सॉफ्टवेयर कैसे बनाये – जानिए पूरी जानकारी हिंदी में

आप अगर सॉफ्टवेयर इंजीनियर नहीं है फिर भी आपके मन में यह सवाल आता है की सॉफ्टवेयर कैसे बनाये तो यह आर्टिकल आपके लिए जिसे आपको ध्यान से पढ़ना होगा जिससे आपका यह सवाल जवाब में बदल जायेगा. हम अपनी आप पास की दुनिया देखते है. जहा पर आज के समय में हमे सॉफ्टवेयर के बारे में सबसे ज्यादा सुनने को मिलता है. और अगर पुरे विश्व के आमिर/धनि लोगो की पंक्ति में सॉफ्टवेयर बनाने वाले ही लोग शामिल है.

सॉफ्टवेयर ही एक ऐसा माध्यम है जिसकी मदत इ आप सरे विश्व पर राज़ कर सकते हो. पुराने ज़माने में सॉफ्टवेयर इतना प्रसिद्ध नहीं था जितना आज है. आज के युग में हमारा पूरा जीवन ही सॉफ्टवेयर पर निर्भर है. सरे औद्योगिक ,एजुकेशनल , बैंकिंग यही तक की हम खुप भी बिना सॉफ्टवेयर के कुछ नहीं कर सकते.

आपको जानकर हैरानी होगी की हम सब लोग सॉफ्टवेयर का उपयोग रोज ही करते है. आप जो यह आर्टिकल अब पढ़ रहे हो यह भी एक सॉफ्टवेयर ही है. और जिस मोबाइल फ़ोन ,लैपटॉप या अन्य माध्यम से पढ़ रहे हो यह भी पूरा सॉफ्टवेयर पर चल रहा है.

तो आपकी सॉफ्टवेयर के प्रति रूचि को ध्यान में रखते हुए हम आज यहाँ पर सॉफ्टवेयर के बारे में जो भी चीजे है उनपर बात करेंगे. और खास कर के सॉफ्टवेयर कैसे बनाते है ? और सॉफ्टवेयर बनाने के लिए क्या आवश्यक है इनपर भी प्रकाश डालेंगे. तो अब हम देखते है विस्तार से.

सॉफ्टवेयर क्या है (What is software in hindi)

सॉफ्टवेयर एक प्रोग्राम्स(programs) का समूह होता है जो कंप्यूटर का कोई एक निश्चित कार्य(Task) को पूरा करने हेतु बनाया जाता है. (Software is a group of programs that are created to complete a specific task of a computer).

इससे आपको पता चल गया होगा की सॉफ्टवेयर में प्रोग्राम्स यूज़ किये जाते है. जो किसी एक कार्य हो संपन्न करने हेतु आपस में जुड़े होते है. लेकिन सबसे बड़ी बात है की इसमें प्रोग्राम यूज़ किये जाते है, यह तो आपने समजा. लेकिन कंप्यूटर प्रोग्राम क्या होते है? यह भी आपको जानना जरूरी है.

इसके बारे में भी हम आगे जानेंगे लेकिन उससे पहले जान लेते है की ,प्रोग्राम को आपस में जोड़कर काम किया जाता है. जिसे कंप्यूटर की भाषा में टास्क कहते है. सॉफ्टवेयर से जुड़ा हुआ हर एक प्रोग्राम अपनी खुद की टास्क(Task) पूरी करता है. ऐसे ही करके सारे प्रोग्राम अलग-अलग सब टास्क(Sub Task) पुरे करते है. जो आपस में जुड़कर एक मेन टास्क(Main Task) बन जाती है. जैसे की काफी सरे कर्मचारी कंपनी के किसी एक उद्देश्य ले किये कार्य कर रहे हो.

सॉफ्टवेयर डेफिनेशन (Software Definition In Hindi)

सॉफ्टवेयर एक कंप्यूटर प्रोग्राम्स का समूह होता है ,जो किसी कंप्यूटर से जुड़े हुए कार्य को पूरा करने हेतु आपस में जुड़े होते है.(Software is a group of computer programs that are connected together to complete a task connected to a computer.)

