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IP Camera क्या होता है – What is IP Camera in Hindi

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ip camera kya hai in hindi

आज security के लिए cameras का इस्तेमाल किया जाने लगा है। आज हर कोई security के लिए cameras का इस्तेमाल कर रहा है। आज दूकान में, roads में, hospitals में, banks में, यहाँ तक की schools और colleges में भी cameras का इस्तेमाल किया जा रहा है।

Cameras से सुरक्षा आसान हो जाती है और आज के आधुनिक समय में तो अलग-अलग प्रकार के cameras भी आने लगे हैं जैसे – Smartphone camera, DSLR camera, mirrorless camera, compact camera, analog camera, CCTV camera, web camera, Wi-Fi camera आदि। 

इनमे से कुछ cameras को आप कहीं से भी access कर सकते हैं और camera से live footage देख सकते हैं।

जैसा की ऊपर हमने आपको बताया की cameras बहुत सारे प्रकार के होते हैं जिनमे से एक IP camera होता है और इस article में हम आपको सिर्फ IP camera के बारे में बताने वाले हैं।

इस article में हम आपको IP camera से सम्बंधित संपूर्ण जानकारी देने वाले हैं। यहाँ हम आपको बताने वाले हैं IP Camera क्या होता है, इसे install कैसे करते हैं, IP camera के उपयोग क्या हैं, IP camera के फायदे और नुक्सान क्या हैं आदि।

अगर आप IP camera से सम्बंधित सारी जानकारी हासिल करना चाहते हैं तो इस article को अंत तक पूरा पढ़ें। और इस article को पढ़ने के बाद आपको IP camera के बारे में सब कुछ समझ में आ जाएगा।

IP Camera क्या होता है?

IP camera की full form Internet protocol camera होती है।

IP camera एक digital video camera होता है जो की control data को receive करता है और IP network की मदद से images data को send करता है।

ये आमतौर पर निगरानी के लिए इस्तेमाल किये जाते हैं लेकिन analog closed-circuit camera के विपरीत इन्हे किसी local recording device की जरूरत नहीं होती है बल्कि केवल एक local area network की आवश्यकता होती है जिसे network video recorder (NVR) भी कहते हैं।

Local area network या NVR में की मदद से camera footage को आसानी से record किया जा सकता है और हमेशा के लिए सुरक्षित रखा जा सकता है।

यहाँ तक की IP camera को NVR के साथ और बिना NVR के भी इस्तेमाल किया जा सकता है। इस आधुनिक camera में आप signals को भेज भी सकते हैं और उन्हें receive भी कर सकते हैं।

IP camera internet से connected रहता है जिसके कारण आप इसकी footage पूरी दुनिया से किसी भी कोने में बैठ कर देख सकते हैं। इस camera को आप अपने smartphone, tablet या laptop से connect कर सकते हैं और उसके बाद उनमे आप इस camera की live footage कहीं से भी देख सकते हैं।

इस camera में cable network का इस्तेमाल किया जाता है। इसमें ethernet के माध्यम से cable network को broadband modem या router से जोड़ा जाता है।

इसके आलावा IP camera का इस्तेमाल और भी आधुनिक तरीके से किया जाता है जैसे – इस camera को Wi-Fi router से जोड़ दिया जाता है।

कुल मिलाकर आसान भाषा में कहा जाए तो IP camera वो होता है जो की internet से connected रहता है और जिससे आप जब मर्ज़ी अपने smartphone, tablet या laptop से कहीं से भी access कर सकते हैं।

IP Camera को Install कैसे करते हैं?

अगर आपको RJ45 connectors बनाने आते हैं तो आपके लिए IP camera को install करना बहुत आसान रहेगा।

इसके लिए सबसे आपको cat6 LAN cable लेनी होगी और उसके दोनों end points में आपको RJ45 connector को connect कर देना है। अब अगर आपके पास अलग से PoE switch नहीं है तो आपके camera के लिए अलग से power cable डालनी होगी और उसके बाद उसे camera power supply से power देनी होगी।

अगर आपको RJ45 connector बनाना नहीं आता है तो आप market से I/O और patch code ले सकते हैं। I/O बनाना आसान होता है क्योंकि उसमे पहले से ही colors दिए हुए होते हैं जिनमे बस wires को connect करना होता है।

अगर आपने NVR और camera एक ही company से लिया है तो आपको ज्यादा कुछ करने की जरूरत नहीं होती है क्योंकि ये cameras plug and play करने के लिए होते हैं यानी आप इनको सीधा इस्तेमाल कर सकते हैं और इनमे ज्यादा कुछ करने की कोई जरूरत नहीं होती है।

लेकिन अगर आपका camera plug and play करके नहीं चल रहा है तो ऐसे में आपको NVR में जाना है और उसके बाद वहां पर आपको add camera पर click करके उस camera को add कर लेना है जिसके बाद आपका camera चालु हो जाएगा।

बिना NVR के – अगर आप एक से ज्यादा IP camera को computer में चलाना चाहते हो तो इसके लिए आपको एक router या switch की जरूरत पड़ेगी। ऐसा आपको इसलिए करना पड़ेगा क्योंकि computer में आमतौर पर एक ही LAN port होता है हालांकि कुछ महंगे computers में 2 LAN ports भी होते हैं लेकिन 2 से ज्यादा LAN ports किसी भी computer में नहीं होते हैं।

अगर आप PoE switch या router का इस्तेमाल करेंगे तो ये आपके लिए फायदेमंद रहेगा क्योंकि ऐसा करने पर आपको power cable या power supply की कोई भी जरूरत नहीं पड़ेगी।

IP Camera के उपयोग क्या हैं?

IP camera का इस्तेमाल निगरानी रखने के लिए किया जाता है। इससे सुरक्षा बनी रहती है।

अगर आप किसी दूकान के मालिक हैं और आप अक्सर दूकान से बहार रहते हैं तो आप IP camera को अपनी दूकान में लगा सकते हैं और जब मर्जी उसकी footage अपने किसी भी device (phone, tablet, laptop) में देख सकते हैं।

ऐसा करने से आप अपने कर्मचारियों और अपने ग्राहकों पर नज़र रख सकते हैं। इतना ही नहीं ये camera live footage दिखाने के अलावा सारी footages को record भी करता है जिसे आप बाद में कभी भी देख सकते हैं।

Recording का फायदा ये होता है की अगर आज आपकी दूकान में कुछ होता है (चोरी, आदि) और आपको कुछ दिन बाद पता चलता है तो camera footage देखकर आप पता लगा सकते हैं की क्या हुआ था और किसने किया था।

इनका इस्तेमाल आप कहीं पर भी कर सकते हैं जैसे – Hospitals में, घर में, Hotels में, Schools और Colleges में आदि। इनका इस्तेमाल करना आज के समय में आवश्यक भी है और सही भी है।

अगर आपकी दूकान बड़ी है और आप अपनी दूकान को सुरक्षित रखना चाहते हैं तो आपको इसका इस्तेमाल जरूर करना चाहिए। इससे सुरक्षा बढ़ती है।

IP Camera के फायदे

  1. Good Video Quality – IP camera 4K resolution तक support करते हैं जिसके कारण इनकी video qualities बहुत अच्छी होती हैं। इसमें आप किसी भी अन्य camera की तरह अलग-अलग resolution के cameras ले सकते हैं। आप जितने अच्छे resolution का camera लेंगे उतनी अच्छी आपकी video quality होगी।
  1. Clean Installation – IP camera में cat6 cable का इस्तेमाल होता है जिसके कारण इसकी installation बहुत ही साफ़-सूत्री होती है।
  1. Intelligence – इस camera में आपको कई advance features मिलते हैं जिनका इस्तेमाल आपके लिए बहुत फायदेमंद होता है। जैसे की हमने आपको बताया की IP camera internet से जुड़ा होता है जिसके कारण आप इसकी footage कहीं से भी अपने devices पर देख सकते हैं।
  1. Easily Accessible – इनका सबसे बड़ा फायदा ये होता है की आप इन्हे कहीं से भी access कर सकते हैं और इनकी footage कहीं से भी देख सकते हैं। इसके लिए आपको NVR लेना पड़ सकता है।

IP Camera के नुकसान

  1. Costly – IP camera एक digital camera है और digital cameras analog cameras से महंगे मिलते हैं जिसके कारण IP camera महंगा पड़ता है।
  1. Storage – IP cameras high resolution cameras होते हैं जिसके कारण इनकी video qualities बहुत अच्छी होती हैं और अच्छी video quality होने के कारण इन videos की file size बहुत बड़ी होती है जिसके कारण इन video files को store करने के लिए ज्यादा storage space की जरूरत होती है।
  1. Difficult to Use – IP cameras थोड़े complicated होते हैं जिनके कारण इन्हे इस्तेमाल करना आसान नहीं होता है। कुछ IP cameras की installation भी काफी complex होती है। लेकिन ये ज्यादा मुश्किल भी नहीं होते हैं। अगर आपको computer के बारे में थोड़ी-बहुत जानकारी है तो आपको इसे इस्तेमाल करने में ज्यादा दिक्कत नहीं होगी।

IP Camera से सम्बंधित कुछ सवाल

IP Camera की Full Form क्या होती है?

IP camera की full form होती है Internet Protocol Camera.

IP Camera क्या होता है?

IP camera एक digital video camera होता है जो की control data को receive करता है और IP network की मदद से images data को send करता है।

IP Camera का अविष्कार कब और किसने किया था?

IP camera का आविष्कार Axis communications ने सन 1996 में किया था।

निष्कर्ष

जैसा की हमने ऊपर बताया है की अगर आपकी कोई दूकान है या ऐसा कोई स्थान है जहाँ पर आप हमेशा नज़र रखना चाहते हैं और जहाँ पर आपको security की जरूरत है तो वहां पर आप IP camera को install कर सकते हैं और जब चाहे वहां की live footage देख सकते हैं।

इस article में हमने आपको IP camera से सम्बंधित संपूर्ण जानकारी दे दी है। और अब हम उम्मीद करते हैं की आपको ये article पढ़ने के बाद आपको समझ में आ गया होगा की IP Camera क्या होता है

अगर आपको ये article पसंद आया हो तो इसे अपने दोस्तों के साथ share जरूर करें ताकि अगर उन्हें सुरक्षा की जरूरत हो तो वे इस camera को लगा सकें और अपने स्थान पर निगरानी रख सकें।

अगर आप हमसे कोई सवाल पूछना चाहते हैं तो निचे comment कर सकते हैं।

वेब सीरीज क्या है – Web Series Meaning in Hindi

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web series

वेब सीरीज (Web Series) के बारे में आपने इंटरनेट पर जरूर सुना होगा और कई बार आपने आपके दोस्तों से भी इसके बारे में जरूर सुना होगा लेकिन क्या आप जानते है वेब सीरीज क्या होती है और इसका मतलब क्या होता है ?

आजकल इंटरनेट पर Web Series की चर्चाएं काफी जोरों शोरों से देखने को मिलती है , सोशल मीडिया हो या फिर कोई भी जगह सभी तरफ अलग अलग वेब सीरीज के अलग अलग किरदारों और उनके डायलॉग्स के बारे में सुनने को मिलता है .

सोशल मीडिया पर भी आपने ऐसे कई Memes देखे होंगे जिसमे वेब सीरीज के कुछ खास किरदारों को ट्रोल किया जाता , लेकिन जब कोई ऐसा व्यक्ति यह मिम्स देखता है जो कभी Web Series देखता ही नहीं है तो समस्या वाली बात हो जाती है .

Web Series भारत में अभी अभी प्रसिद्द होने लगी है और इसे देखने वालों की संख्या भी अभी कम है इसलिए इसके बारे अभी बहुत कम लोग जानते है .

अगर आप भी वेब सीरीज के बारे में कुछ खास नहीं जानते है तो इस आर्टिकल को पूरा जरूर पढ़े क्योंकि इसमें आप जानेंगे Web Series के बारे में A-Z जानकारी , तो बिना समय बर्बाद किये शुरू करते है .

वेब सीरीज क्या होती है (What is Web Series)

वेब सीरीज इंटरनेट पर जारी धारावाहिक या वीडियो एपिसोड की एक श्रृंखला होती है और इसे वेब शो के नाम से भी जाना जाता है . वेब सीरीज को भी टीवी सीरियल की तरह डिजाइन किया जाता है.

Web Series का प्रसारण सिर्फ डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर ही किया जाता है , इसका प्रसारण सिर्फ इंटरनेट पर होने के कारण ही इसे Web Series कहा जाता है .

