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जिसकी लाठी, उसकी भैंस | Jisli Lathi Uski Bhains

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Jisli Lathi Uski Bhains

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Jisli Lathi Uski Bhains- नदी । पार करते ही जंगल का रास्ता शुरू हो जाता था। आगे-आगे भैंस चली जा रही थी, पीछे-पीछे पंडित जी चलते-चलते पंडित सोचता भी जा रहा था कि जमींदार के यहां पहली संतान हुई थी, वह भी लड़का। बड़ी धूम-धाम से मनाया या लड़के का जन्मदिन। जमींदार के वंश की आगे की परंपरा खुत गई थी। जमींदार के यहां पांच भैंस थीं। आज खुशी-खुशी से जमींदार ने मुझसे कहा था कि यजमानी में जिस भैंस को चाहो ले लो।

पंडित आज मन पसंद की भैंस यजमानी में पाकर बहुत प्रसन्न था। जिंदगी में पहली बार किसी ने यजमानी में इतनी बड़ी चीज दी थी। पंडितजी पहलवानी के शौकीन थे, इसलिए अब दूध की कमी नहीं रहा करेगी। राह में यही सब सोचता पंडित चला जा रहा था। जंगल की पगडंडी से होता हुआ एक अहीर चला आ रहा था। उसके हाथ में लाठी थी। पगडंडी से आता हुआ वह पंडित के पास से ही निकला।

अहीर पंडित से बात करते हुए साथ-साथ चलने लगा। भैंस को देखकर अहीर की नीयत खराब हो गई। वह पंडित से बोला, “पंडितजी आप पूजा-पाठ करने वाले आदमी, भत्ता आप कहां भैंस की देखभाल कर पाएंगे। जंगलों में चराना और तालाब में स्नान कराना, यह सब आपके बस की बात नहीं है। आप यजमानी करेंगे या भैंस की देखभाल करेंगे।”

पंडित उसकी बात सुनता जा रहा था, और भैंस को हांकता जा रहा था। पंडित उसकी बात सुनने के बाद बोला “अहीर देवता, तुम कहना क्या चाहते हो?” अहीर बोला, “माई, यही कि भैंस मुझे दे दो। आप देखभाल नहीं कर पाओगे। “पंडित बोला, “अपने लिए लाया हूं तुझे क्यों दे?” अहीर बोला, “यह लाठी देखी है, एक सिर पर पड़ी तो खोपड़ी फूट (खरबूजे की एक अन्य प्रजाति)

की तरह खिल जाएगी। तू भी यजमानी में से मुफ्त में लेकर आया है।” अहीर का शरीर अच्छा गठा हुआ था। वैसे तो पंडित भी कम नहीं था, लेकिन पंडित लड़ने वाला आदमी नहीं था। पंडित के दिमाग में एक बात घर कर गई थी कि अहीर लाठी के बल पर उठ रहा था। पंडित लाठी के बारे में सोचता रहा। पंडित थोड़ा रुककर बोला, “अहीर देवता, यदि तुम ब्राह्मण को कोई वस्तु विना कुछ दिए लोगे, तो घोर नरक में जाओगे।

भैंस ले रहे हो, तो कुछ तो देना ही पड़ेगा अहीर बोला, “पंडितजी मेरे पास तो कुछ नहीं है। घर होता तो और बात थी।” उसने जेब में हाथ डाला, तो कुछ नहीं निकला। पंडित की नजर लाठी के ऊपर थी। पंडित बोला, “कुछ नहीं, यह लाठी तो है। शकुम के तौर पर इसे दिया जा सकता है।”सामने देखा कि लगभग दो फलांग पर गांव दीख रहा है। रास्ता भी बीच गांव one लेकर जा रहा है।

ने तुरंत अपनी साठी पंडित को दे दी। भैंस तो रास्ते पर चल ही रही थी। पीछे-पीछे ये दोनों बातें करते one चले जा रहे one अहीर खुश था कि भैंस मेरी हो गई। असर कभी-कभी हांक समाने हुए हाथ लगा देता या भैंस के गांव में थोड़ी दूर पहुंचते ही एक मिठाई की दुकान मिली। यहां कुछ लोग one one हुए थे। पंडित ने अहीर से one, “अहीर देवता, में रुककर पानी पिऊंगा। तुम जहाँ जा रहे हरे, निकल जाओ।”

अहीर भैंस होकर चलने लगा, तो पंडित ने कहा, “क से जा रहे से मेरी को अहीर बोला, “पंडित, भैंस मेरी है। क्यों रोकते पंडित बोला, “तेरी भैंस है? तू कहां से लाया!” अहीर थोड़ा पंडित की ओर बढ़ा तो पंडित बोला, “दूर रहना, नहीं तो सिरके को दूंगा” दोनों को अगड़ते देखकर वहां के लोगों ने बीच-बचाव किया। तू-तू मैं-मैं की आवाज सुनकर तमाम लोग आ गए। मुखिया का घर सामने ही था।

वे पर पर थे। झगड़ा देखकर भी आ गए। एक ने कहा, “थोड़ा रास्ता दो, मुखिया आ गए। अभी निपटारा होता है ।” एक ने बगल से चारपाई लाकरा दी। मुखिया उस पर बैठ गए। मुखिया ने पूछा, “क्या बात है?” दुकान पर बैठे लोगों ने बताया कि दोनों बाते करते चले जा रहे थे। यहां आते ही दोनों प्रगड़ने लगे। जो ये लाठी लिए हैं, इसने इससे कहा कि मैं थोड़ा रुकूंगा। तुम्हें जहां जाना हो जाओ। इतने पर खाली हाथ वाला बोला कि यह भैंस मेरी है। दोनों झगड़ने लगे। मुखिया ने दोनों की ओर देखा, फिर अहीर की तरफ देखते हुए कहा, “भाई, लाठी इसके हाथ में है।

भैंस को हांकता यह ला रहा है। तुम खाली हाथ आ रहे हो। फिर तुम्हारी भैंस कैसे हो गई अहीर तुरंत बोला, “यह लाठी मेरी है।” इस बात पर मुखिया ने पूछा, “तेरी लाठी है, तो इसके हाथ में कैसे जा गई? झूठ बोलते हो। “अहीर बोला, “लाठी पहले मेरी थी। मैंने भैंस के बदले में लाठी दी है।” अहीर की यह बात सुनकर सब लोग हंस पड़े। बात जो मजेदार थी। हर कोई जानना चाहता था कि यह मामला क्या है? मुखिया ने जब पंडित से पूछा तो उसने पूरी घटना सुना दी। सुनते ही अहीर के चेहरे पर हवाइयां उड़ने लगीं।

मुखिया ने कहा, “अहीर तो मेरे गांव में भी हैं। पर ऐसा वाकिया तो पहली बार सुन रहा हूँ। ब्राह्मण की यजमानी की चीज भी नहीं छोड़ी तूने।” इतना कहकर मुखिया ने सोचा, कि लाठी ब्राह्मण देवता के पास ही रहने दो। अहीर को दिलवाने से पंडित निहत्था हो जाएगा और आगे रास्ते में फिर बदमाशी कर सकता है। मुखिया ने अहीर से कहा, देख रहे हो लाठी किसके हाथ में हैं? ‘जिसकी लाठी उसकी भैंस’।

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(Xanax)

अंधेर नगरी चौपट राजा | Andheri Nagari Chopat Raja Story In Hindi

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Andheri Nagari Chopat Raja Story In Hindi

Andheri Nagari Chopat Raja Story In Hindi – दो साधु एक तीर्थयात्रा पर निकले। इनमें एक गुरु था और एक चेला। वापस लौटते समय उन्हें रास्ते में एक नगर मिला। दिन डूबने में डेढ़-दो घंटे बाकी थे। कुछ थकान भी थी, इसलिए आराम करने के लिए वहीं रुक गए। गुरु ने सामान लाने के लिए चेले को बाजार भेज दिया और खुद खाना बनाने की जुगाड़ में लग गए। गुरु आस-पास से चार ईंटों और सूखी लकड़ियों का इंतजाम कर लाए। अब चेले के आने का इंतजार करने लगे।

Andheri Nagari Chopat Raja Story In Hindi

चेला जाया और खरीदकर लाई हुई चीज गुरु के सामने रख दी। गुरु देखकर दंग रह गए, “यह क्या लाया है? “चेला प्रसन्नता से बोला, “खाजा लाया हूँ। गुरुजी, नगरी बड़ी मजेदार है। बाजार को देखकर तो में भौंचक्का रह गया। हर चीज टका सेर! कुछ भी ले तो भाजी को फाटो-पीटो, आटे को गूंथो, फिर बनाओ। इन सब झंझट से बच गए गुरु बस, एक टके का है यह एक सेर खाजा।” गुरुजी बेले की नासमझी पर मन-ही-मन दुखी हुए, लेकिन क्या करते। जब सुबह पता चला कि इस नगर का नाम ‘अंधेर नगरी’ है, तो और भी दुखी हुए।

गुरु ने तुरंत अपना झोला-झंगा समेटा और चेले से कहा, “चल, यह नगरी ठहरने योग्य नहीं है। इसके नाम से ही पता चलता है कि यहाँ सब कुछ गड़बड़ है। टका सेर भाजी और टका सेर खाजा! अरे ऐसा भी कहीं होता है? यहां कोई समझदार आदमी नहीं है। लगता है, राजा ही नगर को चौपट करने पर तुला हुआ है गुरु की बात चेले के समझ में नहीं आई। वह बोला, “गुरुजी, यहां तो सुख-ही-सुख है।

कुछ दिन यहीं रुकिए। ऐसा सुख तीर्थयात्रा में कहां रखा है? में तो कुछ दिन यहीं रुककर सुख भोगूंगा।” गुरु ने देखा कि चेला बच्चों की तरह अपनी जिद पर अड़ा है, तो रुक गए। गुरु समझदार थे। वे जानते थे कि चेले को अकेला छोड़ने पर जरूर कुछ अहित हो जाएगा। गुरु अपने लिए रोज सादा भोजन बनाते, जबकि चेला नगरी का खाजा मिष्ठान खा-खाकर मोटा होता चला गया।