अब आपने सॉफ्टवेयर क्या है यह तो जान लिया जिसमे आपने प्रोग्राम के बारे में भी पढ़ा. लेकिन अब आपके मन में यह प्रश्न भी आया होंगे की प्रोग्रामिंग क्या होता है? जिसके बारे में अब हब देखने वाले है.

प्रोग्राम क्या होता है (what is computer program)

प्रोग्राम एक इंस्ट्रक्शन सेट होता है जो कंप्यूटर को समज आता है. प्रोग्राम बनाने के लिए आपको किसी प्रोग्रामिंग लैंग्वेज का नॉलेज होना आवश्यक है? जैसे की मान लेते है की आपको हिंदी आती है लेकिन आपको चीन की भाषा नहीं आती. तो आप उन लोगो के साथ बोल नहीं सकते. बिलकुल वैसे ही प्रोग्राम जो होता है वह कंप्यूटर को समज में आने वाली भाषा होती है.

अब आपके मन में यह प्रश्न भी आया होगा की अब प्रोग्रामिंग लैंग्वेज क्या होता है? तो घबराने की कोई बात नहीं हम उसके बारे में भी जानेंगे.

प्रोग्रामिंग लैंग्वेज क्या है (What is programming Language in Hindi)

प्रोग्रामिंग लैंग्वेज एक ऐसी भाषा होती है जो की कंप्यूटर समज सकती है . और जिसकी मदत से कंप्यूटर कार्य कर सकता है. अगर हमे कंप्यूटर से कुछ काम करवाना होता है तो वह प्रोग्रामिंग लैंग्वेज के माध्यम से समझाया जाता है. क्योंकि कप्यूटर एक मशीन होता है जो की साधारण मनुष्य की भाषा नहीं समाज सकता. इसीलिए कंप्यूटर सॉफ्टवेयर में प्रोग्रामिंग लैंग्वेज का उपयोग किया जाता है.

अब आपके मन में यह भी प्रश्न आया होगा की प्रोग्रामिंग लैंगुएजेस कोनसी -कोनसी होती है? जैसे मनुष्य भी अलग-अलग भाषाएँ बोल या समाज सकता है, वैसे ही कंप्यूटर भी अलग-अलग प्रोग्रामिंग लैंगुएजेस को समज सकता है.

TOP 10 Programming Languages in hindi

निचे दी गए प्रोग्रामिंग लैंगुएजेस काफी प्रसिद्ध है जो की ज्यादातर उपयोग में लायी जाती है.

  1. Python Programming Language
  2. Java Programming Language
  3. JavaScript/Node.Js Programming Language
  4. C/C++ Programming Language
  5. PHP Programming Language
  6. Google Go Programming Language
  7. Swift Programming Language
  8. C# (C-Sharp) Programming Language
  9. Scala Programming Language
  10. R Programming Language

सॉफ्टवेयर कौन बनाता है ?

सॉफ्टवेयर कैसे बनाये यह जानने से पहले आपको जानना होगा की सॉफ्टवेयर कौन बनाता है. सॉफ्टवेयर तो साधारणतः सॉफ्टवेयर इंजीनियर ही बनाते है.सॉफ्टवेयर बनाने वाले को प्रोग्रामर या सॉफ्टवेयर डेवलपर कहते है. लेकिन आपको काफी सारे ऐसे लोग भी मिल जायेंगे जो सॉफ्टवेयर इंजीनियर नहीं है फिर भी सॉफ्टवेयर बनाते है. उन लोगो के पास प्रोग्रामिंग का नॉलेज होता है. इसीलिए वह सॉफ्टवेयर बना पाते है. प्रोग्रामिंग का नॉलेज आप अलग-अलग वेबसाइट से मुफ्त में ले सकते हो. बहुत सारे लोग है जो मुफ्त ही इंटरनेट से सॉफ्टवेयर बनाना सिख जाते है और बिना सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग करे ही सॉफ्टवेयर आसानी बना लेते है.

मुफ्त में प्रोग्रामिंग लैंग्वेजेज कहा से सीखे (Free Programming Learning Websites)

जैसे की मैंने आपको बताया की काफी सारी वेबसाइट है जहा से आप मुफ्त में ही सॉफ्टवेयर बनाना सिख सकते हो. तो निचे दी गयी कुछ प्रमुख और सबसे अच्छी वेबसाइट है जहा से आप मुफ्त में ही सॉफ्टवेयर बनाना सिख सकते हो. जो की आपका सॉफ्टवेयर कैसे बनाये ? इस प्रश्न का समाधान भी है.