टीवी पर हम जो सीरीज देखते है उनसे Web Series थोड़ी अलग होती है जैसे की वेब सीरीज में समय की कोई सिमा नहीं होती है , वेब सीरीज के सभी एपिसोड एक साथ रिलीज किये जा सकते है या एक सप्ताह में एक एपिसोड भी दिखाया जाता है .

Netflix, Amazon Prime Video, YouTube जैसे कई Digital OTT Platforms पर आप Web series को देख सकते है . वेब सीरीज में एक साथ सभी एपिसोड्स भी आपको मिल सकते है जिन्हे आप अपने हिसाब से कभी भी एक्सेस कर देख सकते है .

इंटरनेट पर वेब सीरीज को देखने वालों की संख्या दिन प्रति दिन बढ़ रही है खास कर भारत में इसका कुछ ज्यादा ही डिमांड बढ़ते हुए दिख रहा है . अभी के समय में वेब सीरीज English , Hindi के साथ साथ कई रीजनल लैंग्वेजेज में भी वेब सीरीज बनने लगी है .

इंडिया में Mirzapur , Scam 1992 , Sacred Games आदि जैसी कई लोकप्रिय वेब सीरीज देखने को मिलती है .

Web Series Meaning in Hindi

वेब सीरीज (जिसे वेब शो के रूप में भी जाना जाता है) यह एक स्क्रिप्टेड या गैर-स्क्रिप्टेड ऑनलाइन वीडियो की एक श्रृंखला होती है, इसे आमतौर पर एपिसोडिक रूप में, इंटरनेट पर जारी किया जाता है .

वेब सीरीज कितने प्रकार की होती है?

वेब सीरीज के अलग अलग प्रकार निम्नानुसार है –

  • Suspense
  • Literary-Inspired Web series
  • Comedy
  • Romance
  • Action
  • Horror
  • Thriller
  • Drama
  • Crime
  • Violence

Web series और TV series में क्या अंतर होता है?

टीवी सीरियल और वेब सीरीज में सबसे बड़ा अंतर तो यही होता है की TV series को हमारे TV पर प्रसारित किया जाता है जिसे हम बिना इंटरनेट के भी देख सकते है और वेब सीरीज को इंटनेट के माध्यम से डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर प्रसारित किया जाता है जिसे देखने के लिए इंटरनेट की जरुरत होती है .

टीवी सीरियल में shows को किसी विशेष टीवी चैनल पर एक विशेष समय पर प्रसारित किया जाता है लेकिन वेब सीरीज में ऐसा नहीं है वेब सीरीज में shows को एक साथ या सप्ताह में एक show को प्रसारित किया जाता है जिसे देखने का कोई निर्धारित समय नहीं होता इसे आप कभी भी देख सकते है .

वेब सीरीज के एक सीजन में 8 से 10 एपिसोड्स होते है लेकिन TV serials में बहुत ज्यादा एपिसोड्स होते है जिन्हे 3 महीनो से लेकर 1 साल तक प्रसारित किया जाता है .

वेब सीरीज कैसे देखें ?

वेब सीरीज के लिए कई सारे Apps/OTT Platforms उपलब्ध है जिनपर आप बड़े ही आसानी से Web Series देख सकते है , इन OTT Platforms में ज्यादातर तो paid होते है मतलब इनका आपको पैसे देकर सब्सक्रिप्शन लेना होता है लेकिन कुछ Free Platforms भी इंटरनेट पर Available है जिनपर आप फ्री में वेब सीरीज देख सकते है .

Best Apps to watch Web series in India –

  • Netflix
  • Amazon Prime Video
  • Disney + Hotstar
  • SonyLIV
  • TvFPlay
  • Zee5
  • Ullu
  • MX Player
  • ALT BALAJI
  • Voot
  • YouTube
  • Telegram

Web Series FAQ

वेब सीरीज क्या हैं ?

वेब सीरीज एक वेब श्रृंखला टीवी शो जैसे धारावाहिक या वीडियो एपिसोड की एक श्रृंखला है जिसे इंटरनेट पर प्रसारित किया जाता है और इसे वेबिसोड के नाम से भी जाना जाता है , आम तौर पर यह 8 से 10 एपिसोड की वेब सीरीज होती है.

वेब सीरीज का क्या मतलब होता है?

वेब सीरीज वीडियो एपिसोड की एक सीरीज होती है जो इंटरनेट पर रिलीज होती है . लोग इसे एमएक्स प्लेयर, ऑल्ट बालाजी, नेटफ्लिक्स आदि जैसे ओटीटी प्लेटफॉर्म पर ऑनलाइन देखते हैं . वेब सीरीज को इंटरनेट के माध्यम से ऑनलाइन देखा जाता है इसे देखने के लिए थिएटर जाने की जरूरत नहीं है .

फ्री वेब सीरीज के लिए कौन सा App बेस्ट है?

YouTube
Telegram
Mx Player
Moviestime App
Jio TV
Airtel Xtreme App

वेब सीरीज और टीवी सीरियल में क्या अंतर है?

टीवी सीरियल और वेब सीरीज में सबसे बड़ा अंतर तो यही होता है की TV series को हमारे TV पर प्रसारित किया जाता है जिसे हम बिना इंटरनेट के भी देख सकते है और वेब सीरीज को इंटनेट के माध्यम से डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर प्रसारित किया जाता है जिसे देखने के लिए इंटरनेट की जरुरत होती है .

अंतिम शब्द

इस लेख में हमने देखा वेब सीरीज क्या है (Web Series Meaning in Hindi) , वेब सीरीज कैसे देखें ? और वेब सीरीज के बारे में अन्य जानकारी इस आर्टिकल में हमने आपको कुछ OTT Platforms और Apps के बारे में भी बताया है की कैसे आप इन OTT Platforms Apps की मदद से Online वेब सीरीज देख सकते है .

दोस्तों जब बाद वेब सीरीज देखने की आती है तो कई लोग Paid वेब सीरीज को फ्री में देखने का प्रयास करते है जो की बिलकुल गलत बात है हमेशा वेब सीरीज को कानूनी (Legal) तरीके से ही देखना चाहिए .

अगर कोई वेब सीरीज किसी ऑफिसियल OTT प्लेटफार्म पर फ्री में प्रसारित होती है तो उसे आप अवश्य देख सकते है .

दोस्तों उम्मीद है आपको वेब सीरीज के बारे में यह जानकारी अच्छी लगी होगी अगर आपके मन में अभी भी वेब सीरीज से संबंधित कोई भी सवाल है तो आप कमेंट करके पूछ सकते है हम आपके कमेंट का रिप्लाई जरूर करेंगे .

Streaming का मतलब क्या है | Streaming Meaning in Hindi

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streaming-meaning in hindi

Streaming Meaning in Hindi: आज के समय में Internet की दुनिया से तो हर कोई वाकिफ है। Internet के बारे में हर किसी ने सुना और इसके बारे में दुनिया में लगभग हर इंसान जानता है। जैसे-जैसे internet बढ़ रहा है वैसे-वैसे internet से सम्बंधित काम और services भी बढ़ते जा रहे हैं। जैसे – अगर एक service की बात करें तो आज internet के इस्तेमाल से Streaming करी जा रही है। अगर आप streaming के बारे में कुछ भी नहीं जानते हैं तो कोई बात नहीं क्योंकि इस article में हम आपको streaming से सम्बंधित संपूर्ण जानकारी देने वाले हैं जैसे – Streaming का मतलब क्या होता है, Live Streaming का मतलब क्या है, Streaming services का मतलब क्या है आदि। अगर आप Streaming के बारे में सब कुछ जानना चाहते हैं तो इस article को अंत तक जरूर पढ़ें। क्योंकि इस article को पढ़ने के बाद आपको streaming के बारे में सब कुछ समझ में आ जाएगा।

Streaming का मतलब क्या है – Streaming Meaning in Hindi

Streaming का मतलब होता है बिना किसी audio/video file को download किये अपने किसी device पर internet की मदद से online चलाना। Streaming में आपको कोई video देखने या कोई audio सुनने के लिए उसे download करने की जरूरत नहीं होती है। आप उसे अपने Smartphone, Laptop या अपने किसी भी device पर बिना download किये चला सकते हैं। और इसी प्रक्रिया को Streaming कहते हैं।

Streaming content में आप कई चीज़ें देख सकते हैं जैसे – movies, TV shows, web series, आदि। Streaming की मदद से आप podcasts यानी audio shows भी सुन सकते हैं।

पहले के समय में धीमा internet होने के कारण ऐसी कोई भी service उपलब्ध नहीं थी। बल्कि पहले के समय में तो online videos की जगह ज्यादातर photos देखने को मिलती थी।

लेकिन समय के साथ-साथ internet बहुत तेज होता गया जिसके कारण videos content बढ़ने लगा। और video content के बढ़ने से streaming का जन्म हुआ।

अब Internet तेज होने के कारण बिना किसी रुकावट के users videos को direct अपने किसी भी device में internet के जरिये play कर सकते हैं। इसके लिए उन्हें उस content को देखने के लिए उसे download करने की कोई भी जरूरत नहीं है।

Streaming की मदद से आज के समय में videos, audios और games को live stream किया जाता है। Live Stream या Live Streaming क्या होती है इसके बारे में हम आपको बाद में बताएंगे।

Streaming की मदद से किसी भी content या game को online real time में stream किया जा सकता है।

Streaming content की बात करें तो आज के समय में ऐसी कई movies और web series हैं जो की अलग-अलग streaming platforms जैसे – Hotstar, Amazon Prime, Netflix आदि पर release करी जाती हैं जिन्हे आप बिना अपने device में download किये online इन platforms पर देख सकते हैं।

Streaming करने के लिए जरूरी चीज़ें

Streaming करने के लिए मुख्य तौर पर केवल दो चीज़ों की ही आवश्यकता होती है जो की निचे दी गयी है।

  1. High-Speed Internet – किसी भी content को online stream करने के लिए सबसे जरूरी चीज़ होती है internet. क्योंकि online content को बिना रुकावट के stream करने में fast internet ही जरूरत होती है।
  1. Streaming Platform – Streaming platform वो platform (app या website) होती है जहाँ पर content को online stream किया जाता है जैसे – Hotstar, Amazon Prime, Netflix, YouTube आदि।

Live Streaming का मतलब क्या है?

Live streaming का मतलब होता है content को एक ही समय पर record और broadcast करना। इसमें content को record भी किया जाता है और उसी समय उसे streaming platforms पर live दिखाया जाता है।

जब कोई Smartphone company अपने किसी नए phone का launch event करती है तो वो उस event को live stream करती है यानी वो उसे broadcast भी करती है और साथ ही उसे record भी करती है ताकि उसे लोगों द्वारा बाद में देखा जा सके।

Streaming Services का मतलब क्या है?

आज-कल ऐसे कई platforms मौजूद हैं जहाँ पर streaming content को upload या share करा जाता है जैसे – Hotstar, Amazon Prime, Netflix आदि।

ये सभी platforms अपने users को Streaming services देते हैं और इसलिए इन सभी platforms को streaming platforms कहा जाता है।

तो इस तरह streaming services का मतलब होता है वो platform जो की content को stream करके streaming की service user को देते हैं।

Streaming और Live Streaming में क्या फर्क होता है?