इन्हीं दिनों नगर में एक घटना घटी। राजा ने एक खूनी कैदी को फांसी की सजा सुनाई। उस कैदी को फांसी देने के लिए गले में डाला जाने वाला फंदा बड़ा बन गया। राजा चिंतित था, क्योंकि फांसी देने के मुहूर्त तक दूसरा फंदा बन नहीं सकता था और यह भी नहीं हो सकता था कि फांसी देने का मुहूर्त आगे बढ़ा दिया जाए।

राजा अपने यहां की परंपरा को संकट में पड़ते देखकर उलझन में पड़ गया। आखिर में राजा ने तय किया कि फांसी तो इसी मुहूर्त में दी जाएगी। इसको नहीं, तो किसी दूसरे को सही फांसी तो देनी ही है। राजा ने अपने सैनिकों को आज्ञा दी कि जाओ, नगर में जो भी व्यक्ति सबसे पहले सामने आए, जिसकी गरदन इस फंदे के अनुसार ठीक बैठे, पकड़ लाओ और फांसी दे दो।

राजा की आज्ञा पाते ही सैनिक निकल पड़े ऐसे व्यक्ति की खोज में ढूंढते ढूंढते संयोग से चला सामने आ गया। वह बाजार में खाजा खरीदने गया था। उसकी गरदन उस फंदे के अनुसार बिल्कुल ठीक थी। सैनिक उसको पकड़ कर ले गए। यह खबर जब गुरु को मालूम पड़ी, तो गुरु भागे-भागे गए। एक ओर चेले पर गुस्सा आ रहा था, तो दूसरी ओर उसकी चिंता भी सता रही थी। चेला जो था। रास्ते भर इसी उधेड़-बुन में लगे रहे गुरु। वहां जाकर देखा, तो चेले को सैनिक पकड़े हुए थे और फांसी देने की तैयारियां चल रही थीं। गुरु ने सैनिकों से कहा, “छोड़ दो चेले को इस समय फांसी पर चढ़ने का अधिकार तो मेरा है।

“क्यों छोड़ दूं इसे एक सैनिक ने कहा। “इस मुहूर्त में फांसी से मरने वाले को सीधा स्वर्ग मिलेगा। शास्त्रों में भी चेले से पहले गुरु का है।” स्वर्ग जाने का अधिकार गुरु ने सैनिकों को खूब घुड़का, लेकिन वे टस से मस नहीं हुए। आखिर में गुरु ने चेले को आंख से इशारा किया। गुरु का इशारा मिलते ही चेला चिल्लाया, “नहीं, गुरुजी। स्वर्ग जाने का मेरा ही अधिकार है। सैनिकों ने मुझे ही पकड़ा है, आपको नहीं।

“नहीं शास्त्र विरुद्ध कार्य नहीं हो सकता। यह महापाप होगा। पहले फांसी पर मैं चलूंगा।” गुरुजी बनावटी गुस्सा दिखाते हुए किल्लाए। गुरु और वेला, दोनों ही चिल्ला-चिल्लाकर झगड़ने लगे। देखते-ही-देखते भीड़ इकट्ठी हो गई। फांसी पर चढ़ने को लेकर इस प्रकार का झगड़ा जनता के लिए आश्चर्य की बात थी। इससे पहले ऐसा न कभी देखा गया था और न सुना ही गया था।

एक ओर राजा की आज्ञा थी और दूसरी ओर साधु का धर्मशास्त्र सैनिक असमंजस में पड़ गए। एक नया संकट पैदा हो गया। अंत में, यह मसला राजा के पास ले जाया गया गुरु और चेले की बात सुनकर राजा को स्वर्ग का लालच हो आया। राजा ने कड़ककर कहा, “यदि इस मुहूर्त में ऐसा ही होना है, तो सबसे पहले यह अधिकार राजा का है। बाद में पद के हिसाब से राजा के उच्च अधिकारियों का।” गुरु-चेला मिलकर दोनों ही चिल्लाते रहे, लेकिन उनकी बात किसी ने न सुनी। सैनिकों ने उन्हें हटाकर एक तरफ कर दिया।

पहले राजा को फांसी दी गई। इसके बाद राजा के उच्च अधिकारियों को फांसी देने का सिलसिला शुरू हो गया। गुरु आखिर थे तो साधु ही, उनकी आत्मा हिल गई। वे अथ बेकसूरों की और हत्या नहीं देखना चाहते थे, इसलिए गुरु ने कहा, “अब स्वर्ग जाने का मुहूर्त समाप्त हो गया।” गुरु की बात सुनते ही फांसी देने का सिलसिला समाप्त कर दिया गया।

इधर गुरु ने चेले के कान में कहा, “देख लिया अंधेर नगरी और यहां के लोगों को निकल चल जल्दी से ” चेला चुपचाप गुरु के पीछे-पीछे चला गया। उसके बाद जब भी इस नगरी के बारे में जिक्र किया जाता, तो गुरु निम्न पंक्तियां कहने से नहीं चूकते थे अंधेर नगरी चौपट राजा। टके सेर भाजी, टके सेर खाजा।

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एक से बढ़कर एक | Ek Se Badhkar Ek Story In Hindi

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Ek Se Badhkar Ek Story In Hindi

Ek Se Badhkar Ek Story In Hindi – एक था सुनार और एक था अहीर। दोनों के चोरों और ठगों से संबंध थे। चोरी और लूट का सामान • खरीदने और बिकवाने में इन दोनों का हाथ रहता था। कुछ दिनों बाद इन दोनों में मित्रता हो गई थी। कभी-कभार एक-दूसरे के यहां आते-जाते, तो मेहमानों जैसी खातिरदारी होती। चोरों का माल न आने से दोनों का काम ठप्प-सा हो गया था। फिर भी सुनार की दाल-रोटी का जुगाड़ होता रहता था।

Ek Se Badhkar Ek Story In Hindi

एक दिन अहीर सुनार के नगर में आया। नगर में आया तो सुनार के घर भी गया। सुनार का आदर-सत्कार किया और शाम को सोने की थाली में भोजन कराया। अहीर खाना खाते समय स्वाद ने अर तो भूल गया, चमचमाती थाली को देखता रहा। अहीर की नजरें थाली पर गड़ी थीं और सुनार की नजरे अहीर के चेहरे पर।

सुनार ने सोचा कि अहीर है तो मित्र, फिर भी कहा जाता है कि चोर चोरी से जाए, हेरा-फेरी से न जाए, अहीर से बचके तो रहना ही पड़ेगा। सुनार ने उसे रात को सामने वाले कमरे में लिटा दिया। अहीर थाली को हथियाने के तरीके सोचते-सोचते सो गया। सुनार ने सोते समय अपनी चारपाई पर छींका टांगा और उसमें थाली रख दी। उस थाली में एक लोटे की सहायता से ऊपर तक पानी भर दिया। उसके नीचे सुनार सो गया।

अहीर की रात को आंख खुली तो उस थाली को तलाशने की सोचने लगा। उसकी नजर सीधी सुनार के ऊपर छींक पर रखी थाली पर पड़ी। वह आया और बड़ी सावधानी से थाली को हलके से छुआ और उचककर देखा थाली पानी से लबालब है। थोड़ा-सा धक्का लगने से थाली का पानी छलककर सुनार के सीने पर गिरेगा।

अहीर के दिमाग में तुरंत एक बात आई। उसने चूल्हे की राख एक दूसरी पाली में भर ली। सुनार के कमरे में पहुंचकर वह छींके पर रखी थाली में राख डालता गया। राख वाली का सारा पानी सोख गई। उसने सावधानी से थाली उतारी और घर के बाहर निकल गया। थोड़ी दूर ही सामने एक गढ़ा था। अहीर ने थाली उसी गड्ढे में गाड़ी और आकर सो गया।

सुनार की आंख खुली तो उसने ऊपर देखा-थाली गायब थी। वह उठा और दबे पांव अहीर की चारपाई के पास गया। उसने देखा कि अहीर के पैर गीले हैं। वह समझ गया कि अहीर थाली को सामने वाले गड्ढे में गाड़ आया है। सुनार गया और उसने गड्ढे की तली में टटोलना शुरू कर दिया। थाली मिल गई।

सुबह होते ही अहीर तैयार होकर घर जाने लगा। सुनार ने उससे एक दिन और रुकने के लिए कहा। अहीर रुक गया। अहीर को फिर उसी तरह की चमचमाती थाली में खाना दिया गया। अहीर ने उस थाली को ध्यान से देखा और पहचान गया। थाली के किनारे पर एक जगह निशान था। अहीर समझ गया कि सुनार वहां से थाली निकाल लाया है। सुनार भी उसकी नज़रों से समझ गया कि इसने वाली पहचान ली है।

खाना खाते समय अहीर बोला, “मैं अपने को बहुत तीरंदाज मानता था, लेकिन तुम मेरे से भी चार कदम आगे निकले।” फिर काम-धंधे की बातें चलती रहीं। दोनों इस बात पर तैयार हो गए कि पैसे कमाने के लिए कहीं बाहर चलते हैं। दूसरे दिन दोनों चल दिए। दोनों एक शहर में पहुंचकर घूमते रहे। घूमते-घूमते शहर के दूसरे छोर पर पहुंचे। वहां उन्हें सामने एक शवयात्रा आती नजर आई। दोनों पुण्य का काम समझकर उस शवयात्रा में शामिल हो गए। उन्हें पता चला कि यह शवयात्रा तो शहर के बहुत बड़े सेठ की है। दोनों इस शद से कुछ कमाने की सोचने लगे। सुनार बोला, “एक काम करते हैं।

“अहीर बोला, ‘क्या ?’ सुनार ने कहा, “थोड़ी देर में शव जलाने के बाद सेठ के लड़के घर जाएंगे। तुम इनके साथ जाकर घर देख लेना और फिर एक घंटे बाद जाकर सेठ के लड़कों से कहना कि सेठ को मैंने दस हजार रुपए रखने के लिए दिए थे। लेने आए हैं और वे मना करें, तो कहना कि मरघट पर चलकर सेठ जी से पूछ लो। यदि सेठजी हां में आवाज देते हैं, तो दे देना। इतना कहकर यहीं आ जाना। में तब तक एक सुरंग खोदना शुरू करता हूँ।”