  • w3schools.com
  • codecademy.com
  • github.com
  • freecodecamp.org
  • codewars.com

प्रोग्रामिंग लैंग्वेज के प्रमुख प्रकार

हम जो सिख रहे है की सॉफ्टवेयर कैसे बनाये ? जिसमे हमने काफी सारी सॉफ्टवेयर से रिलेटेड बेसिक टर्म को पढ़ा. अब हम देखने वाले है की प्रमुखतः कितने प्रकार की प्रोग्रामिंग लैंग्वेज होती है? हम जिसमे सॉफ्टवेयर बनाते है वह हाई लेवल प्रोग्रामिंग लैंग्वेज होती है. लेकिन इसके विपरीत भी कुछ प्रोग्रामिंग लैंग्वेज है जिसमे हम सॉफ्टवेयर बनाते है जो की सिस्टम सॉफ्टवेयर और कुछ अलग सॉफ्टवेयर होते है जो केवल खास लोगो के लिए होते है.

निचे दी गयी प्रमुख कैटेगरी है जिसमे प्रोग्रामिंग लैंग्वेज आती है. लेकिन यह केवल नॉलेज हेतु है. हम जिसमे सॉफ्टवेयर बनाते है और बनाना सिखने वाले है वह हाई लेवल प्रोग्रामिंग लैंग्वेज है जिसमे Java, Python, Net यह सब शामिल है.

  • High Level Language
  • Assembly Language
  • Machine Language

1. High Level Language

सबसे पहली लैंग्वेज है हाई लेवल जो हम सबको पता है. जिसमे यह सब शामिल है. यह प्रोग्रामिंग लैंग्वेज सिखने और समझने में आसान होती है.और इसमें ही सॉफ्टवेयर को ज्यादा बनाया जाता है. जीतें भी एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर होते है वह सब हाई लेवल प्रोग्रामिंग लैंग्वेज में ही बनाये जाते है. जिसमे हमे बस थोड़ी इंग्लिश और कुछ सिम्बोल का उपयोग करना होता है.

निचे दिए गए कुछ प्रमुख उदहारण है हाई लेवल प्रोग्रामिंग लैंग्वेज के

  • Java
  • JavaScript
  • Python
  • PHP
  • C/C++
  • C#/Asp.Net

2. Assembly Language

असेम्ब्ली लैंग्वेज low लेवल लैंग्वेज है, जो की मशीन लैंग्वेज जैसी ही है. समझने में हाई लेवल लैंग्वेज से ज्यादा कठिन है लेकिन मशीन लेवल लैंग्वेज से थोड़ी काम कठिन है. इसके माध्यम से हम सिम्बोलिक ऑपरेशन कोड का इस्तेमाल कर के मशीन ऑपरेशनल कोड को रिप्रेजेंट कर सकते है.

3. Machine Language

मशीन लैंग्वेज को low लेवल लैंग्वेज भी कहा जाता है.यह लैंग्वेज डायरेक्टली कंप्यूटर हार्डवेयर से कम्युनिकेशन करती है. हम जो भो सॉफ्टवेयर बनाते है उनके लिए जो प्रोग्राम लिखते है वह प्रोग्राम सबसे पहले ऑपरेटिंग सिस्टम के माध्यम से अस्सेम्ब्ली लैंग्वेज में कन्वर्ट किये जाते है. उसके बाद उन्हें असेम्ब्लेर के माध्यम से मशीन लेवल लैंग्वेज में कन्वर्ट कर दिया जाता है. और इसी कारन कंप्यूटर हार्डवेयर यूजर का काम सॉफ्टवेयर के माध्यम से कर देता है.

मशीन लेवल लैंग्वेज समझना लगभग मुशिक होता है. सॉफ्टवेयर बनाने के लिए केवल हाई लेवल लैंग्वेज का उपयोग किया जाता है. क्योंकि असेम्ब्ली और मशीन लैंग्वेज समझने के लिए आसान नहीं है. मशीन लेवल लैंग्वेज पूरी बाइनरी(0,1) में बानी होती है जो की केवल ० और १ का कॉम्बिनेशन होता है.