अब हम आपको बताएंगे की Streaming और Live Streaming में क्या अंतर होता है।

Streaming और Live Streaming दो ऐसे शब्द हैं जिनका इस्तेमाल अक्सर एक दूसरे के साथ बदल कर किया जाता है। लेकिन इन दोनों शब्दों के अलग-अलग अर्थ होते हैं।

Streaming का मतलब होता है वो content जो की recorded है और उसे streaming platforms पर release किया गया है।

जबकि Live Streaming का मतलब होता है content को record करते समय उसे live broadcast (प्रसारित) करना।

Streaming content में आप video को skip कर सकते हैं लेकिन Live Streaming content में आप videos को skip नहीं कर सकते हैं। और जो content Live stream हो रहा होता है उसमे Live लिखा होता है जिससे ये पता चलता है की content record होने के साथ-साथ live stream हो रहा है।

सभी live content को आप skip नहीं कर सकते हैं लेकिन कुछ live streaming content को skip किया जा सकता है।

Streaming के फायदे

  1. Streaming करने से content को बिना download किये देखा जा सकता है।
  2. Streaming से आप बिना content को download किये देख सकते हैं जिसके कारण आपके device में storage की कोई भी दिक्कत नहीं होती है। अगर आपके device में storage नहीं भी है तो भी आप अपने favourite content का मजा उठा सकते हैं।
  3. Streaming में आपको original content देखने को मिलता है क्योंकि streaming platforms पर सब कुछ original होता है।
  4. Original content होने के कारण picture और sound quality अच्छी आती है।

Streaming के नुकसान

  1. Content को online stream करने के लिए internet connection की जरूरत होती है और अगर आपके पास internet नहीं है तो आप content को नहीं देख पाएंगे।
  2. कभी-कभी सिर्फ Internet से काम नहीं चलता है बल्कि content को ठीक से stream करने के लिए fast internet की जरूरत होती है तो अगर आपके पास तेज internet नहीं है तब भी आप content को नहीं देख पाएंगे।
  3. Online content देखने में internet खर्च होता है तो अगर आपके पास Wi-Fi है तो ठीक है लेकिन अगर आपके पास Wi-Fi नहीं है और आप streaming में cellular internet का इस्तेमाल करते हैं तो आपका ज्यादातर internet खत्म हो जाएगा।

Live Streaming Platforms List

  1. Vimeo
  2. IBM Cloud Video
  3. Brightcove
  4. Panopto
  5. Kaltura
  6. Qumu
  7. DaCast
  8. JW Player
  9. Muvi
  10. Hotstar
  11. Amazon Prime
  12. Netflix
  13. YouTube Live
  14. StreamShark
  15. Wowza
  16. StreamYard
  17. Restream
  18. Resi
  19. Dailymotion
  20. Facebook Live
  21. Instagram
  22. Twitch
  23. LinkedIn Live

निष्कर्ष

इस article में हमने Streaming से सम्बंधित संपूर्ण जानकारी दे दी है। और अगर आपने ये article अंत तक पढ़ा है तो आपको समझ में आ गया होगा की Streaming का मतलब क्या होता है

अगर आपको ये article और इसमें दी गयी जानकारी उपयोगी लगी हो तो इसे अपने दोस्तों के साथ share जरूर करें ताकि उन्हें भी Streaming का मतलब पता चल सके।

अगर आप हमसे कोई सवाल पूछना चाहते हैं तो निचे comment कर सकते हैं। हम आपके सवाल का जवाब जरूर देंगे।

अन्य पढ़े –

BGMI का मतलब क्या होता है | BGMI Full Form in Hindi

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BGMI Full Form in Hindi

दोस्तों क्या आप जानते है BGMI का मतलब क्या होता है ? या फिर BGMI का Full Form क्या होता है ? अगर नहीं जानते तो आप बिलकुल सही जगह पर आये है क्योंकि इस आर्टिकल में आप जानेंगे की BGMI का मतलब क्या होता है (BGMI Full Form in Hindi) और BGMI Full Form से संबंधित पूरी जानकारी हिंदी में .

अगर आप इंटरनेट और सोशल मीडिया का उपयोग करते है तो आपने BGMI के बारे में जरूर सुना होगा , कुछ दिनों से ‘BGMI’ शब्द काफी ट्रेंडिंग में चल रहा है और आपने भी इसके बारे में जरूर सुना होगा तभी तो आप BGMI का Full Form पता करने की कोशिश कर रहे है !

आपको एक संकेत के तौर पर बता दूँ BGMI यह शब्द Game से संबंधित है एक ऐसा प्रचलित गेम जो इन दिनों बहुत ज्यादा प्रसिद्द है तो बिना समय बर्बाद किये शुरू करते है हमारा आज का आर्टिकल और पता करते है की BGMI का मतलब क्या होता है ?

BGMI क्या है (What is BGMI)

BGMI का मतलब बैटल ग्राउंड्स मोबाइल इंडिया होता है और यह प्रसिद्द गेम PUBG Mobile का इंडियन वर्शन है बैटलग्राउंड्स मोबाइल इंडिया क्राफ्टन द्वारा विकसित और प्रकाशित एक ऑनलाइन मल्टीप्लेयर बैटल रॉयल गेम है. यह गेम विशेष रूप से भारतीय यूजर्स के लिए बनाया गया है और यह गेम 2 जुलाई 2021 को Android Devices के लिए जारी किया गया था.

अन्य चायनीज एप्स के साथ जब PUBG Mobile को भी भारत में बैन कर दिया था तब भारतीय Gamers के बिच में काफी नाराजगी का माहौल बना था , भारतीय Gamers की Battleground Game की यह जबरदस्त डिमांड देखकर क्राफ्टन कंपनी में PUBG Mobile को फिर से भारत में लांच करने का विचार किया .

नए नियम और प्राइवेसी के साथ जब PUBG Mobile को फिर से भारत में लांच करने का समय आया तब इसका नाम PUBG Mobile से Battlegrounds Mobile India यानि BGMI रख दिया गया . मतलब BGMI ही PUBG Mobile है सिर्फ इसका नाम बदल दिया है .

BGMI Full Form in Hindi

BGMI Full Form – Battlegrounds Mobile India

BGMI का फुल फॉर्म Battlegrounds Mobile India होता है . यह PUBG Mobile गेम का ही इंडियन वर्शन है , BGMI सिर्फ भारतीय ऑडियंस को ध्यान में रखकर बनाया गया है इसलिए इसे सिर्फ भारत में ही खेला जा सकता है . भारत के बाहर बैटलग्राउंड्स मोबाइल इंडिया गेम को नहीं खेला जा सकता है .

PUBG Mobile को भारत में बैन करने के बाद क्राफ्टन कंपनी ने इसे कुछ बदलाव कर के BGMI फिर से भारत में लांच कर दिया है .

जिस प्रकार PUBG का फुल फॉर्म PlayerUnknown’s Battlegrounds होता है उसी प्रकार BGMI का फुल फॉर्म Battlegrounds Mobile India होता है . बैटलग्राउंड्स मोबाइल इंडिया यह नाम बोलने में थोड़ा बड़ा लगता है इसलिए इसका शार्ट फॉर्म BGMI बनाया गया है .

BGMI के अन्य Full Forms

दोस्तों जैसा की आपको पता ही होगा की किसी भी Short Form का सिर्फ एक मतलब नहीं होता है अलग अलग क्षेत्र में उस Short Form के अलग अलग Long Form / Full Form निकलते है इसीलिए BGMI के भी कुछ अन्य Full Forms भी होते है जिनके बारे में आपको पता होना चाहिए .

  • BGMI = Battlegrounds Mobile India
  • BGMI = Biography and Genealogy Master Index
  • BGMI = Barrick Goldstrike Mines, Inc
  • BGMI = Beautiful Gate Ministries International
  • BGMI = Barrons Gold Mining Index

BGMI का मतलब क्या होता है (BGMI Meaning in Hindi)

अभी तक हमने देखा की BGMI क्या है इसका Full Form क्या होता है अब हम देखेंगे की आखिर BGM का मतलब क्या होता है दोस्तों जैसा की आपको पता है BGMI का मतलब Battlegrounds Mobile India होता है लेकिन क्या आप जानते है BGMI का हिंदी में क्या मतलब होता है (What is BGMI Meaning in Hindi) .

BGMI का हिंदी अर्थ होता है ‘युद्धभूमि मोबाइल भारत’ मतलब बैटलग्राउंड्स मोबाइल इंडिया . BGMI का हिंदी अनुवाद थोड़ा अजीब लगता है लेकिन इसका हिंदी मतलब यही होता है .

BGMI FAQs in Hindi

BGMI क्या है ?

BGMI का मतलब बैटल ग्राउंड्स मोबाइल इंडिया होता है और यह प्रसिद्द गेम PUBG Mobile का इंडियन वर्शन है बैटलग्राउंड्स मोबाइल इंडिया क्राफ्टन द्वारा विकसित और प्रकाशित एक ऑनलाइन मल्टीप्लेयर बैटल रॉयल गेम है.

BGMI का Full Form क्या है ?

BGMI का Full Form Battlegrounds Mobile India होता है .

BGMI का हिंदी अर्थ क्या होता है ?

BGMI का हिंदी अर्थ होता है ‘युद्धभूमि मोबाइल भारत’ मतलब बैटलग्राउंड्स मोबाइल इंडिया .

BGMI कब Launch हुआ ?

BGMI भारत में 2 July 2021 को Launch हुआ था .

BGMI कैसे डाउनलोड करे ?

सबसे पहले अपने एंड्राइड फ़ोन के प्लेस्टोर में जाएँ और सर्च करे ‘BGMI’ सबसे पहले रिजल्ट में आपको Battlegrounds Mobile India दिखेगा उसके Install बटन पर क्लिक करे आपके डिवाइस में BGMI डोनलोड हो जायेगा .

अंतिम शब्द

दोस्तों उम्मीद है आपको हमारा आज का आर्टिकल BGMI का मतलब क्या होता है (BGMI Full Form in Hindi) पसंद आया होगा अगर आपको BGMI की यह जानकारी अच्छी लगी तो इसे अपने दोस्तों के साथ जरूर शेयर करे और अगर इस पोस्ट से संबंधित कोई भी सवाल आपके मन में है तो कमेंट करके हमसे जरूर पूछे.

ट्रांसफार्मर क्या है | Transformer in Hindi

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Transformer kya hai

आज इस article में हम आपको एक ऐसे उपकरण के बारे में बताने वाले हैं जिसके कारण हमारे जीवन में रौशनी है।

आज इस article के माध्यम से हम आपको Transformer के बारे में बताने वाले हैं। यहाँ हम आपको Transformer से सम्बंधित सभी जानकारी देने वाले हैं जैसे – Transformer क्या होता है, Transformer के प्रकार, Transformer के Parts, Transformer काम कैसे करता है आदि।

अगर आप transformer के बारे में संपूर्ण जानकारी हासिल करना चाहते हैं तो इस article को अंत तक जरूर पढ़ें।

और हम आपको इस बात का यकीन दिलाते हैं की इस article को पढ़ने के बाद आपको Transformer के बारे में सब कुछ पता चल जाएगा और आपको इस उपकरण के बारे में सब कुछ समझ में आ जाएगा।

Transformer क्या है (What is Transformer in Hindi)

Transformer एक ऐसा device होता है जो की AC current की voltage को घटा या बढ़ा सकता है और उसे एक circuit से दूसरे circuit में transfer कर सकता है।

ये electrical energy को frequency में बिना किसी बदलाव के magnetic field के जरिये एक circuit से दूसरे circuit में transfer कर देता है।

इसमें जो electrical circuit electrical source की power को receive करता है उसे primary winding कहते हैं और जो दूसरा circuit electrical energy को load में deliver करता है उसे secondary winding कहते हैं।

Transformer के प्रकार

Transformer कई अलग-अलग प्रकार के होते हैं। और इनके प्रकार कई अलग-अलग आधारों पर होते हैं। यहाँ हम आपको transformer के हर एक प्रकार के बारे में विस्तार से बताएंगे।

1. Voltage Level के आधार पर

इस transformer का इस्तेमाल सबसे ज्यादा किया जाता है। ये transformer का सबसे common type होता है। Voltage ration के आधार पर transformers 2 प्रकार के होते हैं।

  1. Step Up Transformer – Step up transformer वो होता है जो की voltage को primary से secondary में बढ़ाता है। इसमें secondary winding turns ज्यादा होते हैं और primary winding turns कम होते हैं।
  1. Step Down Transformer – Step down transformer वो होता है जो की high voltage, low current power को low voltage, high current power में बदल देता है। Distribution network में step down transformer का आमतौर पर इस्तेमाल किया जाता है।

2. Core Medium के आधार पर

Primary और secondary winding के बीच में रखे गए medium के आधार पर transformer के 2 प्रकार होते हैं।

  1. Air Core Transformer – Primary और secondary दोनों windings एक non-magnetic strip पर लिपटी होती हैं जहाँ पर primary और secondary windings के बीच का flux linkage हवा के माध्यम से होता है।

Iron core की तुलना में air core में mutual inductance कम होता है यानी generated flux में जो reluctance offer किया जाता है वो air medium में अधिक होता है। लेकिन hysteresis और eddy current losses air core type transformer में पूरी तरह से समाप्त हो जाते हैं।

  1. Iron Core Transformer – इसमें दोनों primary और secondary windings multiple iron plate bunch पर लिपटा होता है जो की generated flux को एक perfect linkage path देता है।

ये लोहे के conductive और magnetic property के कारण linkage flux को कम reluctance प्रदान करता है। ये widely use किया जाने वाले transformer होते हैं जिनकी efficiency air core type transformer से ज्यादा होती है।

3. Winding Arrangement के आधार पर

Winding arrangement के आधार पर transformers 2 प्रकार के होते हैं।

  1. Two Winding Transformer – Windings के आधार पर based transformers जैसे 2 winding based transformers हर एक phase के लिए 2 अलग-अलग windings primary और secondary include करता है। यहाँ पर primary winding input of AC के through supply करी जा सकती है जबकि secondary को load के माध्यम से जोड़ा जा सकता है। ये 2 windings electrically isolated होती हैं लेकिन magnetically coupled होती हैं।

Secondary winding के अंदर induced EMF अलग-अलग magnetic flux के कारण होता है जो की primary winding के अंदर बदले current के कारण हो सकता है जिसे mutual induction भी कहा जाता है।

तो o/p voltage केवल induction के कारण होती है। ये voltage winding ratio पर depend करती है और ये voltage को घटा या बढ़ा सकता है।

  1. Auto Transformer – Standard transformers में primary और secondary windings 2 अलग-अलग directions में placed होती हैं लेकिन autotransformer windings में primary और secondary windings एक दूसरे से physically और magnetically series में connected होती हैं।

4. Usage के आधार पर

Usage के आधार पर transformers 7 प्रकार के होते हैं जो की हैं – power transformer, distribution transformer, measurement transformer, potential transformer, current transformer, protection transformer और instrument transformer.