अहीर उनके साथ चला गया और एक घंटे बाद उनके लड़कों से उसी प्रकार बताकर दस हजार रुपए मांगे। उन्होंने खाते देखे। खाते में होते, तो मिलते। अहीर ने कहा, “कल आप फूलने जाएंगे। वहीं सेठजी से पूठ लेना और उनकी आत्मा यदि कहती है, तो दे देना। नहीं तो में समझंगा कि मेरे भाग्य में नहीं है। में सुबह आ जाऊंगा।” इतना कहकर वह चला आया और दोनों ने मिलकर रात में सुरंग खोद ली। फिर सुबह जाकर अहीर उनके साथ आ गया।

सेठ के लड़के तथा अहीर उसी जगह खड़े हो गए जहां सेठ का शव जलाया गया था। पहले उन्होंन सेटजी की जली हड़ियां इकट्ठी कर लीं। इसके बाद अहीर ने ऊंची आवाज़ में कहा, “सेठजी, मेरे दिए हुए दस हजार रुपए आपके खातों में नहीं मिले। यदि आपको याद हो, तो हां कह दो और याद न हो तो मना कर दो।

“सुरंग से सुनार की आवाज आई, “यह दस हजार रुपए मेरे पास जमा कर गया था। इसके पैसे देने पर ही मेरी मुक्ति हो पाएगी, नहीं तो मैं नरक में पड़ा रहूंगा।” घर जाकर सेठ के लड़कों ने अहीर को दस हजार रुपए दे दिए। अहीर रुपयों की पोटली लेकर सीधा अपने घर चल दिया। सुनार भी जानता था कि वह सीधा घर जाएगा, इसलिए उसके जाते ही वह सुरंग से निकल आया और अहीर के घर को चल दिया। जब सुनार बाजार से निकल रहा था, तो उसने एक जोड़ी जूते बढ़िया वाले खरीदे और लेकर चल दिया।

अब अहीर का घर करीब दो मील रह गया था। उसने वहीं रास्ते पर उसके आने की प्रतीक्षा की। दूर पर उसे अहीर आता दिखाई दिया। उसने एक जूता वहीं डाल दिया और आगे बढ़ गया। एक जूता उसने एक फर्लांग की दूरी पर डाल दिया। जूते डालकर वह एक पेड़ की आड़ में खड़ा हो गया। जब अहीर पहले जूते के पास से निकला, तो उसका मन ललचाया, लेकिन एक जूता होने के कारण वह आगे बढ़ गया।

आगे जाकर उसे उसी जूते के साथ का दूसरा जूता दिखाई दिया। उसका मन ललचाया। उसने इधर-उधर देखा, कोई दिखाई नहीं दिया। उसने पोटली वहीं रखी और तेज कदमों से पीछे वाला जूता लेने के लिए लौट गया। इधर सुनार ने रुपयों की पोटली सिर पर रखी और खेतों में छिपता-ठियाता गायब हो गया।

जब अहीर जूता लेकर वापस आया तो उसने देखा कि पोटली गायव है। उसने जूते वहीं फेंके और सुनार के घर को चल दिया। सुनार ने घर आते ही अपनी पत्नी से कहा कि अहीर आता ही होगा। उससे कहना कि मैं अभी आपर नहीं हूँ। इतना समझाकर वह एक सूखे, गहरे व अंधेरे कुएं में छिप गया। करीब एक घंटे बाद अहीर सुनार के घर आया। अहीर ने सुनार के आने के बारे में पूछा, तो उसकी पत्नी ने कहा, “वै तो तुम्हारे साथ ही गए थे। यहां तो आए नहीं। आप उन्हें कहां छोड़ आए हैं?

“अहीर समझ तो गया कि यह औरत भी खूब झूठ बोल रही है। उसने भी वहीं रुककर सुनार का पता लगाने की ठान ली। सुनारिन अब रोज अहीर को सुबह खाना खिलाती। फिर पानी भरने जाने के बहाने सुनार को कुएं में खाना पहुंचाती और दूसरे कुएं से पानी भरकर लाती। एक दिन डोलची में कुछ रखते हुए अहीर ने देख लिया और उसे शक हो गया। सुनारिन जैसे ही पानी भरने घर से निकली, तो अहीर भी उसके पीछे-पीछे चला गया। उसने देखा कि सुनारिन ने डोलची कुएं में फांसकर आवाज लगाई, “रोटियां ले लो।” अहीर समझ गया कि सुनार इसी कुएं में छिपा है।

अहीर वापस चला आया। दूसरे दिन अहीर अपने कपड़ों के ऊपर सुनारिन के ही कपड़े पहनकर कुएं पर पहुंचा। डोलची में रोटियां रखकर कुएं में फांसी और सुनारिन की आवाज में कहा, “रोटियां ले लो।” फिर बोला, “अहीर ने तो घर में डेरा डाल रखा है। टलने का नाम ही नहीं लेता। मेरे पास पैसे खत्म हो गए हैं। कुछ पैसे दे दो।” सुनार ने कुएं में से कहा,” यहाँ मेरे पास क्या पैसे रखे हैं? पानी की घिनीची के नीचे रुपयों की पोटली गड़ी है। उसी में से निकाल लेना।

“इतना सुनते ही अहीर ने डोलची खींच ली। उसने लहंगा-फरिहा उतारकर डोलची में रखी और डोलची एक खेत में फेंककर तेजी से चल दिया। जैसे ही सुनारिन सुनार को खाना देने निकली, वह घर में पुस गया और विनोची से रुपए निकालकर ले गया। उधर सुनारिन ने डोलची फांसकर आवाज लगाई, “रोटियां ले लो।” तो सुनार ने कहा कि तू अभी तो रोटियां देकर गई है।

तुरंत उसी क्षण उसके दिमाग में आया और बोला, “जल्दी निकाल कुएं से अहोर सब रुपए लेकर चला गया होगा।” दोनों घर पहुंचे, तो देखा कि पानी को बिनांची ख़ुदी पड़ी है। उसमें एक रुपया भी नहीं निकला। सुनार बड़ा दुखी और उदास होकर बोला, “मैं अपने को ही सबसे अधिक होशियार समझता था, लेकिन दुनिया में ‘एक से बढ़कर एक पड़े हैं।”

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जान बची, लाखों पाए | Jaan Bachi Lakho Paaye Story In Hindi

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Jaan Bachi Lakho Paaye Story In Hindi

Jaan Bachi Lakho Paaye Story In Hindi – एक रियासत में एक नाई और एक पंडित बहुत चालाक और मक्कार किस्म के थे। इनकी मक्कारी से वहां का राजा भी परेशान था। उनसे छुटकारा पाने के लिए राजा ने एक उपाय सोचा। राजा ने नाई और पंडित से अपनी लड़की के लिए एक रियासत में राजकुमार को देखने के लिए कहा। उस रियासत तक पहुंचने के लिए जंगल से होकर रास्ता जाता था।

Jaan Bachi Lakho Paaye Story In Hindi

उधर से जाएंगे तो निश्चित ही जानवर उन दोनों को खा जाएंगे। जब उनसे कहा गया, तो उनके होश उड़ गए। अगले दिन दोनों जाने के लिए इकडे हुए। नाई और पंडित ने आपस में विचार-विमर्श किया कि अगर हम जाने से इनकार करते हैं तो राज्याज्ञा के उल्लंघन में फांसी दी जाएगी। इसलिए दोनों ने जाने का निश्चय कर लिया। सोचा मरना तो यहां पर भी है।

जाने से शायद बचने का कुछ रास्ता निकले। एक-एक झोला लेकर दोनों रियासत से निकल पड़े। जैसे ही जंगल शुरू हुआ, तो दोनों को भय सताने लगा। जाना तो था ही, इसलिए वे आगे बढ़ते गए। करीब एक कोस अंदर जाने पर उनको एक शेर नजर आया। वह सामने ही आ रहा था। शेर को देखकर पंडित कापने लगा। डर तो नाई को भी था, लेकिन उसने हिम्मत से काम लिया और पंडित से भी कहा कि वह बिल्कुल न डरे। नाई ने कहा कि अब मेरा कमाल देखो। पंडित सोचने लगा कि देखते हैं कि नाई क्या करता है? उनके पास आकर शेर ठहाका मारकर हंसने लगा। नाई ने उससे भी अधिक जोर से ठहाका मारा और हंस दिया।

शेर बड़े आश्चर्य में पड़ गया, कि आखिर यह क्यों हंसा? शेर ने नाई से पूछा, “भाई, तुम क्यों हंसे नाई ने भी पूछा, “तुम क्यों शेर ने कहा कि मनुष्य का शिकार किस्मत वालों को और कभी-कभी मिलता है। आज तो दो शिकार अपने आप मेरे पास ही आ गए हैं। इतना सुनते ही नाई ने जोर की आवाज में कहा, “पकड़ ले इसको। जाने मत देना।”

जैसे ही “पंडित ने थोड़ा शरीर हिलाया, तो शेर ने बड़े आश्चर्य से पूछा,” क्यों भैया? मुझे क्यों पकड़ रहे हो?” नाई ने कहा, “हमारे राजा ने एक जैसे दो शेर पकड़कर लाने के लिए कहा है। एक मेरी जेब में है और दूसरा तुम हो पकड़ लो। जाने मत देना। “शेर को बड़ा आश्चर्य हुआ। शेर वह भी जेब में शेर ने कहा, “दिखाओ तो जरा ।”

नाई ने अपनी जेब से शीशा निकालकर उसके सामने कर दिया। उसमें उसी शेर की ही सूरत दिखाई दे रही थी। नाई ने कहा, “देख लिया है बिल्कुल तेरे जैसा ?” शेर आ गया झांसे में बोला, “लगता तो है मेरे जैसा।” इतना कहना था कि नाई ने पंडित से कहा कि छोड़ना मत पकड़ तो इसको शेर डर गया। उसने 1 कहा, “भैया मुझे छोड़ दो, तुम्हारी बड़ी मेहरबानी होगी।