सॉफ्टवेयर कितने प्रकार के होते है (Types of Softwares in Hindi)

प्रमुखतः सॉफ्टवेयर के ३ मुख्य प्रकार होते है लेकिन इसके आलावा भी सॉफ्टवेयर के कुछ प्रकार होते है जो की मुख्य प्रकार में उप प्रकार के रूप में आते है. सॉफ्टवेयर के जो मुख्य प्रकार है वह निचे दिए गए है.

  • System Software
  • Application Software
  • Utility Software

अब हम सॉफ्टवेयर के प्रमुख प्रकारों के बारे में विस्तार से जानेंगे. जिसमे हम मुख्य प्रकारों के कुछ उप-प्रकार भी उदाहरणों के माध्यमों समझेंगे. और प्रत्येक प्रकार का सॉफ्टवेयर कैसे काम करता है और कहा पर उसे उपयोग में लाया जाता है यह भी समझेंगे.

System Software

सिस्टम सॉफ्टवेयर के नाम से आप जान सकते है की यह सॉफ्टवेयर सिस्टम से रिलेटेड है. सिस्टम सॉफ्टवेयर हार्डवेयर और एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर के बिच के कम्युनिकेशन माध्यम का काम करते है. सिस्टम सॉफ्टवेयर की अगर सरल में बात की जाये तो ऑपरेटिंग सिस्टम इसका बहुत अच्छा उदहारण है.

कुछ लोग तो सिस्टम सॉफ्टवेयर को ऑपरेटिंग सिस्टम भी बोलते है. सिस्टम सॉफ्टवेयर एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर और कंप्यूटर हार्डवेयर के बिच का माध्यम होता है जो यूजर के इनपुट को हार्डवेयर तक पहुंचाता है. और सिस्टम से जनरेट हुआ आऊटपुट यूजर को भेजता है. सिस्टम सॉफ्टवेयर भी एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर के जैसा ही एक कंप्यूटर प्रोग्राम है. अब हब सिस्टम सॉफ्टवेयर के कुछ उदहारण विस्तार से देखते है. जिससे आपको सिस्टम सॉफ्टवेयर क्या है यह समझने में सरलता होगी.

1. Operating System

ऑपरेटिंग सिस्टम को कंप्यूटर सिस्टम का आत्मा भी कहा जाता है. क्योकि बिना ऑपरेटिंग सिस्टम सॉफ्टवेयर के हम कंप्यूटर को चला नहीं सकते. जब भी आप नया कंप्यूटर खरीदते है तब आपको यह सिस्टम सॉफ्टवेयर इनस्टॉल करके दिया जाता है अतब आप अन्य सॉफ्टवेयर इसपर चला सकते है. आपने जैसे की देखा की कंप्यूटर को अलग भाषा समाज आती है. जिसे प्रोग्रामिंग लैंग्वेज कहा जाता है. लेकिन आपको बता दू की हम जो लैंग्वेज में सॉफ्टवेयर बनाते है वह सबसे पहले सिस्टम सॉफ्टवेयर यानि की अपने ऑपरेटिंग सिस्टम के पास जाता है. वही इसे समझकर आगे भेजकर हार्डवेयर से काम करवाती है.

जैसे की आपने देखा की एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर बनाने के लिए प्रोग्रामिंग लैंग्वेज का उपयोग किया जाता है. जो भी हमने देखि थी वह सब हाई लेवल प्रोग्रामिंग लैंग्वेज थी. लेकिन ऑपरेटिंग सिस्टम बनाने के लिए जो प्रोग्रामिंग लैंग्वेज उपयोग में लायी जाती है उसे असेंबली प्रोग्रामिंग लैंग्वेज कहा जाता है.

2. Device Driver

सिस्टम ड्राइव्स ऑपरेटिंग सिस्टम का ही पार्ट होता है. जो की कंप्यूटर के अलग-अलग पार्ट को काम करने में और काम समझने में मदत करते है. हमारी कंप्यूटर सिस्टम के हार्डवेयर के पार्ट चलाने के लिए डिवाइस ड्राइव्स अतिआवश्यक होते है. आपने बहुत बार देखा होगा की आपकी कम्पुयटर सिस्टम में कैमरा नहीं चलता वह पर आपको डिवाइस ड्राइवर मिसिंग का एरर आता है.