निचे हमने हर एक transformer के बारे में विस्तार से बताया है।

  1. Power Transformer – Power transformers size में काफी बड़े होते हैं। ये transformers high voltage (33KV से ज्यादा) power transfer applications के लिए suitable होते हैं। इसका इस्तेमाल power generation stations और transmission substations में किया जाता है। इसका insulation level high होता है।
  1. Distribution Transformer – Power generation plant से generate हुई power को distribute करने के लिए distribution transformers का इस्तेमाल किया जाता है। इसका इस्तेमाल electrical energy को distribute करने के लिए किया जाता है जो की industrial purpose के लिए 33KV से कम होती है और domestic purpose के लिए 440v-220v होती है।

ये 50-70% की low efficiency पर काम करते हैं। इनका size छोटा होता है। इन्हे install करना आसान होता है।

  1. Measurement Transformer – Measurement transformer का इस्तेमाल electrical quantity को measure करने के लिए किया जाता है जैसे – voltage, current, power आदि। इन्हे potential transformers, current transformers आदि की तरह classify किया गया है।
  1. Potential Transformer – Potential transformer को voltage transformer के नाम से भी जाना जाता है। इस transformer में primary winding को high voltage से जोड़ा जा सकता है जिसकी voltage को calculate करना है और मापने और meter के लिए इस्तेमाल किये जाने वाले सभी instruments transformer की secondary winding से जुड़े होते हैं।

इस transformer का मुख्य काम voltage level को एक secure limit तक decrease करने का होता है या एक value तक। इस transformer में primary winding एक security point की तरह grounded या earthed होती है।

  1. Current Transformer – Current transformer का इस्तेमाल gauge के लिए और safety purpose के लिए किया जाता है। एक बार जब measuring instrument में directly apply करने के लिए circuit के अंदर current high हो जाता है तो इस transformer का इस्तेमाल मुख्य रूप से circuit के अंदर high current को current की सही value में convert करने के लिए किया जाता है।

इस transformer में main winding series में connect होती है main supply की तरफ और साथ-साथ विभिन्न measuring instruments जैसे – voltmeter, ammeter, protective relay coil और wattmeter से जुड़ी होती है। इन transformers में current ratio, phase relation और accuracy होती है meter को ठीक काम करने की अनुमति दी जा सके। इस transformer में term ratio CT में एक huge significance  include करता है।

  1. Protection Transformer – इस तरह के transformers का इस्तेमाल component की सुरक्षा हेतु किया जाता है। Measuring transformers और protection transformers के बीच मुख्य अंतर accuracy का होता है यानी protection transformers measuring transformers से ज्यादा accurate होने चाहिए।
  1. Instrument Transformer – Instrument transformer को isolation transformer या measurement transformer भी कहा जाता है। ये एक electrical device होता है जिसका इस्तेमाल voltage और current की level को बदलने के लिए किया जाता है।

इस transformer का मुख्य काम primary winding में high voltage और current supply होने के बाद secondary winding को securely isolate करने का होता है ताकि energy meters, relays या measuring instruments जो secondary winding की तरफ allied होते हैं वो injured न हों।

5. Place of Use के आधार पर

Place of use के आधार पर transformers 2 प्रकार के होते हैं जो की हैं:

  1. Indoor Transformers – Indoor transformers line voltage input को low voltage output में बदल देता है और ये transformers indoor में use करने के लिए बने होते हैं।
  1. Outdoor Transformers – ये transformers distribution transformers जैसे होते हैं।

6. Phase के आधार पर

Phase के आधार पर transformers 2 प्रकार के होते हैं – Single phase transformer और Three phase transformer.

  1. Single Phase Transformer – ये एक stationary device होता है और single phase transformer का working principle मुख्य रूप से Faraday’s law के mutual induction पर निर्भर होता है। Frequency की stable level पर और voltage की difference level पर ये transformer AC power को transmit करता है एक circuit से दूसरे circuit में।

ये transformer 2 तरह की windings को include करता है एक primary winding और दूसरी secondary winding. Primary winding AC supply को provide करी जाती है जबकि load secondary winding से connect होता है।

  1. Three Phase Transformer – Three phase transformer primary और secondary windings के 3 sets से बने होते हैं और हर एक winding iron core assembly की टांग में लिपटी होती है।

अगर 3 one phase transformers का इस्तेमाल किया जाए और उन्हें 3 primary winding की मदद से एक साथ जोड़ा जाए और सभी 3 secondary windings को एक साथ एक की तरह जोड़ा जाए तो ऐसे transformer 3-phase transformer कहा जाएगा।

3-phase supply का इस्तेमाल generation, transmission और industries में electric power की distribution के लिए किया जाता है। इस transformer की assembly महंगी नहीं होती है और इस transformer का connection star और delta type की मदद से किया जा सकता है।

Transformer के Parts

Transformer के कई अलग-अलग parts होते हैं जिनके बारे में निचे सब कुछ बताया गया है।

  1. Transformer का Core – Transformer में core का इस्तेमाल transformer में generate हुए magnetic flux को एक controlled path देने के लिए होता है।

ये core steel का single solid बार नहीं होता है बल्कि ये बहुत सारी thin laminated sheets या layers का एक group होता है। इसको heat को reduce करने के लिए या उसे पूरी तरह से खत्म करने के लिए बनाया जाता है।

  1. Winding – Transformer की 2 windings होती हैं एक primary winding और दूसरी secondary winding. Primary winding winding होती है जो source से power को निकालती है।

Secondary winding वो coil होती है जो की transformed या changed voltage में load को energy deliver करती है। अक्सर इन coils को subdivide किया जाता है ताकि flux creation को कम किया जा सके।

  1. Transformer का Conservator Tank – Conservator tank का काम transformer को ठंडा रखने का होता है। इस tank के अंदर तेल डाला जाता है जो की transformer को ठंडा रखने का काम करता है। इसका इस्तेमाल कई तरह के transformers में किया जाता है जिनमे से एक है three phase transformer.
  1. Transformer का Breather – Transformer breather का काम transformer के अंदर हवा को exchange करने का होता है। Transformer breather atmospheric moisture को रोकने और maintenance cost को कम करने में मदद करता है। Transformer की breathing cycle के दौरान transformer के अंदर moisture जाने से रोकना जरूरी है जो की तेल को दूषित कर सकता है।
  1. Transformer के Valves – Transformer में valves की मदद से तेल डाला जाता और उसी की मदद से तेल को बहार भी निकाला जाता है। Transformer valve बिना तेल के स्तर को कम किये बिना device को circuit से disconnect करने की अनुमति भी देता है।
  1. Transformer का Steel Tank – Steel tank transformer का एक एहम हिस्सा होता है। जैसा की नाम से ही पता चलता है की ये tank steel से बना होता है। Transformer का core इस tank के अंदर रखा जाता है। Windings और अन्य जरूरी सामान को इस tank के अंदर रखा जाता है।

ये tank insulating oil (mineral oil) से भरा होता है। ये cylindrical या cubical shape का होता है जो की transformer की construction पर निर्भर रहता है। इसे अंदर से और बहार से सुरक्षा के लिए color से paint किया होता है। Color coating accidental winding connection से सम्बंधित सुरक्षा भी देती है।

  1. Transformer की Cooling Tube – Cooling tubes में तेल बहता है जो की radiator की तरह काम करता है और तेल यानी oil को ठंडा रखता है।
  1. Thermometer – Thermometer जिसे हिंदी में तापमापी कहा जाता है का इस्तेमाल करके transformer के अंदर मौजूद oil और winding का तापमान मापा जाता है। और जब तापमान ज्यादा बढ़ जाता है तब एक alarm बज जाता है।

Transformer का Structure कैसा होता है?

ऊपर हमने आपको Transformer के विभिन्न parts के बारे में तो बता दिया है। और अब हम आपको transformer के structure के बारे में बताएंगे।

वैसे तो transformer के कई parts होते हैं लेकिन मुख्य रूप से transformer के सिर्फ 3 parts ही होते हैं जिनके बारे में निचे बताया गया है।

  1. Primary Winding – Primary winding एक coil होती है जो की कुछ ऐसे तरीके से लिपटी होती है की जब current का amount change होता है तो वो अपने पड़ोसी circuit के अंदर current में बदलाव ले आता है। इनका इस्तेमाल transformers में source से power निकालने के लिए किया जाता है।

Primary winding का मुख्य काम current को circulate करने का होता है और core को magnetize करने का होता है।

  1. Magnetic Core – Magnetic core में transformers का काम बताया जाता है magnetic flux को बढ़ाने और increase करने के लिए जो की primary और secondary core को जोड़ता है।
  1. Secondary Winding – Primary winding में जो flux generate हुआ होता है उसे core से pass किया जाता है जो की secondary winding से जुड़ा होता है। Secondary winding भी उसी core से लिपटी होती है जिससे की primary winding लिपटी होती है और ये transformer से जरूरत अनुसार output generate करती है।

Transformer काम कैसे करता है?

Transformer के काम करने का तरीका बहुत आसान है जो की हम आपको बताने वाले हैं और इसे पढ़कर आपको समझ में आ जायेगा की transformer कैसे काम करता है।

जब electric current किसी wire के through flow करता है तो वो उस wire के चारों तरफ magnetic field को produce करता है जो की अदृश्य होती है और जिसे magnetic flux भी कहा जाता है।

Magnetism की strength electric current के size पर निर्भर होती है। जितना ज्यादा current होगा उतनी ही ज्यादा और मजबूत magnetic field बनेगी।

यहाँ पर electricity के बारे में एक बहुत ही रोचक तथ्य है जो की है की जब किसी तार के पास magnetic field fluctuate करती है तो वो wire में electric current को produce करती है।

तो अगर हम एक दूसरी coil of wire को first coil of wire के पास रखेंगे और first coil of wire में एक fluctuating current भेजेंगे तो second coil of wire first coil of wire के कारण अपने आप electric current produce हो जाएगा।

First coil of wire में जो current होता है उसे primary current कहते हैं और second coil of wire में जो current होता है उसे secondary current कहते हैं।

यहाँ पर क्या होता है की बिना किसी physical connection के current को एक wire से दूसरी wire में transfer किया जाता है। इसे electromagnetic induction कहते हैं क्योंकि first coil second coil में current ले आती है।

Electrical energy को एक coil से दूसरी coil में एक soft iron bar की मदद से और भी तेजी से transfer किया जा सकता है। इसके लिए बस उन्हें soft iron bar के चारों ओर लपेटना होगा (इसे कई बार core भी कहा जाता है)

Wire की coil बनाने के लिए उसे केवल गोल-गोल लपेटना होता है। अगर दूसरी coil में उतने ही turns होते हैं जितने की first coil में हैं तो second coil में भी उतना ही current होगा जितना की first coil में है। लेकिन अगर second coil में turns कम या ज्यादा होते हैं तो हम secondary current या voltage को primary current या voltage से छोटा या बड़ा कर सकते हैं।

ये पूरी प्रक्रिया सिर्फ fluctuating current के साथ ही काम करती है तो आपको इस बात का ध्यान देना होगा की आप लगातार बदलने वाले current का इस्तेमाल करें जिसे Alternating current (AC) कहते हैं।

Transformers Direct current (DC) के साथ काम नहीं करते हैं क्योंकि direct current लगातार केवल एक ही direction में flow करता रहता है।

Transformer का क्या काम होता है?

