार्यभार सौंपा था, और मुझे अवकाश दे दिया गया था।
“विष्णुजी ने कहा, “मेरा भक्त ऐसा नहीं कर सकता। मैंने अपने भक्त को अपने पास बुलवाया था। आप लोग सीधे यमलोक कैसे ले गए? इसकी पूरी छानवीन करो। जरूर कहीं गड़बड़ है। यमलोक में पहले जैसी स्थिति कर दो। “यमराज ने जाकर सबसे पहले रतन पटवारी को हिरासत में ले लिया और स्वर्ग के लोगों को स्वर्ग में और नरक के लोगों को नरक में पहुंचा दिया।
छानबीन करने से पता चला कि विष्णुजी का भक्त रतन दूसरा व्यक्ति था । यमदूत उसके बदले में रतन पटवारी को पकड़ लाए थे। उस रतन पटवारी को धरती पर भेज दिया गया। जब यमदूत रतन पटवारी को छोड़कर वापस आ रहा था तो सोचता आ रहा था दीन से बेदीन भए, गंग नीर पिए से । सात पुश्त नरक गई, राम नाम लिए से। वाह रे रतन पटवारी तेरा भी कोई जवाब नहीं।
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Maya Tere Tin Nam: Parsa, Parsu, Parshuram Story In Hindi- एक बनिया था। जब उसका लड़का मोहल्ले के लड़कों की शोहबत में पड़ा, तो उसे चिंता होने लगी। लड़के की पढ़ाई तो पांचवीं कक्षा में बंद हो गई थी। लड़का गलत आदतें न पाल ले, इसलिए बनिये ने उसे धंधे में लगाने की सोची। बनिया चाहता था कि उसका लड़का धंधे को अपनी मेहनत से बढ़ाए।
इसलिए उसने अपने लड़के को केवल पांच रुपए देकर कहा, “ये पैसे लो और अपना कोई काम करो। “उसने गली-गली में घूम-घूमकर उबले हुए चने बेचने शुरू कर दिए। वह दो सेर चने शाम को पानी में भिगोता और सुबह उबाल लेता। चटनी बना लेता। एक डिब्बा नमक का और एक डिब्बा मिर्च का रखता।
यह सब एक थाल में रखता और एक अंगोछे की इंडुरी बनाकर सिर पर रख लेता। जो जानते थे वे आवाज लगा लेते थे, “आ परसा! एक छटांक चने देना।” कुछ समय में उसने अच्छी बचत कर ली। जब बनिये ने देखा कि इतने पैसों से लड़का और अच्छा काम कर सकता है, तो चाट का खोमचा लगवा दिया।
लड़का अब सयाना भी हो चला था और कपड़े भी जरा ढंग से पहनने लगा था। उसका खोमचा चल पड़ा। अब लोग उससे कहते, “परसू भाई! दो छटांक दाल के पकौड़े देना। “कुछ सालों में उसने कई हजार रुपए कमा लिए। अब बनिये ने उसको एक दुकान करवा दी। अब उसमें वह बारदाना बेचना शुरू कर दिया।
कुछ ही समय में उसकी दुकान अच्छी चलने लगी। अच्छी कमाई होने लगी। अब वह लाला बनकर गोल टोपी लगाकर गद्दी पर बैठने लगा। उसने सहयोग के लिए दो-एक नौकर रख लिए। अब लोग उसे लाला परसुराम कहकर पुकारने लगे। जब कोई पुराना साथी लाला से मिलता और कहता, “यार, अब तो तुम लाला परसुराम हो गए हो।
अब परसा कहां रहे बनिया जवाब में कह देता, ‘माया तेरे तीन नाम परसा, परसू, परसुराम।’
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Bhagte Chor Ki Langot Hi Sahi Story In Hindi- एक चोर चोरी करने निकला। रात अंधेरी थी। उसने एक बनिये के घर में पिछवाड़े से बंध लगा है। घर में घुसकर सामान टटोलने लगा। जैसे ही सामान लेकर चला कि कोई बीम उसकी आवाज से बनिया जाग गया और अंदर कमरे की और दौड़ा। चोर सामान लेकर संघ से निक ही रहा था कि बनिये ने पीछे से कमर पकड़ने की कोशिश की। चीर ने सामान बाहर फेंककर बनिये की पकड़ से बचने की कोशिश की।
चोर तो निकलकर भाग गया, लेकिन चोर की लंगोटी बनिये के हाथ में जी गई। बनिये ने देखा कि नंगा चोर भागता जा रहा है और कुछ दूर जाकर अंधेरे में गायब हो गया। उसके शरीर पर लंगोटी थी, सो बनिये के हाथ में रह गई थी। बनिये ने शोर मचाया तो तमाम लोग इक हो गए। गांववालों ने बनिये से चोर के बारे में पूछताछ की।
बनिये ने बताया कि किसी वस्तु के गिरने की आवाज से मेरी नींद टूट गई और में तुरंत दौड़ा, तो चोर सेंध से निकलकर भाग रहा था। मैंने जैसे ही उसे पकड़ा तो उसकी यह लंगोटी मेरे हाथ में आ गई और वह नंगा ही भागता चला गया। दीये की रोशनी में जब उसने लंगोटी लोगों को दिखाई तो गांव के दर्जी ने पहचान लिया।
सुबह होते ही बनिया कुछ लोगों के साथ मुखिया के पास गया। लंगोटी दिखाते हुए बनिये ने पूरी घटना सुनाई। मुखिया ने लंगोटी देखकर कहा, “चलो, ‘भागते चोर की लंगोटी ही सही’। इससे सब कुछ पता चल जाएगा। “उस लंगोटी के जरिए ही चोर तक पहुंचे और उसने चोरी करना स्वीकार कर लिया।
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