निचे दिए कुछ प्रमुख डिवाइस ड्राइवर है जो हमारी कंप्यूटर में होते ही है जिसके बिना आपका कंप्यूटर लगभग निर्जीव हो जाता है. कुछ ड्राइवर ऐसे भी होते है जो की अत्यावश्यक नहीं होत. फिर भी कुछ लोग उनके हिसाब से कुछ एक्स्ट्रा डिवाइस ड्राइवर इनस्टॉल करते है.

  • माउस ड्राइवर
  • कीबोर्ड ड्राइवर
  • कैमरा ड्राइवर
  • टचपैड ड्राइवर
  • प्रिंटर ड्राइवर

Application Software

जिसके लिए आप यह पोस्ट पढ़ रहे है की सॉफ्टवेयर कैसे बनाये ? वही सॉफ्टवेयर एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर की श्रेणी में आते है. एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर ही ज्यादा प्रमाण में बनाये जाते है. जो भी आप आपने कंप्यूटर या मोबाइल में सॉफ्टवेयर इस्तेमाल करते है वह सब एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर की श्रेणी में आते है. सॉफ्टवेयर इंजीनियर जो भी काम करते है वह ज्यादातर एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर की श्रेणी में आता है.

एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर कंप्यूटर के कुछ विषिष्ठ कार्य पुरे करने हेतु बनाये जाते है. जैसे की टाइपिंग के लिए नोटपैड एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर बनाया गया है जो की काफी प्रसिद्ध है, और आप सबको पता है. एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर सिस्टम सॉफ्टवेयर पर ही चलाये जाते है. इसका मतलब एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर सिस्टम सॉफ्टवेयर के साथ कम्युनिकेशन करते है. उसके बाद सिस्टम सॉफ्टवेयर हार्डवेयर से कम्युनिकेशन करके टास्क पूरा करता है और आऊटपुट फिरसे एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर को भेजता है. यही काम बहुत तेजी से चलता रहता है ,और आपका काम पूरा होता है.

निचे दिए गए कुछ प्रमुख एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर के उदहारण है जिससे आप सब परिचित है. और वह लगभग हर कंप्यूटर में होते ही है. जिनके माध्यम से आपको एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर क्या है ? यह समझने में आसानी होगी.

1. वेब ब्राउज़र

आप सभी को तो वेब ब्राउज़र पता ही होगा जो की लगभग हर मोबाइल फ़ोन और कंप्यूटर में इस्तेमाल किया ही जाता है. जिसमे आप अलग-अलग वेबसाइट को सर्च कर सकते हो. वेब ब्राउज़र भी एक एप्लीकेशन प्रोग्राम ही होता है जिसे हाई लेवल लैंग्वेज में बनाया जाता है. आपको जो वेब ब्राउज़र पता है उनमे Chrome, Inter Explorer, यह नाम प्रमुख है जो की आपके डिवाइस में पहले से ही उपलब्ध होते ही है.

आपको अगर कोई भी चीज सर्च करनी होती है तो आप ब्राउज़र सॉफ्टवेयर को खोलते है और सर्च करते है. ब्राउज़र सॉफ्टवेयर बहुत सारे है लेकिन ऊपर दिए कुछ ज्यादा ही प्रसिद्ध है.

2. Word Software

इस सॉफ्टवेयर की श्रेणी में ज्यादातर सॉफ्टवेयर ऑफिस के कामकाज में ही इस्तेमाल किये जाते है. जिसमे ज्यादातर कुछ लिखने के लिए या एडिटिंग करने के लिए इस्तेमाल किये जाते है. ऑफिस के सारे कामकाज लगभग इसी सॉफ्टवेयर में किये जाते है. इस सॉफ्टवेयर की माध्यम से हम पुराने ज़माने में जो काम कागज या फाइल के माध्यम से किये जाते थे वह आज हम इन एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर के माध्यम से ज्यादा आसानी से ,ज्यादा जल्दी ,ज्यादा सठिक तरीके से कर सकते है.