“नाई बोला, “अगर तुझे छोड़ दिया, तो राजा हम दोनों को फांसी पर चढ़ा देगा।” शेर फिर गिड़गिड़ाया और कहा, “इस जंगल में और भी शेर हैं, किसी को भी पकड़ लेना। मेरे साथ चलो। मेरी गुफा में बहुत-से सोने के गहने पड़े हैं। छोड़ने की एवज में मैं तुम्हें दे दूंगा। “दोनों तैयार हो गए और शेर के साथ चल दिए। शेर उनको गहने देकर थोड़ा चला, फिर तेजी से जंगल में भाग गया।

पंडित बोला, “भाई, लाखों रुपयों के गहने होंगे। कैसे क्या होगा इसका?” इतना पन न पंडित ने देखा था और न one ने पंडित घबरा गया। one नाई one, “धीरज घरी घबराते क्यों हो भाई, लौटकर तो वैसे भी नहीं आना है। जहां पहुंचेंगे, वहीं शानदार धंधा करेंगे।” पंडित बोला, “ठीक कहते हो भाई। राजा वैसे ही नाराज रहता है और इतना पैसा देखकर किसी-न-किसी चक्कर में फंसाने का काम करेगा।” यह सब सोचते हुए वे आगे बढ़ते गए। चलते-चलते एक मोड़-सा मिला। थोड़ा मुड़ते ही देखा, तो दोनों की सांसे ऊपर-की-ऊपर और नीचे-की-नीचे रुक गई। वहां बहुत-से शेर थे।

शेरों की सभा हो रही थी। पंडित बोला, “अब नहीं बचने के? वहाँ ती एक शेर था, जो उल्लू बना दिया था। यहां कितने शेर हैं।”नाई ने कहा कि चिंता मत करो। एक काम करते हैं। इन झोलों को इस झाड़ी में रख दो और इस पेड़ पर बढ़ जाते हैं। थोड़ी देर बाद ये सब यहां से चले जाएंगे और हम उतरकर अपने रास्ते पर निकल लेंगे।

इसके अलावा कोई रास्ता भी नहीं था। उन्होंने दोनों झोले झाड़ी में रखे और आंख बचाकर दोनों पेड़ पर चढ़ गए। जैसे-जैसे दिन चढ़ता जा रहा था। पेड़ की छाया सिमटती जा रही थी। सब शेर उसी पेड़ के पास आते जा रहे थे। दोपहर के बारह-एक बजते ही छाया सिमटकर सब पेड़ के नीचे आ गई। सब शेर भी उसी पेड़ के नीचे आ गए। अब तो दोनों की सिट्टी-पिट्टी गुम हो गई। फिर भी नाई पंडित की हिम्मत बंधाता रहा।

शेरों का मुखिया बीच में बैठा था। उसके गले में घंटा बंधा था। उस शेर ने कड़ककर एक शेर कहा, “तुम पागल बन गए उन दो आदमियों से शेर कहीं जेब में होता है? तुमने आदमियों के शिकार छोड़े हैं, तुम्हें बिरादरी से बाहर निकाला जाता है। “शेरों के मुखिया की बात सुनते ही पंडित की हिम्मत जवाब दे गई। अचानक उसके हाथ छूट गए और नीचे घंटे वाले शेर के ऊपर ही जा गिरा।

नाई ने तुरंत अपनी बुद्धि का इस्तेमाल किया। वह बोला, पकड़ ले इसी घंटे वाले को।” इतना कहना था कि घंटा वाला शेर छलांग मार कर भागा। उसने सोचा कि वास्तव में ये आदमी कितने साहसी हैं कि शेरों की भरी सभा में कूद पड़े घंटे वाले मुखिया के भागते ही सब शेर भाग खड़े हुए।

पेड़ के नीचे अकेला पंडित बेहोश पड़ा था। नाई ने पेड़ से दूर-दूर तक देखा। जब कहीं कोई शेर दिखाई नहीं दिया, तो वह पेड़ के नीचे उत्तर आया। पंडित को झकझोरा तो पंडित ऐसे करने लगा। जब पंडित की आंखें खुली तो देखा कि नाई सामने खड़ा था। पंडित की धोती खराब हो गई थी। उन्होंने झीले उठाए और चल दिए। पास में एक झील थी, वा दोनों ने स्नान किया और अपने-अपने कपड़े धोए। कपड़े सूखते ही पहने और चल दिए। दिन डूबने से पहले वे जंगल पार करके दूसरी रियासत में आ गए, तो नाई ने कहा, चली पंडित जी, यहीं कोई धंधा करेंगे। ‘जान बची, लाखों पाए।

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निन्यानवे का फेर | Ninyanve Ka Fer Story In Hindi

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Ninyanve Ka Fer Story In Hindi

Ninyanve Ka Fer Story In Hindi – एक बनिया और बढ़ई दोनों एक-दूसरे के पड़ोसी थे। बनिया नगर का जाना-माना सेठ था। उसका लाखों का कारोबार फैला हुआ था। सेट की कई एकड़ जमीन में खेती होती थी। गेहूं, सरसों और घी के गल्लामंडी में गोदाम थे। बहुत-से नोकर-चाकर थे। ब्याज का पैसा आता था सो अलग। लाला रात-दिन पैसे जोड़ने में लगा रहता। एक-एक येले का हिसाव रखता था। उसे कोई शोक भी नहीं था यही कह सकते हैं कि उसे पैसे जोड़ने का बहुत शौक था।

Ninyanve Ka Fer Story In Hindi

यहां तक कि उसके यहां अच्छा भोजन भी नहीं बनता था। खर्च के नाम पर उसे बुखार आ जाता था। सेठानी का स्वभाव सेठ से थोड़ा अलग था। वह सोचती रहती थी कि हमारे पास इतना पैसा है, लेकिन सब कुछ होते हुए भी हम खुश नहीं रहते हैं। कभी हंस नहीं पाते। सेठ के पास इतना समय नहीं रहता कि ढंग से हम हंस-बोल सकें। घर से सुबह निकलते हैं और शाम को ही घर में घुसते हैं। यह संयोग था कि सेठ के घर कोई बच्चा नहीं था। परिवार के नाम पर तीन ही प्राणी थे-सेठ, one और सेठ one one सेठ one मां इतनी वृद्ध थी कि एक जगह पड़ी रहती।

सेठानी को अपनी सास से चिढ़-सी one one one सेठ की मां की one one one one बढ़ई गरीब था। कोई उससे किवाड़ की जोड़ी बनवाता था, तो कोई चौखट बनवाने आता था। कभी किसी का हल बना देता और कभी बैलों का जुजा बना देता। इस तरह उसे कोई-न-कोई काम मिलता रहता और उसके घर का रोजाना का गुजारा चलता रहता था। बढ़ई का परिवार मोटा खाता था, मोटा पहनता था और खुश रहता था।

तीज-त्योहार के दिन पूरियां, खीर बनतीं और कभी-कभी बेसन के नमकीन पुआ तथा मूंग की दाल के पकोड़े भी बनते सारा परिवार ही खुशी-खुशी रहता। बढ़ई की छोटी-छोटी दो बच्चियां थीं। बढ़ई और उसकी पत्नी कभी-कभी अपनी बच्चियों के साथ मस्त रहते। एक दिन बढ़ई अपनी पत्नी से प्रसन्नचित मुद्रा में हंस-हंसकर बातें कर रहा था। पास ही दोनों बच्चियां खेल रही थीं। सेठ और सेठानी, दोनों बैठे-बैठे झरोखे से यह सब कुछ देख रहे थे। सेठानी बोली, “देखो इस बढ़ई को बेचारा अपनी मजदूरी में अपने घर का खर्चा चला लेता है। हमेशा दोनों को हमने इसी तरह बातें करते देखा है। बच्चे भी खेल रहे हैं। मकान भी इसका आधा कच्चा है।

हम हर तरह से संपन्न हैं। फिर भी हम इन जैसे सुखी नहीं रह पाते।” सेठानी की बात सुनकर सेठ एक क्षण तो चुप रहा। फिर बोला, “इनके पास सबसे बड़ा धन है संतोष धन। वह हम लोगों के पास नहीं है, इसीलिए सब कुछ होते हुए भी हम दुखी रहते हैं। किसी ने कहा भी है ‘हो रतनों की खान, तो भी बहुत दुखारी । जिस पर हो संतोष, रहे वो सदा सुखारी ॥

सेठानी को सेठ की बात कुछ अजीब-सी लगी। सेठानी फिर बोली, “क्या संतों जैसी बातें करते हो? हमारे पास धन-दौलत, हवेली, इज्जत सब कुछ तो है। संतोष क्या इनसे बड़ी चीज होती है? हमें कभी किसी तरह की चिंता नहीं रहती। बढ़ई को हमेशा कल की चिंता बनी रहती है।”

सेठानी का तर्क सुनकर सेठ थोड़ी देर के लिए चुप रहा, फिर बोला, “तुम इस तरह समझ नहीं पाओगी। यह समझो कि हम निन्यानवे के फेर में पड़े रहते हैं और ये निन्यानवे के फेर में नहीं पड़े हैं।” सेठानी फिर बोली, “कमी संतोष, कभी निन्यानवे का फेर, मुझे तो कुछ समझ में नहीं आता।” सेठ बोला, “किसी चीज को समझने में समय लगता है। तुरंत कैसे समझ में आएगी?” सेठ था तो कंजूस, लेकिन सेठानी को गुमसुम रहते देखकर घबरा गया। उसने सेठानी के खातिर निन्यानवे रुपए का जुआ खेला।

एक दिन सेठ ने सेठानी को रुपयों की एक थैली दी और कहा कि ये थैली बढ़ई के आंगन में डाल दो। सेठानी ने झरोखे से चारों तरफ देखा, जब कोई नहीं दिखा तब सेठानी ने बढ़ाई के आंगन में थैली डाल दी। बढ़ई के घर में थैली गिरने की आवाज हुई। शाम का समय था। पर पर बढ़ई भी था। दोनों तेजी से बाहर निकल आए। दोनों ने एक थैली पड़ी देखी। थैली भारी थी। खोलकर देखा तो रुपए थे उसमें। दोनों अंदर ले जाकर गिनने लगे। निन्यानवे रुपए निकले।