Transformer एक electrical device होता है जो की circuit में current के लिए voltage का व्यापार करता है बिना total electrical power को affect किये।

इसका ये मतलब है की transformer high-voltage electricity को small current के साथ लेता है और उसे low-voltage electricity के साथ high current में बदल देता है या फिर इसका उल्टा कर देता है।

Transformer के उपयोग

Transformers का इस्तेमाल अलग-अलग जगह किया जाता है जिनके बारे में निचे बताया गया है।

  1. Used in Steel Manufacturing
  2. Used for Electrochemical
  3. Electricity के Flow को चलाने और रोकने के लिए
  4. Used in Battery Switching
  5. Coolant की तरह इस्तेमाल किया जाता है
  6. Used in Air Conditioners (AC)
  7. Used in Ammeters
  8. Used in Stabilizers
  9. Used in Rectifiers
  10.  Used for Electricity delivery to homes

Transformer से सम्बंधित कुछ सवाल

Transformer का आविष्कार कब हुआ था?

Transformer का अविष्कार सन 1885 में हुआ था।

Transformer का आविष्कार किसने किया था?

Transformer का आविष्कार 3 Hungarian scientists द्वारा किया गया था जिनके नाम हैं – Ottó Bláthy, Miksa Déri and Károly Zipernowsky.

Transformer किस सिद्धांत पर काम करता है?

Transformer Faraday’s law पर काम करता है जो की कहता है की – जब भी किसी conductor को बार-बार बदलने वाली magnetic field के अंदर रखा जाएगा तो electromotive force induce होती है। अगर conductor circuit closed है तो current induce होगा जिसे की induced current कहते हैं।

क्या Transformer DC Supply पर भी काम करता है?

नहीं Transformer सिर्फ AC यानी Alternating current पर ही काम करता है। Transformer लेता भी AC supply है और देता भी AC supply है।

निष्कर्ष

दोस्तों इस article में हमने आपको Transformer से सम्बंधित हर जरूरी जानकारी दे दी है और अगर आपने ये article अंत तक ध्यान से पढ़ा होगा तो आपको transformer के बारे में सब कुछ पता चल गया होगा जैसे – Transformer क्या है, Transformer के प्रकार और उपयोग आदि

अगर आपको Transformer पर ये article पसंद आया हो और इससे आपको अच्छी जानकारी मिली हो तो इस article को अपने दोस्तों के साथ share जरूर करें ताकि वो भी transformer के बारे में जान सकें और उन्हें भी पता चल सके की उनके घर जिस उपकरण के कारण बिजली पहुँचती है वो काम कैसे करता है।

अगर आप हमसे transformer से सम्बंधित कोई सवाल पूछना चाहते हैं तो निचे comment कर सकते हैं।

एंड्राइड मोबाइल में नेटवर्क प्रॉब्लम कैसे ठीक करे | Solve Android Mobile Network Problems

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Solve Android Mobile Network Problems

दोस्तों मोबाइल फ़ोन कितना भी अच्छा हो या फिर कितना ही महंगा हो नेटवर्क की समस्या से उसका कोई लेना देना नहीं होता Network की Problem तो Mobile में कभी भी आ सकती है .

एक एंड्राइड यूजर को कई बार Network Problems का सामना करना पड़ता है कई बार “Weak Signals”, “Network Error” , “Phone Not Registered on Network“, “Mobile Network Not Available“, और “No Signal Found” जैसी समस्याएं हमे अपने Android Phone में देखने को मिलती है .

दरअसल Android mobile network problems की इन सभी समस्याओं को कुछ ट्रिक्स से आसानी से Solve किया जा सकता है , आज के इस आर्टिकल में मैं आपको कुछ ऐसी ही टिप्स और ट्रिक्स के बारे में बताने जा रहा हूँ .

इस आर्टिकल में जो ट्रिक मैं आपको बताने जा रहा हु उनसे आप अपने फ़ोन की नेटवर्क प्रोब्लेम्स की अनेक समस्याओं से छुटकारा पा सकते है इसलिए इसे अंत तक जरूर पढ़े .

Android मोबाइल में Network Problem Solve करने की बेस्ट टिप्स & ट्रिक्स

अगर आप अपने मोबाइल फ़ोन की किसी भी प्रकार की Network Problems से परेशान है तो जैसे Slow internet connection , Network connection error, Signal not found, Network Error आदि . तो निचे बताई टिप्स & ट्रिक्स को आप फॉलो कर सकते है .

1. अपने डिवाइस को रीस्टार्ट करें

यदि आपके मोबाइल फ़ोन में कोई भी समस्या आती है तो उसे ठीक करने का सबसे अच्छा और आसान तरीका होता है मोबाइल को Restart करना ! कई बार हमसे गलती से फ़ोन की सेटिंग्स चेंज हो जाती है या फिर फ़ोन के UI में भी प्रॉब्लम होती है ऐसे में अगर आपने अपना मोबाइल फ़ोन लम्बे समय से Restart नहीं किया है तो आपको उसे एक बार Restart जरूर करना चाहिए हो सकता है बिना किसी सेटिंग किये सिर्फ Restart से ही आपका Network Problem Solve हो जाये .

2. सुनिश्चित करें कि Airplane mode बंद (OFF) है

कभी कभी हम अपने फ़ोन में Airplane mode को ON कर देते है या गलती से यह ON रह जाता है आपको बता दूँ की Airplane mode चालू करने से हमारेफ़ोन का Network बंद हो जाता है . ना किसी का कॉल आ सकता है और न हम किसी को कॉल कर सकते है इससे SIM card के कॉलिंग के साथ ही इंटरनेट डाटा भी OFF हो जाता है ऐसे में अगर आपको अगर Network Problem आ रही है तब यह जरूर सुनिश्चित कर लें की आपके फ़ोन में Airplane mode बंद (OFF) है.

3. सुनिश्चित करें कि आपका डिवाइस पूरी तरह से चार्ज है

जब आपकी बैटरी बहुत कम होती है, तो आपका फ़ोन चालू रहने को प्राथमिकता देता है जो आपके फ़ोन की सिस्टम प्रक्रियाओं को प्रभावित कर सकता है और फ़ोन की बैटरी के उपयोग में नेटवर्क का बहुत बड़ा हिस्सा होता है फ़ोन में Network शुरू रखने में बहुत बैटरी खर्च करनी पड़ती है ऐसे में अगर आपके फ़ोन की बैटरी कम है तो आपका फ़ोन अपने आप Network Service को कम तथा बंद कर देता है इसलिए अगर आपके फ़ोन में Network Problem आ रही है तो अपने फ़ोन को पर्याप्त मात्रा में चार्ज जरूर करें और देखें कि क्या आपके फ़ोन के पूरी तरह चार्ज होने के बाद भी उसमें कोई समस्या है.

4. सुनिश्चित करें कि आपका डिवाइस पावर सेविंग मोड में नहीं है

कई बार हम अपने फ़ोन को पावर सेविंग मोड में रखते है इससे हमारा फ़ोन चार्जिंग बचने को प्राथमिकता देता है लेकिन क्या आप जानते है पावर सेविंग मोड भी Network Problem का कारन है ? जैसा की मैंने आपको इसके पहले पॉइंट में बताया की फ़ोन में Network service को चलाने अधिक बैटरी खर्च होती है इसलिए अगर आप अपने मोबाइल फ़ोन को पावर सेविंग मोड में रखते है है तो वो Network service को बंद कर देता है ताकि फ़ोन की चार्जिंग बचे इसलिए जब भी आपके Mobile Phone में Network Problem आये तो सुनिश्चित करें कि आपका डिवाइस पावर सेविंग मोड में नहीं है.

5. सिम कार्ड निकालें और पुनः डालें

कई बार गलत तरीके से SIM Card डालने से भी Network Problem आती है इसलिए एकबार SIM Card को मोबाइल से बहार निकल कर फिर से Reinsert जरूर करें सिम कार्ड इंस्टॉल करने या निकालने से पहले सुनिश्चित करें कि आपने अपना डिवाइस बंद कर दिया है अन्यथा आप अपने डिवाइस या कार्ड को नुकसान पहुंचा सकते हैं . ध्यान रखें कि सिम कार्ड को खरोंचें या मोड़ें नहीं .

6. ग्राहक सेवा को कॉल करें

मोबाइल में Network Problems की जड़ होता है मोबाइल में मौजूद SIM Card अगर आपके SIM card में किसी भी प्रकार की दिक्कत आती है तो Network Problems आते है ऐसे में खुद कुछ सेटिंग्स करने से पहले एक बार संबंधित SIM Card के Customer service से जरूर संपर्क करे कस्टमर सर्विस द्वारा Network Problems का समाधान जरूर किया जायेगा .

7. अपनी नेटवर्क सेटिंग्स रीसेट करें

बहुत बार हम अपने मोबाइल में Settings को बदलते रहते है ऐसे में अगर हमसे कोई Network Setting बिगड़ जाती है तो Network Problems का सामना हमे करना पड़ता है इसलिए कभी भी फ़ोन में network settings बिगड़ जाये या फिर आपको ऐसा लगता है की आपने network सेटिंग्स के साथ छेड़छाड़ की है तो सबसे बेहतर विकल्प यही होगा की Network Settings को Reset कर दें यह आपकी नेटवर्क सेटिंग्स को उनके डिफ़ॉल्ट पर वापस साफ़ कर देगा .

अंतिम शब्द : How to Solve Android Mobile Network Problems Hindi

दोस्तों उम्मीद है आपको यह जानकारी अच्छी लगी होगी जिसमे हमने देखा एंड्राइड मोबाइल में नेटवर्क प्रॉब्लम कैसे ठीक करे (How to Solve Android Mobile Network Problems in Hindi) . अगर आपको यह आर्टिकल अच्छा लगा तो इसे अपने दोस्तों के साथ जरूर शेयर करे और अगर आपके के मन में इस आर्टिकल संबंधित कोई भी सवाल है तो कमेंट करके जरूर पूछें .

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Migration Certificate क्या है? इसे Online Apply कैसे करते हैं?

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Migration Certificate kya hai

आज इस article में हम छात्रों से सम्बंधित विषय के बारे में बात करना वाले हैं। आज इस article के माध्यम से हम आपको Migration Certificate के बारे में बताने वाले हैं। जब भी कोई छात्र अपना school या college बदलने जाता है तो उसे Migration Certificate की जरूरत जरूर पड़ती है।

Migration certificate के बारे में हर कोई नही जानता है और इसलिए आज का ये article migration certificate पर होने वाला है।

इस article को पढ़ने के बाद आपको migration certificate के बारे में सब कुछ समझ में आ जाएगा जैसे – Migration certificate क्या होता है, Migration certificate online apply कैसे करे, Migration certificate कितने प्रकार के होते हैं आदि।

तो अगर आप migration certificate के बारे में सब कुछ जानना चाहते हैं तो इस article को अंत तक ध्यान से पढ़ते रहिये। क्योंकि इस article को पढ़ने के बाद आप migration certificate के बारे में सब कुछ जान जाएंगे।

Migration Certificate क्या है?