वर्ड सॉफ्टवेयर की श्रेणी में आने वाले कुछ प्रमुख सॉफ्टवेयर निचे दिए है जिसके माध्यम से आसानी से जान लेंगे की कोनसे सॉफ्टवेयर इस श्रेणी में आते है. जो की ऑफिस के कामकाज में मदत करते है.

  • MS-Word
  • Note Pad
  • Word Pad

3. Multimedia Software

इस श्रेणी के एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर प्रमुखता से आपके मनोरंजन के माध्यम से जुड़े हुए होते है. वह सॉफ्टवेयर आपको वीडियो ,इमेज ,ऑडियो को प्ले करना ,एडिट करना इन सब कामो मदत करते है. मल्टीमीडिया सॉफ्टवेयर की मांग आजकल काफी ज्यादा है. मल्टीमीडिया सॉफ्टवेयर मनोरंजन के लिए इस्तेमाल किये जाते है जैसे की जोश ऍप,चिंगारी ऍप इत्यादि भी मल्टीमीडिया सॉफ्टवेयर है.

4. Educational Software

एजुकेशनल सॉफ्टवेयर शैक्षणिक संस्थाओं से जुड़े होते है जो की स्टूडेंट और इस क्षेत्र से जुड़े लोको के लिए बनाये जाते है. इन में प्रमुखता वेबसाइट होती है जिसे हम वेब एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर भी कहते है. जिनमे ज्यादातर सॉफ्टवेयर ऑनलाइन शिक्षा प्रदान करना ,ऑनलाइन फॉर्म भरना इत्यादि काम करते है. कुछ सॉफ्टवेयर स्टूडेंट्स का डाटा भी मैनेज करने का काम करते है.

Utility Software

यूटिलिटी सॉफ्टवेयर उन लोगो के लिए होते है जिन्हे कंप्यूटर की अच्छी-खासी नॉलेज हो और उनके काम भी इनपर निर्भर हो.यूटिलिटी सॉफ्टवेयर का उपयोग हर कोई नहीं कर सकता यह उपयोग में थोड़े कठिन होते है. इन्हे कुछ अलग सुविधा प्रदान करने हेतु बनाया जाता है.

आपको तो पता ही है की सिस्टम सॉफ्टवेयर जिसे हम ऑपरेटिंग सिस्टम भी बोलते है वह यूजर को लगभग सारी सुविधाएं देता है. लेकिन कुछ यूजर ऐसे होते है जिन्हे आपने काम को पूरा करने के लिए कुछ अलग सुविधाओं की आवश्यकता होती है जो ऑपरेटिंग सिस्टम में नहीं है. उस समय वह यूटिलिटी सॉफ्टवेयर के माध्यम से यह काम पूरा कर सकते है.

सॉफ्टवेयर कैसे बनाये ?

अब हमने सॉफ्टवेयर के बारे में जितने भी बेसिक चीजे थी सब जान ली है ,अब हम जानते है हमारा प्रमुख टॉपिक जो की है सॉफ्टवेयर कैसे बनाये ? या सॉफ्टवेयर कैसे बनाया जाता है ? सॉफ्टवेयर बनाने के लिए हमे प्रोग्रामिंग लैंग्वेज की आवश्यकता होती है यह तो हमने जाना. लेकिन प्रोग्रामिंग के साथ-साथ ही इसके लिए कुछ टूल्स भी आवश्यक होते है जिनकी मदत से सॉफ्टवेयर को बनाया जाता है. जिन्हे सॉफ्टवेयर की भाषा में IDE (integrated development environment) भी कहा जाता है.

जिसमे निचे दिए गए कुछ प्रमुख टूल्स है जिनका उपयोग कोड़िंग करने में किया जाता है-

  • Microsoft Visual Studio
  • Eclipse
  • NetBeans
  • Intellij IDEA
  • PyCharm
  • Atom
  • Code::Blocks
  • XCode
  • Android Studio
  • Adobe Dreamweaver

Step 1:

ऊपर दिए गए किसी भी एक टूल को हमे इनस्टॉल करना है. हमे टूल इनस्टॉल करते समय इस चीज का ध्यान रखना होगा की हम कोडिंग के लिए कोनसी प्रोग्रामिंग लैंग्वेज इस्तेमाल कर रहे है. हमे टूल भी प्रोग्रामिंग लैंग्वेज के ही हिसाब से इनस्टॉल करना होता है.