बहूई ने सोचा, चलो सेठजी से पूछ लेते हैं। बढ़ई सेठ के दरवाजे पर पहुंचा और कुंडी खटखटाई। सेठ और सेठानी निकले, “कहो, रामलाल, क्या काम है?” बढ़ई ने कहा, “सेठजी, जभी मेरे आंगन में एक थैली गिरी है। उसमें निन्यानवे रुपए हैं। आपके यहां से किसी तरह गिर गई होगी, ले लीजिए।” सेठ ने कहा, “नहीं भई। मेरी बैली नहीं है और मेरे यहां तो कोई बच्चा भी नहीं है। कोई चील मांस समझकर ला रही होगी। उसकी चोंच से छूट गई होगी।”

सेठ के समझाने के बाद बढ़ई वापस लौट आया। उसने अपनी औरत को सब बात बता दी। बढ़ई ने कई दिनों तक डुग्गी पिटने का इंतजार किया। फिर बढ़ई और उसकी औरत ने सोचा कि इन रुपयों का क्या किया जाए? उनके लिए दो-चार रुपए बहुत बड़ी बात थी और ये तो एक कम एक सौ रुपए थे। रुपए आते ही बढ़इन की खोपड़ी काम करने लगी। शाम को खाना खाने के बाद जब दोनों एक साथ बैठे तो बढ़इन ने कहा, “बच्चियां बड़ी होंगी। इनके विवाह करने पड़ेंगे। अभी से जोड़ना पड़ेगा। नहीं तो फिर, कर्ज लेना पड़ेगा। कर्ज भी देगा कौन? कोई खेती-बाड़ी तो है नहीं। यह धंधा है, रोज कमाना रोज खाना अभी से थोड़ा-थोड़ा बचाना शुरू करते हैं। दूसरी बात यह कि मेहनत का काम तब तक ही है, जब तक शरीर में जान है। बुढ़ापा आते ही बैठकर खाना पड़ेगा। कोई लड़का तो है नहीं, जो बैठाकर खिलाएगा।” यह सुनकर बढ़ई बोला, “थोड़ा-बहुत तो मरते दम तक करते ही रहेंगे। रहा सवाल बच्चियों के विवाह का तो कन्याएं तो किसी कंगले की भी कुंवारी नहीं रहतीं। फिर ईश्वर पर भरोसा रखो।”

फिर भी बढ़इन ने खाने-पीने, पहनने में थोड़ी-थोड़ी कटौती करके, पाई-पाई जोड़ने में लग गई। अब खान-पान में कमी होने से चेहरों पर पहले जैसी रौनक नहीं रह गई थी। कपड़े भी ढंग के नहीं रह गए थे। उनका वह हंस-हंसकर बात करना भी नहीं रहा था। बच्चे भी आपस में झगड़ने लगे थे। सेठ ने फिर सेठानी से कहा, “थलो, आज पड़ोसियों को देखते हैं। बढ़ई का क्या हाल है दोनों उसी झरोखे से खड़े होकर देखने लगे।

देखकर सेठानी बोली, “अब तो सब कुछ बदल गया। अब तो किसी के चेहरे पर रौनक नहीं दिखाई दे रही है और अब दोनों इस प्रकार बात कर रहे हैं, जैसे कोई विशेष चिंता वाली बात हो। अब बच्चे भी आपस में झगड़ रहे हैं।” सेठ ने कहा, अब ये भी हमारी तरह एक-एक घेता बचाकर जोड़ने लगे हैं। इसी को कहते हैं-‘निन्यानवे का फेर’

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गोबर बादशाह का कमाल है | Gobar Badshah Ka Kamal Hai Story In Hindi

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Gobar Badshah Ka Kamal Hai Story In Hindi- एक महिला थी। उसकी गोदी का लड़का कई दिनों से बीमार चला आ रहा था। कई वैद्यों की दवाइयों खिला चुकी थी। जिसने जो वैद्य बताया, उधर ही लड़के को लेकर दौड़ती। कोई दवा काम नहीं कर रही थी। जो भी जान-पहचान का मिलता, तो यही पूछता था, “अभी ठीक नहीं हुआ तुम्हारा लड़काशी वह उसको सीधा-सीधा जवाब देती, “किसी की दवा नहीं लग रही है। कइयों को दिखा चुके है एक दिन वह कहीं से लड़के के लिए दवा लेकर आ रही थी। रास्ते में उसे मोहल्ले का एक व्यक्ति मिला।

मोहल्ले के नाते से वह उसे भाभी कहता था। बोला, “भाभी क्या हाल है तुम्हारे लड़के का उसने उत्तर दिया, “अभी तो कोई दवा नहीं लगी है। बहुतों का इलाज करा लिया है। तुमी बता दो कोई वैद्य हो।” वहीं गली के किनारे एक मैदान सा था। वहां एक पीपल का पेड़ खड़ा था। वहां आवारा गाए आर बैठ जाती थीं।

यहां गोवर हमेशा पड़ा ही रहता था। उसने उसी गोंबर की ओर इशारा करते हुए मजाक किया, “देखो, वो गोबर बादशाह है। वहां पीपल के नीचे जाकर मत्था टेको और दो अगरबत्ती जलाओ। ठीक हो जाएगा, लेकिन दवाएं खिलाना बंद मत करना।” उसने कहा, “अच्छा देवरजी में यह भी करके देखती हूँ।” और आगे बढ़ गई।

एक दिन सुबह स्नान करके वह महिला वहां आई। वहां उसे कुछ नजर नहीं आया। फिर उसे बाद आया कि उसने गोवर बादशाह कहा था। गोवर तो पड़ा था। उसने वहीं मत्था टेका और दो अगरबत्ती जलाकर गोवर में लगाई और चली आई। इधर वह दवा भी खिलाती रही, और इधर वह मत्या टेकती, अगरबत्ती जलाती और ‘जय गोवर बादशाह’ कहकर चल देती।

एक दिन उसे वही आदमी फिर मिला। वह बोला, “भाभी, अब तुम्हारे लड़के की तबीयत कैसी है?” महिला बोली, “देवरजी, भगवान तुम्हारा भला करें। गोबर वादशाह को मत्था टेकने से मेरा बेटा बिल्कुल ठीक हो गया।” उसे बड़ा आश्चर्य हुआ। वह फिर बोला, “बिल्कुल ठीक हो गया?” महिला ने हंसते हुए कहा, “हां, देवरजी।” फिर वह आदमी बोला, “सब ऊपर वाले की महिमा है।” इतना कहकर यह सोचने लगा- “मैंने तो

ऐसे ही मजाक में कह दिया था। वैद्य की दवा ने काम किया और इस महिला को गोवर बादशाह पर विश्वास हो गया।” लड़के के ठीक होने की खुशी में उस महिला ने वहां पीपल के पेड़ के नीचे एक आयताकार जगह में किनारे-किनारे ईंटें गड़वा दीं और छह इंच ऊंचा चबूतरा बनवा दिया। रास्ते में जब उसे कोई दूसरी महिला मिलती तो वह पूछती कि तुम्हारा लड़का किसकी दवा से ठीक हुआ।

मेरे बच्चे को भी किसी की दवा नहीं लग रही है, तो वह महिला कहती, “अरी बहन, मैंने तो गोवर बादशाह को मत्या टेका था और दो अगरबत्तियां जलाई थी।” दूसरी महिला बोली, “वहन, यह गोवर बादशाह से कहा?” उसने बताते हुए कहा, “गरीब कटरा के सामनेवाली गली में पीपल का पेड़ है। उसके नीचे मैदान-सा है। वहां गोवर पड़ा रहता है। वह बोली, “अच्छा वहन, में भी जाऊंगी मत्था टेकने।” उस महिला ने यह भी बताया कि जिस वैद्य की दवा खिला रही हो, दवा खिलाते रहना है। दवा बंद नहीं करना है।

“महिला ने अच्छा बहन कहा और चली गई। इस प्रकार जो भी उस महिला के पास आता, वह उसे गोबर बादशाह का स्थान बता देती और साथ में हिदायत देती कि दवा खिलाना बंद मत करना। कुछ दिन बाद किसी को किसी वैद्य की दवा माफिक बैठ गई और वह ठीक हो गया, लेकिन उसने समझा कि वह गोवर बादशाह की कृपा से ठीक हुआ है। वह महिला थोड़ा अधिक खाते-पीते यराने की थी। उसने उस छह इंच ऊंची जगह पर तीन फुट ऊंचा चबूतरा बनवा दिया।

इसी प्रकार जब तीसरे का बच्चा ठीक हुआ, उसने उस चबूतरे पर संगमरमर के पत्थर बिउवा दिए। इसी प्रकार कुछ दिन बाद एक ने पक्का कमरा बनवा दिया। अब वहां मत्था टेकने वालों की भीड़ होने लगी। उथर से एक भिखारी निकला करता था। उसने देखा कि यहां पर तो कुछ नहीं था। धीरे-धीरे यहां कमरा बन गया और कोई देखभाल करने वाला भी नहीं है। उसने यहां अपना डेरा जमा लिया। अब वह सुबह-शाम उसको पानी से धोकर साफ करता और अगरबत्ती लगा देता आने वाले जो श्रद्धा से दे देते, ले लेता था।

कुछ समय बाद वहां शहर तथा आस-पास के गांव के लोग मत्था टेकने आने लगे। जब किसी की मनौती पूरी हो जाती तो कुछ-न-कुछ उस जगह की बढ़ोतरी हो जाती। अब वह स्थान गोवर बादशाह के नाम से प्रसिद्ध हो गया। कुछ दिन बाद उस पुजारी ने साल में दो-तीन तारीखें निश्चित कर दीं। उन तारीखों में मेला लगना शुरू हो गया। मंदिर के आस-पास फूल वाले लोग धूप-अगरबत्ती वाले, प्रसाद वाले, चाट वाले आदि रास्ते के एक ओर लाइन में बैठने लगे।