Migration Certificate का सीधा और आसान अर्थ होता है किसी एक college या board से दूसरे college या board में जाने के लिए प्रमाण पत्र।

Migration certificate शब्द में migration का मतलब होता है प्रवास और certificate का मतलब होता है प्रमाण पत्र। इस तरह migration certificate शब्द का अर्थ होता है प्रवास प्रमाणपत्र

Migration certificate का इस्तेमाल तब किया जाता है जब आप किसी एक college या board से खुद को दूसरे college या board में migrate करवाना चाहते हों।

आइये इसे एक उदाहरण से समझते हैं।

मान लीजिये की आप दिल्ली के किसी college में पढ़ाई कर रहे हैं और आप अपने आप को पंजाब के किसी college में दाखिल कराना चाहते हैं।

तो दिल्ली के college से पंजाब के college में जाने के लिए आपको प्रवास प्रमाणपत्र की जरूरत पड़ेगी और आपको इसकी सहायता से अपना प्रवास दिल्ली से पंजाब के college में करवाना होगा।

जब भी आप किसी college या board से migration certificate लेंगे तो वो certificate तब तक मान्य रहेगा जब तक आप उसका इस्तेमाल करके किसी और college में दाखिला नहीं ले लेते हैं।

Migration Certificate के इस्तेमाल से आप अपने course को वही से continue कर सकते हैं जहाँ से आपने course को college में छोड़ा है।

मतलब अगर आप कोई ऐसा course कर रहे हैं जो की 3 साल का है और आपने किसी college में admission लिया है जिसमे आपने उस course की पढ़ाई 1 साल करी है।

तो अब अगर आप 1 साल बाद किसी और college में migrate यानी प्रवास करना चाहते हैं तो migration certificate के कारण आपका वो course वही से continue हो जाएगा जहाँ से आपने उसे छोड़ा था यानी आपने 1 साल पूरा कर लिया है और इसलिए जब आप दूसरे college में migrate होंगे तो आपको उस college में उस course के बचे हुए केवल 2 साल ही पढ़ने होंगे।

कुल मिलाकर Migration certificate (प्रवास प्रमाणपत्र) एक certificate होता है जिसकी मदद से आप एक board या college से दूसरे board या college में transfer हो सकते हैं।

Migration Certificate के प्रकार

Migration certificate क्या होता है इसके बारे में तो आपने जान लिया। और अब हम आपको Migration certificate के प्रकार के बारे में बताएंगे। Migration certificate 2 प्रकार के होते हैं जिनके बारे में निचे हमने विस्तार से बताया है।

  1. Inter College Migration – Inter College Migration college बदलने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। मतलब यहाँ पर आप इसका इस्तेमाल करके केवल अपना college बदलते हैं और university नहीं बदलते हैं। मतलब इसके इस्तेमाल से केवल college बदला जाता है और university same ही रहती है और university नहीं बदलती है।
  1. Inter University Migration – Inter University Migration का इस्तेमाल university बदलने के लिए किया जाता है। इसका इस्तेमाल करके college नहीं बल्कि university बदली जाती है। मतलब इसके इस्तेमाल से आप एक university से दूसरी university में प्रवास कर सकते हैं।

Inter College Migration और Inter University Migration ही Migration Certificate के 2 प्रकार हैं। हम उम्मीद करते हैं की आपको ये दोनों तरीके से अच्छे से समझ में आ गए होंगे।

Migration Certificate Apply करने के लिए Required Documents

अब हम आपको लेकिन Migration Certificate को online apply करना सिखाएंगे। लेकिन उससे पहली हम आपको Migration certificate को online apply करने के लिए जरूरी documents के बारे में बता देते हैं।

Migration certificate को apply करने के लिए आपके पास निचे दी गयी documents का होना आवश्यक है।

  1. Degree / Provisional certificate of the Course last studied
  2. Final Examination Mark Statement or the latest Mark sheet
  3. CRRI Certificate
  4. Proof of Paid Fees
  5. Aadhaar Card

ऊपर बताये गए documents के बिना आप migration certificate को apply नहीं कर पाएंगे।

Migration Certificate Online Apply कैसे करें?

  1. Migration certificate online apply करने के लिए सबसे पहले आपको अपने state के migration website पर जाना होगा। इसके लिए आपको google में search करना है ‘state’ migration certificate. 

इसमें state की जगह पर आपको अपना राज्य डालना है जैसे अगर आप उत्तर प्रदेश में रहते हैं तो आपको google में search करना है UP migration certificate. यहाँ पर हम आपको maharashtra migration certificate apply करना सिखाएंगे।

इसके लिए सबसे पहले आपको आपले सरकार की website पर जाना है।

  1. यहाँ पर आपको New user पर click करना है।
  1. अब आपको आपकी screen पर 2 options दिखेंगे – option 1 और option 2. Option 1 आसान है क्योंकि इसमें आपका mobile number OTP से verify हो जाएगा और इसमें आपको ज्यादा कुछ करने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

Option 2 में आपको सब details खुद से भरनी होंगी जैसे – photo, identity proof, address proof आदि। इसमें से आपको अपने हिसाब से किसी भी एक option को चुनना है। आसानी के लिए हम यहाँ पर 1st option को चुन रहे हैं।

  1. Option 1 को select करने के बाद अब आपको अपनी details डालनी होंगी जैसे अपना district, phone number, phone number पर प्राप्त OTP और अपना नया username डालना होगा।
Enter your details
  1. ये सब details डालने के बाद अब next step में आपको अपना ID और password बनाना होगा। यहाँ पर आपको बस अपना ID और password डालना है और उसके बाद register पर click करना होगा और अब आपका account बन जाएगा।
  1. अब आपको ऊपर right की तरफ login now पर click करना है। अब आपको higher education select करना होगा।
  1. अब आपको Migration certificate application form में अपनी details भरनी होंगी जैसे – year of passing, institutional details आदि।
  1. इसके बाद आपको I agree के checkbox पर click करना है और उसके बाद save details पर click करना है। अब आपको कुछ और documents attach करनी हैं और कुछ और details भरनी हैं जैसे – passport size photo, full name, address, district आदि।
  1. इसके बाद आपको payment करनी होगी। Payment करने के लिए आपको payment option को select करना होगा। इसमें आप internet banking या debit card से payment कर सकते हैं।

Payment करने के बाद आपका migration certificate successfully apply हो जाएगा और कुछ दिनों में आपको मिल जाएगा।

Migration Certificate से सम्बंधित कुछ सवाल

Migration Certificate Apply करने की Fees कितनी है?

Migration certificate को apply करने की fees 300 रुपये तक हो सकती है।

Migration Certificate मिलने में कितना समय लगता है?

Migration certificate 15 से 21 दिन में मिल जाता है।

Migration Certificate को हिंदी में क्या कहते हैं?

Migration certificate को हिंदी में प्रवास प्रमाणपत्र कहते हैं।

Migration Certificate की क्या जरूरत होती है?

एक college से दूसरे college, एक university से दूसरी university या एक board से दूसरे board में जाने के लिए migration certificate की आवश्यकता पड़ती है और इसलिए migration certificate जरूरी होता है।

निष्कर्ष

इस article में हमने Migration certificate से सम्बंधित संपूर्ण जानकारी दे दी है जैसे – Migration Certificate क्या होता है, Migration Certificate कितने प्रकार के होते हैं, Migration Certificate को online apply कैसे करते हैं आदि।

हम उम्मीद करते हैं की आपको ये article पसंद आया होगा और इसमें दी गयी जानकारी आपको useful लगी होगी। अगर आपको ये article useful लगा हो तो इसे अपने दोस्तों के साथ share जरूर करें।

अगर आप Migration Certificate से सम्बंधित हमसे कोई सवाल पूछना चाहते हैं तो निचे comment कर सकते हैं।

Email में CC और BCC क्या होता है ? ईमेल में CC और BCC का उपयोग कैसे करे ?

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email me cc aur bcc kya hota hai

क्या आपके भी मन में यह सवाल बार बार आता है की Email में CC और BCC क्या होता है ? अगर हाँ तो आप बिलकुल सही जगह पर आये है क्योंकि आज के इस आर्टिकल में आप जानेंगे की Email में CC और BCC का मतलब क्या होता है , Email में CC और BCC का उपयोग कैसे करे और CC और BCC में क्या अंतर होता है .

दोस्तों इंटरनेट की इस दुनिया में ईमेल का उपयोग आजकल कौन नहीं करता , जब भी हम कोई नया स्मार्टफोन खरीदते है उस वक़्त हमे नया ईमेल बनाना ही पड़ता है या फिर हमारे पुराने email id को login करना पड़ता है क्योंकि बिना Email के किसी भी स्मार्टफोन में हम Playstore नहीं चला सकते है और प्लेस्टोर के बिना हम अपने फ़ोन में अपने पसंदीदा एप्प्स इनस्टॉल नहीं कर पाते है.

कई बार हम जब किसी को ईमेल सेंड करने जाते है तो हमे वहा पर अलग अलग options दिखाई देते है खासतौर पर CC और BCC . ज्यादातर Users को इसके बारे में पता नहीं होता है की दरअसल यह CC और BCC क्या होता है इसलिए मैंने सोचा की आज के इस आर्टिकल के माध्यम से आपको CC और BCC के बारे में बता दूँ .

अगर आप Email में CC और BCC क्या होता है ? यह जानना चाहते है तो इस आर्टिकल के साथ अंत तक बने रहिये क्योंकि इसमें आपको ऐसी ऐसी बातों का पता लगेगा जिसके बारे में शायद आपको नहीं पता होगा तो चलिए शुरू करते हमारा आज का आर्टिकल .

Email में CC और BCC क्या होता है ?

cc and bcc explain in hindi

ईमेल में CC का मतलब होता है Carbon Copy , जबकि BCC मतलब होता है Blind Carbon Copy. यह दोनों भी ईमेल के काफी महत्वपूर्ण घटक है . चलिए विस्तार से जानते है CC और BCC के बारे में .

ईमेल में CC क्या होता है (What is CC in Email)

CC का मतलब होता है Carbon Copy . इसका इस्तेमाल तब किया जाता है जब किसी यूजर को एक साथ २ या २ से अधिक लोगों को ऐसा ईमेल भेजना होता है जो सबको तो मिले लेकिन साथ में बाकि के सभी लोगों को पता चले की किस किस के पास वह ईमेल भेजी गयी है . इसलिए CC का ज्यादातर उपयोग बड़ी बड़ी कंपनियों में किया जाता है या फिर ऐसी जगहों पर इसका उपयोग होता है जहा पर लोग एकसाथ मिलकर टीम में काम करते है .

इसके नाम से ही आप समझ सकते है की इसका काम क्या है CC का नाम होता “कार्बन कॉपी” मतलब एक ही ईमेल की कॉपी आप कितने भी लोगों को एक साथ भेज सकते है , इसलिए इसका उपयोग तभी करते है जब ईमेल की कॉपी एकसाथ कई लोगों को भेजनी होती है और सभी को पता चले की किसी-किस को ईमेल मिली है .

CC को आप इस उदहारण से आसानी से समझ सकते है (What is CC in Email Example in Hindi) –

मान लीजिये एक कंपनी में 4 कर्मचारी काम करते है जिनका नाम है A , B , C , D और उनका एक बॉस है , अब lockdown की वजह से सभी कर्मचारी A , B , C , D अपने अपने घरों से Online काम कर रहे है ऐसे में इनके बॉस को इन चारों कर्मचारियों को एक महत्वपूर्ण ईमेल भेजना है ..

एक ऐसा ईमेल जो सभी चारों कर्मचारियों को तो मिलेगा ही साथ में हर एक कर्मचारी को यह भी पता लगना चाहिए की बॉस ने अन्य कर्मचारियों को भी यह ईमेल भेजा है मतलब कर्मचारी A को पता चलेगा की B , C , D भी यह ईमेल गया है , कर्मचारी B को भी पता चलेगा की यह ईमेल A ,C , D को मिला है इसी प्रकार सभी को पता चलेगा की यह ईमेल सबको मिला है अगर इस प्रकार का ईमेल बॉस अपने कर्मचारियों को भेजना चाहे तब वो ईमेल में दिए गए CC का उपयोग करेगा .

ईमेल में BCC क्या होता है (What is BCC in Email)

BCC का मतलब होता है Blind Carbon Copy , इसका इस्तेमाल तब किया जाता है जब कोई यूजर 2 से अधिक लोगों को ईमेल भेजता है लेकिन सभी से ईमेल लिस्ट को छुपाता , मतलब जब आप एक साथ कई लोगों को ईमेल भजते है लेकिन चाहते है की ईमेल लिस्ट का किसी को भी पता नहीं लगे यानि यह Same ईमेल किस किस को भेजा गया है इसे छुपाने के लिए ईमेल में BCC का उपयोग किया जाता है .

CC की तरह ही BCC का अर्थ भी इसी के नाम में छुपा हुआ है BCC का मतलब होता है “ब्लाइंड कार्बन कॉपी” मतलब आप इसमें एकसाथ कई लोगों को ईमेल भेज सकते है और सबसे ईमेल की कॉपी भी छुपा सकते है . जिन लोगों को आप BCC से ईमेल भेजेंगे उनको पता नहीं चलेगा की आपने किन किन लोगों को यह Same ईमेल भेजा है .

To , CC और BCC में क्या अंतर है ?

TOCCBCC
ईमेल में कांटेक्ट करने का यह प्राथमिक विकल्प है , आमतौर पर इसका उपयोग सबसे ज्यादा किया जाता है .ईमेल में कांटेक्ट (Secondary) करने का यह माध्यमिक विकल्प है .ईमेल में तृतीयक (Tertiary) करने का यह माध्यमिक विकल्प है .
व्यक्तिगत या एकाधिक संपर्कों को ईमेल करने के लिए उपयोग किया जाता हैव्यक्तिगत या एकाधिक संपर्कों को ईमेल करने के लिए इसका उपयोग होता है .व्यक्तिगत या एकाधिक संपर्कों को ईमेल करने के लिए इसका उपयोग होता है .
ईमेल एड्रेस सभी के द्वारा देखे जा सकते हैंईमेल एड्रेस सभी के द्वारा देखे जा सकते हैंईमेल एड्रेस केवल सेन्डर द्वारा देखे जा सकते हैं

अंतिम शब्द

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Cryptocurrency क्या है? Cryptocurrency काम कैसे करती है?