ऊपर दिए गए किसी भी एक टूल को हमे इनस्टॉल करना है. हमे टूल इनस्टॉल करते समय इस चीज का ध्यान रखना होगा की हम कोडिंग के लिए कोनसी प्रोग्रामिंग लैंग्वेज इस्तेमाल कर रहे है. हमे टूल भी प्रोग्रामिंग लैंग्वेज के ही हिसाब से इनस्टॉल करना होता है. जैसे की मान लेते है की हम पाइथन लैंग्वेज का उपयोग कर रहे है तो हमे pycharm टूल की आवश्यकता होगी. इसके आलावा अगर हम जावा में सॉफ्टवेयर बना रहे है तो हमे NetBeans की आवश्यकता होगी. जो भी आप प्रोग्रामिंग लैंग्वेज चुन रहे है उसके हिसाब से आपको IDE टूल इनस्टॉल कर लेना है.

IDE टूल इस्तेमाल करने का सबसे बड़ा फायदा यही होता है की आपको सब चीजे एक साथ ही मिल जाती है जो की सॉफ्टवेयर डेवलोपमेन्ट के लिए आवश्यक है. और इसका एक फायदा यह भी होता है की यह टूल कोड को ऑटोमेटिकली जनरेट करता है,जिससे आपको कोडिंग करना काफी आसान हो जाता है.

Step 2:

अब हमे यह चुनना होता है की हम सॉफ्टवेयर डेस्कटॉप के लिए बना रहे है या फिर वेब-बेस सॉफ्टवेयर बना रहे है. डेस्कटॉप सॉफ्टवेयर हमारे ऑफलाइन सॉफ्टवेयर होते है जो की बिना इंटरनेट को कनेक्ट किये भी चल जाते है. इसके विपरीत होते है वेब-बेस सॉफ्टवेयर जिन्हे हम सिंपल भाषा में वेबसाइट भी बोलते है. आज के समय में वेब-बेस सॉफ्टवेयर कही ज्यादा प्रचलित है.

अगर आप किसी एक यूजर के लिए ही सॉफ्टवेयर बना रहे है तो आप डेस्कटॉप-बेस सॉफ्टवेयर चुन सकते है. लेकिन अगर आप काफी सारे लोगों के लिए सॉफ्टवेयर बना रहे है तो आप वेब-बेस सॉफ्टवेयर का चयन कर सकते हो. आपने जो भी IDE टूल चुना है जो की प्रोग्रामिंग लैंग्वेज के हिसाब से चुना जाता है उसमे आप वेब-बेस या डेस्कटॉप-बेस सॉफ्टवेयर के लिए कोडिंग कर सकते हो.

Step 3:

अब आपका सॉफ्टवेयर कोडिंग करने के बाद बनकर तैयार हो जायेगा. लेकिन सॉफ्टवेयर बन गया इसका यह अर्थ नहीं की आपका सॉफ्टवेयर अब सब लोग इस्तेमाल कर सकते है. आपको इसके बाद सॉफ्टवेयर की टेस्टिंग भी करनी होती है. जिससे यह पता चले की आपके सॉफ्टवेयर में कोई error या bug तो नहीं.

यहाँ पर आपको सॉफ्टवेयर की टेस्टिंग भी करनी होती है जिससे की आपको पता चले की सॉफ्टवेयर में कोई त्रुटि नहीं है. इस प्रोसेस के बाद ही आपको अपना सॉफ्टवेयर लांच करना होता है. इस प्रोसेस को सॉफ्टवेयर टेस्टिंग भी कहा जाता है. जैसे की सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट के लिए अलग-अलग लैंग्वेज और टूल्स भी आवश्यकता होती है ठीक ऐसेही सॉफ्टवेयर टेस्टिंग के भी कुछ प्रकार होते है और उन्हें भी उस प्रकार के हिसाब से कुछ टेस्टिंग टूल आवश्यक होते है.