आस-पड़ोस को तो गोबर बादशाह की जन्म कुंडली मालूम ही थी। इसलिए वे मत्था टेकने नहीं जाते थे। जब कभी उस गली के लोग आपस में बैठकर बातें करते तो एक बुजुर्ग उस आदमी की ओर हाथ उठाकर कहता, “असली तो गोबर बादशाह यह हैं। इन्होंने वहां पड़े गाय के गोबर को मजाक में गोवर बादशाह कह दिया था। अब तो सचमुच ‘गोवर बादशाह का कमाल है’।”

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कबीरा तू कबसे बैरागी | Kabir Tu Kabse Bairagi Story In Hindi

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Kabir Tu Kabse Bairagi Story In Hindi

एक बार गुरु रामानंद और उनके अनेक शिष्य किसी खास बात पर चर्चा कर रहे थे। उन दिनों शोर या कि शंकराचार्य शास्त्रार्थ में सबको हराते हुए काशी की ओर बढ़ते आ रहे हैं और अब काशी में उनका किस तरह से सामना किया जा सकता है? वहीं पर कबीर भी चुपचाप बैठे थे पर वे एक शब्द भी नहीं बोले। सबकी बातों को कबीर चुपचाप सुनते रहे। रामानंद उठकर जैसे ही गए, सब शिष्य अपना-अपना काम करने में लग गए। कबीर तथा कुछ शिष्यः बैठे रहे। इतने में किसी ने सूचना दी कि शंकराचार्य रामानंद को पूछते हुए इधर ही चले आ रहे हैं। कबीर आश्रम के बाहर आकर बैठ गए।

थोड़ी देर बाद कबीर देखते हैं कि शंकराचार्य डंड-कमंडल लिए अपने शिष्यों के साथ चले आ रहे हैं। शंकराचार्य ने पास आते ही कबीर से रामानंद के बारे में पूछा। कबीर ने उन्हें ठहरने के लिए जगह दी। प्रातःकाल का समय था। कबीर ने शंकराचार्य से कहा, “आप तब तक स्नानादि से निवृत्त हो जाइए। रामानंद कहीं गए हैं। अब आते ही होंगे।” शंकराचार्य शौच के लिए तैयार हुए, तो कबीर से पूछा कि शौच के लिए किधर जाना है? कबीर ने थोड़ी दूर जाकर कहा, “उधर जंगल है, कहीं भी कर लेना।” शंकराचार्य अपना कमंडल लिए जंगल की ओर बढ़ गए।

थोड़ा फासला रखकर और आंख बचाते हुए कबीर भी उनके पीछे-पीछे चल दिए। कबीर ने देखा कि शंकराचार्य एक झाड़ी की आड़ में बैठकर शौच करने लगे। कबीर ने थोड़ी दूर खड़े होकर कहा, “राम, राम।” इतना सुनते ही शंकराचार्य मुंह दूसरी और करके बैठ गए। कबीर फिर घूमकर सामने पहुंचकर कहने लगे, “राम, राम।” शंकराचार्य फिर मुंह फेरकर बैठ गए। कबीर चुपचाप आश्रम लौट आए। शंकराचार्य ने शौच के बाद गंगास्नान किया, पूजा-पाठ आदि की, तब निश्चिंत होकर लौटे। शंकराचार्य कबीर से बहुत नाराज थे। आते ही कबीर पर बरस पड़े। कहने लगे, “तुम बिल्कुल अशिष्ट हो। अज्ञानी हो। तुमको इतना भी ज्ञान नहीं कि शौच करते समय अशुद्धावस्था में होते हैं और उस समय यदि बोलता तो राम नाम भी अशुद्ध हो जाता।”

कबीर और शंकराचार्य की आवाजें सुनकर रामानंद के अन्य शिष्य भी वहां आ गए। शंकराचार्य की बात सुनकर कबीर बोले, “आप कह रहे हैं कि अशुद्ध पहले ही थे, फिर आप शुद्ध कैसे हुए। शंकराचार्य को कबीर की बात बड़ी अटपटी लगी। शंकराचार्य ने कहा, “शुद्ध कैसे हुए। गंगास्नान करके और कैसे कबीर ने फिर कहा, “आप तो शुद्ध हो गए, लेकिन गंगा का पानी अशुद्ध हो गया। उसमें जो भी स्नान करेंगे, सब अशुद्ध हो जाएंगे।”शंकराचार्य कबीर को तीव्र बुद्धिवाला समझकर उत्तर देने लगे, “गंगा का पानी तो वायु के स्पर्श से शुद्ध हो गया ।

” इस पर कबीर ने पूछा, “तब तो वायु दूषित हो गई। अब वायु का क्या होगा?” शंकराचार्य ने फिर उत्तर दिया, “अरे नासमझ, उस वायु को यज्ञ से पवित्र किया।” कबीर बड़े प्रखर बुद्धि के साधक थे। फिर शंकराचार्य से उन्होंने एक प्रश्न कर दिया, “तब तो यज्ञ अशुद्ध हो गया। यह तो बहुत बुरा हुआ।” शंकराचार्य ने कहा, “बुरा क्या हुआ, यज्ञ को भी मैंने शुद्ध कर दिया।” कबीर बोले, “यज्ञ किस चीज से शुद्ध कर दिया। “शंकराचार्य ने तुरंत उत्तर दिया, “राम नाम से। “इतना सुनते ही कबीर ने कहा, “यह तो आपने बहुत बुरा किया। आपने राम नाम अशुद्ध कर दिया। हम सब राम का नाम ध्यान करते हैं।” शंकराचार्य थोड़ा आवेश में आकर बोले, “अरे बच्चे, राम नाम तो कभी अशुद्ध होता ही नहीं। वह तो दूसरों को शुद्ध करता है।

“इतना सुनते ही कबीर बोल पड़े, “फिर शौच करते समय राम नाम कैसे अशुद्ध हो जाता? अभी आप ने कहा कि राम नाम हमेशा शुद्ध रहता है। इससे पहले आप कह रहे थे कि मैं अशुद्धि में था, इसलिए राम नाम नहीं ले सकता था। राम नाम अशुद्ध हो जाएगा।” इतना कहकर कबीर ने अपने साथियों से कहा, “ले लो इनके इंड-कमंडल। जब ये रामानंद के शिष्य से नहीं जीत पाए, तो उनसे मिलकर क्या करेंगे?” रामानंद के शिष्यों ने शंकराचार्य के डंड-कमंडल ले लिए। जाते समय शंकराचार्य ने पूछा, “हे रामानंद के श्रेष्ठ शिष्य! क्या अपना नाम बता सकोगे?” इतना कहना था कि कबीर के एक साथी ने कहा, “इनका नाम कबीर है।” शंकराचार्य ने कबीर को प्रणाम किया और चले गए।

इधर कबीर ने अपने साथियों से कहा कि गुरुजी का पता लगाओ कि वे कहां चले गए? जब उन्हें ढूंढा गया, तो वे उपलों के बिटौरे में छिपे मिले शिष्य ने आवाज लगाई, “गुरुजी, बाहर आ जाओ। शंकराचार्य भाग गए।” यह सुनकर पहले तो रामानंद को विश्वास नहीं हुआ। फिर भी पूछा, “यह कैसे हो गया था। शिष्य ने उत्तर देते हुए कहा, “कबीर ने शास्त्रार्थ में हरा दिया और उनके डंड-कमंडल छीन लिए।” बिटीरे से निकलकर रामानंद अपने शिष्यों के पास पहुंचे। कबीर के पास आकर रामानंद खड़े हो गए और उन्हें ध्यान से देखने लगे। कबीर जैसे ही रामानंद के पैर छूने के लिए झुके, तो रामानंद ने रोक कर पूछा, ‘कबीरा तू कबसे वैरागी?’ आज से तू मेरा गुरु है।

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Google Pay में एक से ज्यादा UPI ID कैसे बनाए?

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How to create more upi id on google pay

आज हम बताने वाले हैं कि आप किस तरह से अपने गूगल पे ऐप पर एक से ज्यादा यूपीआई आईडी बना सकते हैं और गूगल पे कितना सुरक्षित है और इसी के साथ कौन सा यूपीआई ऐप आपके लिए सबसे अच्छा रहेगा। तो आज हम आपको इन्हीं चीजों के बारे में विस्तार से बताने वाले हैं अगर आपको इसके बारे में विस्तार से जानना है तो आप हमारे इस आर्टिकल को अंत तक जरूर पढ़ें जिससे आपको इसके बारे में पूरी जानकारी मिल सके।

यूपीआई क्या है और UPI का Full Form क्या होता है?

दोस्तों सबसे पहले बात करते हैं कि यूपीआई का पूरा नाम क्या है और और इसका हिंदी मतलब क्या होता है तो मैं आपको बता दूं कि यूपीआई का पूरा नाम यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस (Unified Payments Interface) है। जिसका हिंदी मतलब “एकीकृत भुगतान अंतरापृष्ठ” होता है।

दोस्तों वैसे तो हमारे भारत देश में रोजाना लाखों लोग यूपीआई या ऐसे ऑनलाइन पेमेंट गेटवे से करोड़ों रुपए का लेनदेन करते हैं यूपीआई एक ऐसी तकनीक है जो कि भारत के द्वारा ही बनाई गई है और जिसका सबसे ज्यादा इस्तेमाल भी भारत में ही होता है यूपीआई को NPCI (नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया) के द्वारा 2016 में लांच किया गया था और तब से आज तक यूपीआई ने भारतीय लोगों के जीवन में बहुत ही महत्वपूर्ण भूमिका अदा की है एनपीसीआई के द्वारा साझा किए गए आंकड़े के अनुसार पिछले महीने यानी कि अगस्त 2022 में  10,72,792.68 करोड़ रुपये का लेनदेन यूपीआई की सहायता से किया गया है। तो आइए अब बात करते हैं UPI की।

गूगल पे पर एक से ज्यादा यूपीआई आईडी कैसे बनाएं?