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Cryptocurrency in hindi

आज इस article में हम एक बहुत ही प्रचलित विषय के बारे में बात करने वाले हैं। आज हम आपको इस article के माध्यम से Cryptocurrency के बारे में बताने वाले हैं।

Cryptocurrency के बारे में सुना तो सब ने है लेकिन इसके बारे में जानकारी बहुत कम लोगों को है। Cryptocurrency के पीछे लगभग आधी से ज्यादा दुनिया पागल है।

हर कोई आज Cryptocurrency में invest करना चाहता है ताकि वो अधिक पैसे कमा सके। अगर आप Cryptocurrency के बारे में संपूर्ण जानकारी हासिल करना चाहते हैं तो ये article आपको अंत तक जरूर पढ़ना चाहिए।

इस article को पढ़ने के बाद आपको Cryptocurrency के बारे लगभग हर एक चीज़ के बारे में पता चल जाएगा। इस article में हम आपको बताएंगे की Cryptocurrency क्या है, Cryptocurrency काम कैसे करती है, इसके फायदे और नुक्सान क्या हैं आदि।

तो Cryptocurrency के बारे में सब कुछ जानने के लिए इस article को अंत तक ध्यान से पढ़ें।

Cryptocurrency क्या है?

Cryptocurrency एक प्रकार की currency है लेकिन ये physical currency नहीं है। Cryptocurrency एक digital currency है जिसकी वजह से इसे digital currency भी कहते हैं।

Cryptocurrency का इस्तेमाल करके products को खरीदा जा सकता है। ऐसे कई platforms हैं जहाँ पर आप cryptocurrency का इस्तेमाल करके products या services को खरीद सकते हैं।

Cryptocurrency में देश की सरकार की कोई भी भूमिका नहीं होती है और cryptocurrency की व्यवस्था बिना सरकार या banks को बताये की जा सकती है और की जाती है जिसके कारण काफी लोगों का ऐसा मानना है की cryptocurrency का गलत इस्तेमाल किया जा सकता है।

Cryptocurrencies में Cryptography का इस्तेमाल किया जाता है। Cryptography एक ऐसा तरीका है जिसकी मदद से information और communication को कुछ codes की मदद से protect किया जाता है ताकि इसे सिर्फ वो ही लोग इसे देख और process सकें जिसके लिए ये जानकारी बनाई गयी है। Cryptography में Crypto का मतलब hidden या vault होता है और graphy का मतलब writing होता है।

Cryptocurrency एक peer-to-peer electronic system है जिसका इस्तेमाल online यानी internet के माध्यम से payment करने के लिए और कुछ खरीदने के लिए किया जाता है।

Peer to peer trading एक ऐसी trading होती है जिसमे cryptocurrencies का खरीदना और बेचना directly users के बीच में होता है बिना किसी third party के।

Cryptocurrency के प्रकार

आज के समय में कई अलग-अलग प्रकार की cryptocurrencies market में आ चुकी हैं। 2021 में पूरी दुनिया में लगभग 6000 cryptocurrencies मौजूद हैं।

लेकिन इनमे से बहुत कम ऐसी cryptocurrencies हैं जो की बहुत मशहूर हैं और जिनमे लोग invest करना चाहते हैं और invest करते हैं।

निचे हमने दुनिया की 10 सबसे मशहूर cryptocurrencies के बारे में विस्तार से बताया है।

  1. Bitcoin – Bitcoin सबसे मशहूर cryptocurrency है क्योंकि ये दुनिया की सबसे पहले cryptocurrency है। Bitcoin को BTC के नाम से भी जाना जाता है। Bitcoin का आविष्कार Satoshi Nakamoto ने सन 2009 में किया था। Bitcoin का इस्तेमाल करके आप कुछ online platforms से खरीदारी कर सकते हैं। Bitcoin सबसे मशहूर और सबसे पुरानी cryptocurrency है। Bitcoin एक decentralized cryptocurrency है। Decentralized का मतलब होता है जो की एक office या authorities के बजाये कई सारे offices और authorities से control किया जाए।
  1. Ethereum – Ethereum दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी cryptocurrency है और ये Bitcoin के बाद launch हुआ था। Ethereum को ETH भी कहते हैं। Ethereum का आविष्कार Vitalik Buterin ने किया था और ये 30 July 2015 में launch हुआ था। Ethereum smart contract functionality के साथ एक decentralized open source blockchain cryptocurrency है। Ethereum सबसे ज्यादा use होने वाली blockchain है।
  1. Litecoin – Litecoin एक peer-to-peer और open-source software cryptocurrency है जो की license MIT/X11 के तहत जारी किया गया था। Litecoin को LTH के नाम से भी जाना जाता है। Bitcoin का आविष्कार Charlie Lee ने किया था। Litecoin एक early bitcoin spinoff या altcoin था। Litecoin की शुरुआत साल 2011 में हुई थी। Technical details की बात करें तो Litecoin काफी हद तक Bitcoin जैसा ही है।
  1. Tether – Tether एक controversial cryptocurrency है जिसमे Tether limited द्वारा tokens दिए जाते हैं जो की बदले में Bitfinex के मालिकों द्वारा नियंत्रित किया जाता है। Tether को USDT के नाम से भी जाना जाता है। इसका आविष्कार Brock Pierce, Craig Sellars और Reeve Collins ने किया था जिसे असल में Realcoin के नाम से जाना जाता है। इसका आविष्कार July 2014 में किया गया था।
  1. Cardano – Cardano एक public blockchain platform है। ये open-source decentralized है जिसमे हिस्सेदारी के proof का इस्तेमाल करके आम सहमति प्राप्त की गई है। यह अपने internal cryptocurrency ADA के साथ peer-to-peer transactions की सुविधा को प्रदान कर सकता है। Cardano को ADA के नाम से भी जाना जाता है। Cardano का आविष्कार Charles Hoskinson द्वारा किया गया था। इसका आविष्कार साल 2017 में किया गया था।
  1. Dogecoin – Dogecoin एक cryptocurrency है जिसका आविष्कार दो software engineers द्वारा किया गया है जिनके नाम हैं – Billy Markus और Jackson Palmer. Dogecoin की लोकप्रियता तब ज्यादा बढ़ गयी जब दुनिया के सबसे अमीर आदमी Elon Musk ने इसके बारे में tweet किया। Elon Musk के tweet करने के बाद ये बहुत ज्यादा प्रसिद्ध हो गया था और इसका price दिन-प्रतिदिन बढ़ने लगा था। Dogecoin को DOGE के नाम से भी जाना जाता है। ये 6 दिसंबर 2013 को release हुआ था।
  1. XRP – XRP Ripple नाम की company के founders द्वारा बनाई गई है। XRP एक digital technology और payment processing company है। XRP का इस्तेमाल करके अलग-अलग currencies को exchange कर सकते हैं, साथ ही fiat currencies और अन्य बड़ी cryptocurrencies को भी exchange कर सकते हैं। XRP का अविष्कार 2012 में किया गया था। XRP का आविष्कार Chris Larsen और Jed McCaleb द्वारा किया गया था।
  1. Dash – Dash एक open -source cryptocurrency है। ये एक altcoin है जिसे bitcoin से फर्क किया गया था। यह एक decentralized autonomous organization है जो की अपने subset of users द्वारा चलाई जाती है जिसे masternodes कहते हैं। Dash का आविष्कार 18 January 2014 में किया गया था और इसका आविष्कार Evan Duffield द्वारा किया गया था।
  1. Peercoin – Peercoin को PPCoin या PPC भी कहा जाता है। PPC एक peer-to-peer cryptocurrency है जो की proof-of-stakes और proof-of-work systems दोनों का इस्तेमाल करती है। Peercoin bitcoin के framework पर आधारित है। Peercoin साल 2012 में launch किया गया था। Peercoin का आविष्कार Sunny King द्वारा किया गया था।
  1. Monero – Monero एक decentralized cryptocurrency है। यह privacy बढ़ाने वाली technologies के साथ public distributed ledger का इस्तेमाल करता है गुमनामी और प्रतिरूपता को करने के लिए लेन-देन को बाधित करता है। Monero April 2014 में launch हुआ था। और इसका आविष्कार Nicolas Van Saberhagen द्वारा किया गया था।

Top Cryptocurrencies

अब हम आपको दुनिया की सबसे मशहूर cryptocurrencies के नाम बताएंगे।

  1. Bitcoin (BTC)
  2. Ethereum (ETH)
  3. XRP (XRP)
  4. Stellar (XLM)
  5. Cardano (ADA)
  6. Dogecoin (DOGE)
  7. Polkadot (DOT)
  8. Neo (NEO)
  9. Celsius (CEL)
  10. Nano (NANO)
  11. Chainlink (LINK)
  12. Monero (XMR)
  13. Tether (USDT)
  14. Litecoin (LTC)
  15. Binance Coin (BNC)
  16. NEM (XEM)
  17. TRON (TRX)
  18. Dash (DASH)
  19. Zcash (ZEC)
  20. Bitcoin Gold (BTG)
  21. Bitcoin Cash (BCH)
  22. Bitcoin SV (BSV)
  23. EOS (EOS)
  24. VeChain (VET)
  25. Dai (DAI)

Cryptocurrency काम कैसे करती है?

Cryptocurrency का काम होता है एक computer से दूसरे computer पर पैसे transfer करना। इस काम को करने के लिए blockchain technology का इस्तेमाल किया जाता है।

Cryptocurrency bank की तरह काम करती है और इसमें भी लेन-देन किया जाता है। हालांकि इसमें bank या government की कोई भी भूमिका नहीं होती है। लेन-देन का पूरा हिसाब-किताब blockchain में सुरक्षित रहता है जिससे धोखा-धड़ी की संभावना काफी कम हो जाती है।

इस technology की निगरानी और जांच कुछ लोगों द्वारा बहुत powerful computers की मदद से रखी जाती है। इस process को cryptocurrency की mining कहते हैं।

जो cryptocurrency की mining और जांच करते हैं उन्हें miners कहा जाता है।

अब आप सकोह रहे होंगे की miners cryptocurrency की mining किस तरह करते होंगे। तो हम आपको बता दें की cryptocurrency की mining करने के लिए उन्हें एक code प्राप्त होता है और ये code उन्हें तभी प्राप्त होता है जब वे उनके सामने प्रस्तुत होने वाले maths के question को सही solve कर देते हैं।

इन सब process के बाद cryptocurrency की mining पूरी हो जाती है और इसके बाद cryptocurrency को exchange करने के बारी आती है जिसमे cryptocurrency को एक खाते से दूसरे खाते में transfer किया जाता है।

आज के समय में Cryptocurrency को exchange करने के लिए कई सारे platforms मौजूद हैं जिनके बारे में हमने निचे बताया है।

Cryptocurrency में Invest कहाँ से करें?

Cryptocurrency में invest या खरीदने या बेचने के लिए आप निचे दिए गए platforms का इस्तेमाल कर सकते हैं।

  1. WazirX
  2. Zebpay
  3. Unocoin
  4. Coin Switch
  5. CoinDCX

Cryptocurrency का लाइव मार्किट रेट देखे

यह टेबल क्रिप्टो संपत्तियों को प्रदर्शित करता है और फिर उन्हें उनके बाजार पूंजीकरण द्वारा क्रमबद्ध करता है

Cryptocurrency के फायदे

  1. Cryptocurrency में fraud होने की संभावना बहुत कम हो गयी है।
  2. जैसा की ऊपर हमने आपको बताया की इसमें Cryptography नाम की technology का इस्तेमाल किया जाता है जिसके कारण इसमें अलग-अलग algorithms का इस्तेमाल किया होता है जिससे आपका account काफी secure रहता है।
  3. इसमें invest करके आप बहुत अच्छे returns पा सकते हैं और पैसे कमा सकते हैं।
  4. इसका इस्तेमाल online कुछ भी खरीदते समय payments करने के लिए किया जा सकता है।
  5. Cryptocurrency normal digital payments से कई ज्यादा secure होती हैं।
  6. दूसरे payment options के मुकाबले इसमें transaction fees बहुत कम लगती है।

Cryptocurrency के नुकसान

  1. एक बार cryptocurrency से transaction करने के बाद उसे reverse कर पाना बहुत कठिन होता है।
  2. अगर आपकी Wallet ID खो जाती है तो उसे वापस पाने का कोई भी रास्ता नहीं है। ऐसे में आपका wallet और उसमे मौजूद सभी पैसे हमेशा के लिए खो जाएंगे।
  3. Cryptocurrency decentralized होती है यानी इसमें bank या देश की सरकार की कोई भी भूमिका नहीं होती है। तो अगर cryptocurrency में आपके साथ कोई भी fraud होता है तो इसके लिए केवल आप जिम्मेदार होंगे।

Cryptocurrency से सम्बंधित कुछ सवाल

Cryptocurrency की शुरुआत कब हुई थी?