निचे दिए गए कुछ सॉफ्टवेयर टेस्टिंग के प्रकार है जिनसे आप सॉफ्टवेयर को टेस्ट कर सकते हो –

  • Unit Testing
  • Integration Testing
  • System Testing
  • Sanity Testing
  • Smoke Testing
  • Interface Testing
  • Regression Testing
  • Beta Testing

टिप : अगर आप खुद का ही सॉफ्टवेयर बना रहे है और सॉफ्टवेयर काफी बड़ा नहीं है तो आप खुद ही इस्तेमाल करके उसे टेस्ट कर सकते हो. यह जो भी टेस्टिंग ऊपर बताई गयी है वह सब बड़े सॉफ्टवेयर के टेस्टिंग के लिए इस्तेमाल की जाती है जो की सॉफ्टवेयर कंपनी में ज्यादा किया जाता है.

Step 4:

आपके मन जो इच्छा थी जानने की, की सॉफ्टवेयर कैसे बनाये ? उसमे यह आखिरी स्टेप है जिसमे आपका सॉफ्टवेयर बनकर तैयार हो गया है. जिसमे उसकी टेस्टिंग भी पूरी हो चुकी है. अब वक्त आता है उसे डेप्लॉय करने का. अब आपको यह प्रश्न भी आया होगा की सॉफ्टवेयर डिप्लॉयमेंट क्या होता है ? तो दोस्तों मई आपको इसका भी अर्थ बता रहा हु.

सॉफ्टवेयर डिप्लॉयमेंट क्या होता है ?

आसान शब्दों में कहा जाये तो सॉफ्टवेयर डिप्लॉयमेंट एक प्रोसेस होती है जो सॉफ्टवेयर डेवलोपमेन्ट में सबसे आखिर में आती है. जिसमे आपको सॉफ्टवेयर लॉंच या होस्ट करना होता है. अगर आप किती क्लाइंट के लिए सॉफ्टवेयर बना रहे है तो आपको वह सॉफ्टवेयर उसे देना पड़ता है. मतलब आपका सॉफ्टवेयर अब लाइव करना होता है जिसके लिए बाह बनाया गया है.

यह आपका आखिरी स्टेप था जिसके बाद आपका सॉफ्टवेयर बनकर तैयार होने वाला है. इतनी सब प्रोसेस करने के बाद आप आपने खुद एक अच्छा सा सॉफ्टवेयर बना सकते है. अब काफी सरे लोगों को लग रहा होगा की सॉफ्टवेयर बनाना कोई आसान काम नहीं. तो दोस्तों यह बिलकुल सही है ,क्योंकि यह अगर इतना आसान होता तो क्यों सॉफ्टवेयर कंपनी में इतनी ज्यादा सैलरी देते . आप यह सोच रहे होंगे की सॉफ्टवेयर इंजीनियर की सैलरी इतनी ज्यादा कैसे होती है ? तो इसका यह सीधा सा जवाब है. इतना सब जानने के बाद आपको आपके सवाल का जवाब भी मिल गया होगा की सॉफ्टवेयर कैसे बनाये?

अंतिम शब्द

तो दोस्तों आशा करता हु की आपको यह आर्टिकल जरूर पसंद आया होगा, जिसमे मैंने आपको काफी अच्छे से सॉफ्टवेयर बनाने की पूरी प्रोसेस बताई है. उसके साथ-साथ सॉफ्टवेयर से जुड़े हुए काफी बेसिक भी अच्छे समझाये है. जिससे आपके मन में आने वाले सभी प्रश्नों के उत्तर आपको मिल गए होंगे जैसे की सॉफ्टवेयर कैसे बनाये ? या सॉफ्टवेयर कौन बनाता है ? अगर फिर भी आपके मन कुछ प्रश्न होंगे तो आप कमेंट में पूछ सकते है. आपका कीमती समय देने के लिए धन्यवाद !

Shailendra Rajputhttp://techyatri.com
Shailendra Singh Rajput is the Author & Co-Founder of the TechYatri.com. He has also completed his graduation in Computer Engineering from Pune Univercity (mahatrashtra) . He is passionate about Blogging & Digital Marketing he like to Spread his Technical knowledge with indian people in Hindi language .

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