दोस्तों बहुत सारे लोग इस दुविधा में रहते हैं कि क्या हम अपने गूगल पे पर एक से अधिक यूपीआई आईडी बना सकते हैं और यदि हां तो क्या हम उन सभी यूपीआई आईडी का इस्तेमाल एक साथ कर सकते हैं तो हम आपको बता दें कि क्यों नहीं आप अपने गूगल पे पर एक से अधिक यूपीआई आईडी बना सकते हैं और उनका इस्तेमाल भी कर सकते हैं और हम आपको बता दें कि आप गूगल पे पर एक बार में अधिकतम 4 यूपीआई आईडी बना सकते हैं तो दोस्तों आइए चरणबद्ध तरीके से बात करते हैं कि आप गूगल पे ऐप पर एक से अधिक यूपी आईडी कैसे बना सकते हैं।

  1. अपने गूगल पे एप पर एक से अधिक यूपीआई आईडी बनाने के लिए सबसे पहले अपने गूगल पे ऐप को खोलें।
  2. इसके बाद अपने मोबाइल की स्क्रीन पर दाएं तरफ ऊपर की ओर दी हुई आपकी प्रोफाइल पर क्लिक करें।
  3. प्रोफाइल पर क्लिक करने के बाद आपको अपनी स्क्रीन पर payment method नाम का एक ऑप्शन दिखाई दे रहा होगा अब उस पर क्लिक कीजिए।
  4. अब आप गूगल पे से जुड़े हुए अपने बैंक खाते देख रहे होंगे उस बैंक खाते का चयन करें जिस बैंक खाते से आप एक नई यूपीआई आईडी बनाना चाहते हैं।
  5. अब आपको एक Manage UPI ID का ऑप्शन दिख रहा होगा उस ऑप्शन पर क्लिक करें।
  6. अब आपको नीचे कुछ @abc तरह की यूपीआई आईडी दिख रही होंगी जिन की शुरुआत @ से हो रही होगी इन यूपीआई आईडी के सामने आपको एक प्लस का आइकन दिख रहा होगा।
  7. जिस भी यूपीआई आईडी को आप चुनना चाहते हैं उसके सामने दिए हुए प्लस के निशान पर क्लिक करें।
  8. अब आपको अपने बैंक अकाउंट को अपने मोबाइल नंबर से Verify करना होगा और जैसे ही आपका बैंक अकाउंट वेरीफाई हो जाएगा आपकी एक और नई यूपीआई आईडी तैयार हो जाएगी।

गूगल पे कितना सुरक्षित है?

अब आप में से कुछ लोग यह सोच रहे होंगे कि गूगल पे कितना सुरक्षित है क्या आपके लिए गूगल पे एक अच्छा चुनाव रहेगा। तो हम आपको बता दें कि गूगल पे google कंपनी का पेमेंट गेटवे है जिसकी मदद से आप भारत में ऑनलाइन पेमेंट कर सकते हैं।

भारत में ऐसा कोई व्यक्ति नहीं है जो कि गूगल पे के बारे में ना जानता हो जहां पर गूगल पे की बात आ जाती है तो उसकी सुरक्षा पर तो कोई सवाल ही नहीं उठता गूगल के मुताबिक उसका गूगल पे बेहतरीन सुरक्षा सुविधाओं का इस्तेमाल करके अपने यूजर्स के लेन देन से संबंधित जानकारियों को सुरक्षित रखता है। और गूगल पे पेमेंट गेटवे अत्याधुनिक सुरक्षा सुविधाओं से लैस है। तो गूगल पे की सुरक्षा पर तो कोई सवाल ही नहीं उठना चाहिए। तो हमें उम्मीद है आपको अपने सवाल का जवाब मिल गया होगा।

कौन सा यूपीआई सबसे अच्छा है?

बहुत सारे लोगों के मन में यह भी सवाल रहता है कि भारत में कौन सा यूपीआई एप सबसे अच्छा है जिससे कि वह उसका इस्तेमाल कर सकें अगर इसके बारे में बात करें तो सबसे अच्छा यूपीआई कौन सा है यह तो बताना थोड़ा मुश्किल है हमारे भारत में बहुत सारे यूपीआई ऐप्स है जो कि काम करते हैं अगर हम सबसे ज्यादा यूज किए जाने वाले यूपीआई एप्स की बात करें तो उनमें google pe, phone pe, paytm, Bhim UPI आदि कुछ ऐसे प्रचलित पेमेंट गेटवे हैं जिनका आप इस्तेमाल कर सकते हैं।

अगर हम यूजर्स के हिसाब से बात करें कि सबसे ज्यादा यूजर्स किस पेमेंट गेटवे पर है तो एक रिपोर्ट के अनुसार भारत में Phonepe का इस्तेमाल सबसे ज्यादा यूजर्स करते हैं। तो आप ऊपर दिए गए किसी भी यूपीआई एप का इस्तेमाल कर सकते हैं।

Conclusion

तो दोस्तों आज हमने आपको बताया कि आप किस तरह से अपने google pe ऐप पर एक से अधिक यूपीआई आईडी बना सकते हैं और साथ ही हमने आपको यह भी बताया कि गूगल पे कितना सुरक्षित है और भारत में कौन सा UPI सबसे अच्छा है तो हमें उम्मीद है आपको इन सभी चीजों के  बारे में विस्तार से जानकारी मिल गई होगी।

आप इस जानकारी को अपने दोस्तों के साथ जरूर साझा करें ताकि उनको भी इसके बारे में पता चल सके तो इस आर्टिकल को अपने दोस्तों के साथ शेयर जरूर करें और अगर आपको हमारी जानकारी पसंद आई हो तो नीचे दिए हुए कमेंट बॉक्स में कमेंट जरूर करें क्योंकि आपकी प्रतिक्रिया हमारे लिए बहुत महत्वपूर्ण है और ऐसी ही जानकारियों के बारे में जानने के लिए जुड़े रहिए techyatri.com के साथ।

नॉइज कैंसलेशन क्या है | Noise Cancellation Meaning in Hindi

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Noise Cancellation Meaning in Hindi

तो दोस्तों आज हम बात करने वाले हैं कि नॉइस कैंसिलेशन क्या होता है? यह कैसे काम करता है? और आपको इससे क्या-क्या फायदे हैं  तथा एक्टिव ओर पैसिव नॉइस कैंसिलेशन क्या होता है तो अगर आप नॉइस कैंसिलेशन के बारे में विस्तार से जानना चाहते हैं तो हमारे इस आर्टिकल को अंत तक जरूर पढ़ें ताकि आप नॉइस कैंसिलेशन के बारे में पूरी जानकारी ले पाए तो चलिए अब बात करते हैं नॉइस कैंसिलेशन की।

Noise Cancellation Meaning in Hindi

Noise Cancellation क्या होता है?

नॉइस कैंसिलेशन (Noise Cancellation) का हिंदी अर्थ ” शोर रद्द ” होता है। दोस्तों आजकल स्मार्टफोन तो हर किसी के पास होते हैं आप हमारे आर्टिकल को भी अपने स्मार्टफोन की मदद से ही अभी पढ़ रहे हैं अगर आपका मोबाइल एक अच्छी क्वालिटी का है तो आपके स्मार्टफोन में भी नॉइस कैंसिलेशन माइक दिया हुआ होगा बहुत सारे स्मार्टफोन कंपनियां नॉइस कैंसिलेशन माइक को ऊपर की तरफ देती है तो आप अभी चेक कर सकते हैं कि आपके स्मार्टफोन में नॉइस कैंसिलेशन का माइक है या नहीं।

नॉइस कैंसिलेशन इंजीनियर्स द्वारा बनाई गई एक ऐसी तकनीकी है जिसकी मदद से अगर आप किसी ऐसे इलाके में है जहां पर आप के आस पास बहुत ही ज्यादा शोर हो रहा है और आप किसी से फोन पर बात कर रहे हैं तो इस नॉइस कैंसिलेशन माइक की मदद से सामने वाले व्यक्ति को जिससे आप बात कर रहे हैं बिल्कुल साफ आवाज सुनाई देती है और नॉइस कैंसिलेशन माइक आप के चारों ओर हो रहे शोर को खत्म कर देता है जिससे कि दूसरे व्यक्ति को आपकी आवाज बिल्कुल अच्छी तरह से सुनाई देती है। आजकल यह फीचर केवल स्मार्टफोंस में ही नहीं बल्कि आपके Earphones और Headphones में भी देखने को मिलता है।

जब आप इन इयरफोंस और हेडफोंस में दिए हुए नॉइस कैंसिलेशन फीचर को चालू करते हैं तो आपको आपके आसपास का शोर सुनाई नहीं देता। इसी को ही हम नॉइस कैंसिलेशन कहते हैं। अब आप सोच रहे होंगे कि नॉइस कैंसिलेशन कैसे काम करता है तो चलिए अब इसके बारे में भी बात कर लेते हैं।

नॉइस कैंसिलेशन कैसे काम करता है?

नॉइस कैंसिलेशन के लिए आपके स्मार्टफोन में या फिर जो अच्छी क्वालिटी के महंगे इयरफोंस या हेडफोंस होते हैं उनमें अलग से नॉइस कैंसिलेशन का माइक दिया जाता है जैसे कि आपके स्मार्टफोंस में एक माइक आपके मुंह के नीचे यानी कि आपके स्मार्टफोन के नीचे की तरफ दिया हुआ होता है जो कि आपकी आवाज को रिकॉर्ड करता है और दूसरा नॉइस कैंसिलेशन माइक मोबाइल के ऊपर की तरफ दिया होता है जो कि आपके आसपास हो रहे शोर को रिकॉर्ड करता है और बाद में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से आपकी रिकॉर्ड की हुई आवाज में से बाहरी शोर को हटा दिया जाता है यह कार्य बहुत ही कम समय में होता है जोकि आपके स्मार्टफोन के द्वारा ही कर दिया जाता है।

जिससे दूसरे व्यक्ति को आपकी आवाज सही ढंग से सुनाई देती है और अगर आप अपने  ईयरफोन या हेडफोंस की मदद से कोई जरूरी काम कर रहे हैं या फिर किसी मीटिंग को अटेंड कर रहे हैं तो इन Earphones या headphones की मदद से आपको बाहरी शोर सुनाई नहीं देता और आपका पूरा ध्यान आपके काम पर रहता है।

नॉइस कैंसिलेशन के क्या-क्या फायदे हैं?

सोचिए अगर आपकी कोई जरूरी मीटिंग चल रही है लेकिन आप एक ऐसी जगह पर हैं जहां पर बहुत ज्यादा बाहरी शोर हो रहा है तो ना तो आपको ही सामने वाले की आवाज ढंग से सुनाई देगी और ना ही आपकी आवाज सामने वाले को ज्यादा शोर होने के कारण सुनाई देगी तो यहां पर यह नॉइस कैंसिलेशन वाली तकनीक आपके बहुत ही ज्यादा काम आने वाली है जिसकी मदद से आपको बाहरी शोर से कोई दिक्कत नहीं होगी।

इस नॉइस कैंसिलेशन की तकनीक से बहुत सारे फायदे हैं उनमें से एक फायदा हमने आपको बता दिया इससे और क्या-क्या फायदे हो सकते हैं उनको आप कमेंट बॉक्स में नीचे बता सकते हैं तो इस आर्टिकल को पढ़ने के बाद नीचे कमेंट जरुर कीजिए आपकी प्रतिक्रिया हमारे लिए बहुत महत्वपूर्ण है।

नॉइस कैंसिलेशन भी दो प्रकार के होते हैं तो आइए अब बात करते हैं एक्टिव नॉइस कैंसिलेशन और पैसिव नॉइस कैंसिलेशन की।

एक्टिव नॉइस कैंसिलेशन (ANC) क्या है?

एक्टिव नॉइस कैंसिलेशन में बाहरी आवाज को हटाने के लिए कुछ फिजिकल कॉम्पोनेंट्स का यूज किया जाता है। एक्टिव नॉइस कैंसिलेशन में आपके स्मार्टफोन या फिर इयरफोंस और हेडफोंस में अलग से एक माइक दिया जाता जिसे नॉइस कैंसिलेशन माइक कहते हैं जो कि बाहरी शोर को पहले तो रिकॉर्ड करता है और फिर बाद में उसको आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से हटा दिया जाता है और बाद में आपको आउटपुट के तौर पर अच्छी क्वालिटी का साउंड या कॉलिंग एक्सपीरियंस देखने को मिलता है। इसी को ही (ANC) या एक्टिव नॉइस कैंसिलेशन कहते हैं।

पैसिव नॉइस कैंसिलेशन (PNC) क्या है?

आपने बहुत सारे Earphones और Headphones में देखा होगा कि जब आप उनको अपने कानों में पहनते हैं तो Earphones में लगी हुई रबर आपके कानों में इस तरीके से लग जाती है कि वह रबर बाहरी आवाज को आपके कान के पर्दों तक जाने ही नहीं देती जिससे बाहर की आवाज आपको सुनाई ही नहीं देती।

और वहीं आपने On ear Headphones के बारे में सुना होगा जिन्हें पहनने के बाद वह Headphones आपके कानों को ढक लेते हैं जिससे आपको बाहर का शोर सुनाई नहीं देता यह ध्यान रखने की बात है कि ऐसे ईयरफोन या हेडफोंस में कोई भी नॉइस कैंसिलेशन माइक नहीं होता जिससे कि Electronically नॉइस को हटाया जाए। तो बाहरी शोर को जब इस तरह से हटाया जाता है तो उसे पैसिव नॉइस कैंसिलेशन (passive noise cancellation) कहते हैं। 

Conclusion

तो दोस्तों आज हमने आपको बताया कि नॉइस कैंसिलेशन क्या होता है यह कैसे काम करता है और आपको इससे क्या क्या फायदे हो सकते हैं तथा एक्टिव और पैसिव नॉइस कैंसिलेशन क्या होता है हमें उम्मीद है आपको हमारी जानकारी पसंद आई होगी अगर आप इस आर्टिकल को यहां तक पढ़ रहे हैं तो आपका बहुत-बहुत धन्यवाद और अगर आपका कोई सुझाव है तो आप हमें नीचे कमेंट करके बता सकते हैं और ऐसी ही शानदार और साधारण भाषा में जानकारियों को जानने के लिए जुड़े रहिए  techyatri.com के साथ। 

1win App India Review

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Installing the application on Android and iOS

If you have not used such applications before, it’s okay, since the installation process is very simple and understandable not only for experienced users, but also for novice players. For the application itself, you need to have 100 MB of free memory on your mobile device, as well as an Internet connection. Due to the adaptability of the application, it can be run on both regular smartphones and large tablets.

The process of installing the application on Android is very simple, as well as fast. It is not recommended to install it from third-party resources other than the official site, as it is possible to install a scam application. Also, you will not be able to install it from Google Play, since it is forbidden to place betting company applications there. To download and install properly, simply follow these steps:

  1. Before installing the apk file, you need to allow the installation of files from unknown sources. You can do this in the following way:
    1. Go to the smartphone settings;
    2. Open the “Security” section;
    3. Allow installation of files from unknown sources.
  2. Go to the website of the betting company 1win;
  3. Go to the application installation section on the site;
  4. After clicking, you will be directed to another page;
  5. Select installation on Android and the installation of the apk file will begin;
  6. Wait for it to complete and open the downloader in notifications on your phone or in the download folder;
  7. after the download is complete, the application will be installed.

The 1win app for iOS can be installed from the App Store, but it is possible to install a fraudulent app, so we recommend installing it from the official website of the company. For a safe installation, you need to follow the instructions below:

  1. Go to the company’s website using your iPhone;
  2. Find and go to the iOS app installation section;
  3. You will be redirected to the page you need in the App Store to download the application;
  4. Install application 1win;
  5. Now you can launch the app from your phone.

In addition, when you install the application and register in it, you will receive a cash bonus that allows you to immediately place bets.

Application Registration Process

After you have installed the application, you need to log into your account. If you have not registered on the site, you can do it in the application. You must be of legal age to register. To register, follow the instructions below:

  1. Visit the official website of 1Win or enter the application using a mobile device;
  2. Find the register button and click on it;
  3. You will see a window with registration forms, you will have 2 registration methods to choose from: Fast and social networks;
  4. When choosing Quick Registration, you need to provide the following details:
    1. Currency (in which you will bet and replenish your wallet);
    2. Phone number;
    3. Email;
    4. Password;
    5. Promo code (if you have one).
  5. When choosing a method through social networks, you need to specify:
    1. Currency;
    2. Promo code (if you have one);
    3. Social network.
  6. Check the information provided and confirm the account creation;
  7. After that, you can log into your account at any time.

If you have already created your account before, then you need to log in to it. You can do this in the following way:

  1. Log in to the 1win application on your phone;
  2. Click on the “Log in” button;
  3. Fill out the form with the information that you entered during registration;
  4. Confirm your account login.

Sports Betting 1win

The betting company 1win provides a huge selection of different sports and matches, in addition, you will find more than 1500 different outcomes for matches. In addition to regular sports, you can also bet on eSports. In the application 1win you can find the best odds, find out the statistics of matches of various teams, watch matches live and follow the tournament you are interested in on the tournament grid. There are several sports disciplines to choose from, including:

  • Football;
  • UFC;
  • Tennis;
  • Volleyball;
  • Hockey;
  • E-Sport;
  • Cricket;
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  • And much more.

You can bet not only on games that will take place in the near future, but also on games that have already started, this is called live betting. Due to the fact that you can watch the live broadcast directly on the site, you can immediately place a bet on the match. In Live mode, the odds often change, which allows you to bet on good odds and multiply your bet several times. Please note that some bets can only be placed before the game starts. But in this case, you have access to a huge selection of outcomes for this match, from a bet on a specific player to a bet on the outcome of the match.

How to Place a Bet

The process of betting in 1win using the mobile application is very simple, thanks to the fact that you can easily switch between sections and different sports. Thanks to this, you can choose the match you need with good odds and interesting teams. You can also find the match you are interested in the search bar. In the application you can quickly place your bet for this you need:

  1. Go to the mobile application 1win;
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Online Casino 1win

In addition to the usual bets, you can play in a high-quality online casino. Each slot includes a convenient and pleasant design and easy navigation through which you will find the slot that you require. Most importantly, you will find a list of well-known providers, each of which has its own unique design, musical accompaniment, good bonuses and winnings. At the moment, you can find the following popular providers in the mobile application:

  • Amatic;
  • BetSoft;
  • CQ9;
  • Microgaming;
  • PlayGo;
  • And many others.

In addition to regular slots, you will also find live casino games such as poker, roulette, baccarat, blackjack, and many others. There you will be met by live dealers who will respectfully communicate with you. Thanks to which you will get a unique experience from casino games. There are also online video games where you can have fun and win money!

Support

If you have any problems or questions regarding the use of the mobile application or its individual features, then you will be pleased to know that the application and the mobile version of the site have a 24/7 support service. It is available around the clock and any day of the week. Operators will communicate in your preferred language respectfully and will help you with any questions you may have. There are several ways to contact Customer Service:

  • Online chat. Chat is available in the application thanks to which you can contact the support service and ask your question. Within 5 minutes, they will answer your question and help you solve it;
  • Email. In the application, you can find the support mail and send a letter with questions there, attaching a photo of your difficulty there. After some time, you will receive an email with the answer to your question;
  • Social networks. The 1win company has its own social networks where you can ask your question in the comments or in private messages.

You can also refer to the FAQ section, where all the questions that users have are collected. Perhaps there is already an answer to your question, and you will not need to contact support.

FAQ

Can I create 2 accounts in the 1win mobile application?

No, this is done so that you cannot use multiple bonuses and promotions, as well as referral links. Moreover, to confirm your personal account, the application will need your documents to withdraw winnings, for example, and you won’t be able to do it 2 times. The use of more than one account is prohibited and is specified in the policy of the betting company, otherwise they may be blocked, and you will not be able to use the company’s services.

Can I make a Rupee deposit to my gaming account?

Yes, you can fund your gaming account in rupees or another currency convenient for you.