Cryptocurrency की शुरुआत 2008 में हुई थी।

Cryptocurrency की खोज किसने की थी?

Cryptocurrency की खोज Satoshi Nakamoto ने की थी।

क्या Cryptocurrency Legal है?

Cryptocurrency legal है या नहीं ये तो अलग-अलग देश के क़ानून पर निर्भर करता है। और देश की cryptocurrency के बारे में अलग-अलग मान्यता है। लेकिन अगर हम अपने भारत देश के बारे में बात करें तो यहाँ पर cryptocurrency illegal नहीं है।

निष्कर्ष

इस article में हमने Cryptocurrency से सम्बंधित सभी जानकारी दे दी है। Cryptocurrency में invest करना एक अच्छा option है लेकिन तब जब आपको इसके बारे में पूरी जानकारी हो।

अगर आप cryptocurrency में ध्यान से सब कुछ calculate करके पैसे invest करते हैं और patience रखते हैं तो इसमें से आपको अच्छे returns मिल सकते हैं।

अगर आपने ये article पूरा पढ़ा है तो आपको Cryptocurrency के बारे में सब कुछ समझ में आ गया होगा और पता चल गया होगा की Cryptocurrency क्या है

हम उम्मीद करते हैं की आपको ये article पसंद आया होगा। अगर आपको ये article उपयोगी लगा हो तो इसे अपने दोस्तों के साथ share जरूर करें ताकि उन्हें भी cryptocurrency के बारे में जानकारी मिल सके।

अगर आप हमसे cryptocurrency से सम्बंधित कोई सवाल पूछना चाहते हैं तो निचे comment कर सकते हैं।

विद्युत (Electricity) क्या है | Current in Hindi

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Electricity kya hai

दोस्तों आज इस article में हम जानेंगे की Electricity क्या है। Electricity यानी बिजली का इस्तेमाल तो हर कोई कर रहा है लेकिन बहुत कम लोग हैं जिन्हे पता है की Electricity असल में क्या होती है।

इस article में हम आपको Electricity से सम्बंधित संपूर्ण जानकारी देने वाले हैं। इस article को पढ़ने के बाद आपको Electricity से सम्बंधित सब कुछ पता चल जाएगा जैसे – Electricity क्या होती है, कितने प्रकार की होती है, Electricity के फायदे और नुक्सान क्या हैं, Electricity बनती कैसे है आदि।

Electricity के बारे में सारी जानकारी हासिल करने के article को अंत तक जरूर पढ़ें।

Electricity क्या है?

आसान शब्दों में कहा जाए तो Electricity एक ऐसी ऊर्जा है जिसकी मदद से light, heat और power को generate किया जा सकता है। Electricity से power generate करके machines से कोई भी काम करवाया जा सकता है।

इस दुनिया में हर वस्तु molecules से मिलकर बनी है। Molecules छोटे-छोटे atoms से मिलकर बने होते हैं और atoms तीन parts से मिलकर बने होते हैं जो की हैं protons, neutrons और electrons.

Protons पर positive charge होता है इसलिए protons positive होते हैं, neutrons पर कोई charge नहीं होता है इसलिए neutrons neutral होते हैं और electrons पर negative charge होता है जिसकी वजह से electrons negative होते हैं।

Atom के बीच (केंद्र) में atom का nucleus होता है जिसमे protons और neutrons होते हैं। जबकि electrons atom की orbit में लगातार revolve करते रहते हैं।

Atom में कुछ electrons free होते हैं जो की किसी conductor के through move करते हैं। Conductor के through electrons की movement को current कहते हैं।

Current की वजह से जो light, heat या power पैदा होती है उसे Electricity कहते हैं। आज के समय में हम अपने जीवन को बिजली के बिना imagine नहीं कर सकते हैं। बिजली हमारी रोजमर्रा की जरूरत बन गयी है।

Electricity के प्रकार

Electricity 2 प्रकार की होती है। पहली Static electricity और दूसरी Dynamic electricity. हम आपको electricity के दोनों प्रकार के बारे में विस्तार से बताएंगे।

  1. Static Electricity – Static electricity, material के अंदर या material के surface पर एक तरह का असंतुलन होता है। Static electricity का charge तब तक बना रहता है जब तक की वह electrical discharge या electrical current के माध्यम से दूर जाने में सक्षम न हो।

Static electricity को एक जगह से दूसरी जगह transfer नहीं किया जा सकता है। Static electricity दो चीज़ों को रगड़ने से या friction के कारण produce होती है। जो electricity friction या रगड़ के कारण produce होती है उसे Static electricity कहते हैं।

Static Electricity निचे बताये गए तरीकों से बनती है।

  1. कभी-कभी बालों में कंघी करते समय कंघी की मदद से बाल हवा में खड़े होने लगते हैं जिसका कारण static electricity होती है।
  2. बड़ी-बड़ी Industries में material घुमाते समय static electricity generate हो जाती है।
  1. Dynamic Electricity – Dynamic electricity उसे कहते हैं जिसमे charge conductor के through flow करता है। दूसरे शब्दों में Dynamic electricity को electric current भी कहते हैं।

Dynamic electricity को एक जगह से दूसरी जगह पर ले जाया जा सकता है। घरों में और हर जगह पर dynamic electricity का इस्तेमाल ही किया जाता है।

Dynamic electricity को Nuclear power station, Thermal power station, Hydraulic power station, Solar power station, Wind power station की मदद से बनाया जाता है।

Dynamic electricity दो प्रकार की होती है जिनके बारे में निचे बताया गया है।

  1. Direct Current (DC) – Direct current उस current को कहते हैं जो सिर्फ एक ही दिशा में flow करता है और अपनी दिशा बदलता नहीं है। एक Electrochemical cell जैसे battery Direct current का सबसे अच्छा उदाहरण है। Direct current conductors में तो flow करता ही है लेकिन ये semi-conductors और insulators में भी flow कर सकता है।
  1. Alternating Current (AC) – Alternating current वो होता है जो एक दिशा में flow नहीं करता है अपनी दिशा लगातार बदलता रहता है। Alternating current का इस्तेमाल ज्यादा करा जाता है। घर में हम जिस current का इस्तेमाल करते हैं वो Alternating current होता है।

Electricity का महत्व

वैसे तो बिजली या electricity का महत्व बताने की कोई जरूरत नहीं है लेकिन फिर भी हम कल्पना करते हैं की अगर हमें बिना बिजली के जीवन व्यतीत करना पड़े तो कैसा होगा।

आज हमारी आदत ऐसी हो गयी है की अगर कुछ समय के लिए भी बिजली कट जाती है तो हमारे लिए बिना बिजली के समय निकालना कठिन हो जाता है।

आज का वातावरण इतना खराब हो गया है की बिना AC या coolers के रहना कठिन है। AC और coolers जैसी machines को चलाने के लिए बिजली की आवश्यकता होती ही है। बिना बिजली के ये सब machines काम नहीं करेंगी।

ऐसे में आज के वातावरण में बिना AC या coolers के रहना किसी के लिए भी बहुत कठिन है। जिस प्रकार Global warming बढ़ती जा रही है उस प्रकार आज AC शौंक या trend से ज्यादा लोगों की जरूरत बन चूका है।

आज घर की सफाई करने के लिए भी हम Vacuum cleaners जैसी machines का इस्तेमाल करते हैं जिसे चलाने के लिए भी electricity की आवश्यकता होती है।

पानी को साफ़ करके पिने के लिए आज RO purifiers का इस्तेमाल किया जा रहा है जिसे चलाने के लिए बिजली अनिवार्य है।

Smartphones, Laptops आदि devices को charge करने के लिए भी बिजली ही चाहिए होती है। और सबसे जरूरी आवश्यकता जो हमारे जीवन की है वो है रौशनी। अंधकार में जीवन व्यतीत करना बहुत कठिन होता है। इसलिए सबसे जरूरी आवश्यकता जो है वो light यानी रौशनी है जो की हमें बिजली के कारण प्राप्त होती है।

आज बिजली हमारे जीवन का अभिन्न हिस्सा बन चुकी है। बिजली की मदद से आज हम ऐसी machines और devices का इस्तेमाल कर रहे हैं जिसे हम अपनी रोज़ की ज़िन्दगी में इस्तेमाल करते हैं।

बिजली के बिना जीवन की संभावना करना बहुत कठिन है। बिजली के बिना जीवन व्यतीत करने की कल्पना मात्र से डर लगता है।

Electricity बनती कैसे है?

Electricity बनने के कई तरीके हैं। निचे हमने बिजली बनाने के हर तरीके के बारे में विस्तार से बताया है जिसे पढ़कर आपको पता चल जाएगा की बिजली किन-किन तरीकों से बनाई जाती है।

Turbine

Turbine

Turbine की मदद से बिजली बनाने के लिए बहुत सारे पानी की आवश्यकता होती है। Turbine एक प्रकार की बड़ी motor होती है जो की पानी की मदद से बिजली उत्पन्न करती है।

बड़ी-बड़ी नदियों में जिनमे बहुत सारा पानी होता है उन पर dam बनाकर पानी को एक जगह पर जमा किया जाता है। और जहाँ पर पानी जमा किया जाता है उसके ठीक निचे एक बड़ी turbine लगाई जाती है।

पानी को जमा करने का स्थान निचे रखी turbine से बहुत ऊपर होता है। और ऐसा इसलिए किया जाता है क्योंकि turbine को घुमाने के लिए पानी की बहुत रफ़्तार की जरूरत होती है।

बहुत सारे पानी को जब बहुत ऊंचे स्थान से निचे रखी turbine पर छोड़ा जाता है तो पानी की speed और pressure की वजह से turbine बहुत तेज घूमती है। Turbine से एक generator जुड़ा होता है और turbine घूमने के कारण वो generator बिजली produce करता है।

बिजली produce होने के बाद बिजली को power house में store किया जाता है और उसके बाद transmission lines की मदद से बिजली को अलग-अलग स्थानों पर transmit किया जाता है यानि आगे भेजा जाता है। 

इस तरह turbine की मदद से बिजली बनाई जाती है।

Nuclear Power

Nuclear Power

Nuclear power से बिजली बनाना बहुत खतरनाक होता है क्योंकि इसमें nuclear reactors जैसे – Uranium का इस्तेमाल किया जाता है। Uranium बहुत खतरनाक nuclear reactor element होता है।

Nuclear reactor से बिजली उत्पन्न करने के लिए सबसे पहले Uranium को seal बंद metal cylinder में एक बहुत ही ठोस steel capsule में रखा जाता है।

उसके बाद Uranium atoms पर neutrons को fire किया जाता है जिससे वो विभाजित हो जाते हैं और और भी अधिक neutrons को release करते हैं। इस प्रक्रिया को chain reaction कहते हैं।

Produced neutrons और atoms को hit करते हैं जिससे वे और भी ज्यादा विभाजित हो जाते हैं और इस प्रकार chain reaction की प्रक्रिया लगातार चलती रहती है। इस chain reaction की प्रक्रिया में बहुत ज्यादा heat पैदा होती है।

Heat बनने के बाद water को reactor vessel से pass करा जाता है जिसमे chain reaction के कारण तापमान 300°C होता है। Power station के काम करने के लिए पानी का liquid form में रहना जरूरी है। तो पानी को liquid form में रखने के लिए और उसे boil या evaporate होने से रोकने के लिए pressuriser उस पर 155 गुना atmospheric pressure लगाता है।

इसके बाद एक coolant pump hot pressurised water को reactor vessel से steam generator के माध्यम से circulate करता है।

ये hot, pressurised पानी हज़ारों looped pipes में से बहता है और पानी की एक दूसरी धारा pipe के बहार से बहती है। ये पानी बहुत कम pressure में होता है, इसलिए pipes से निकलने वाली गर्मी इसे उबाल देती है और भाप में परिवर्तित कर देती है।

अब ये produced steam यानी भाप कई turbines से pass होती है जिसके कारण turbines घूमती हैं। Turbine के घूमने से steam की heat energy mechanical energy में परिवर्तित हो जाती है।

Turbine से एक shaft जुड़ा होता है जो की आगे एक generator से जुड़ा होता है और shatft एक minute में 3000 revolutions से घूमता है। इसके बाद generator electromagnetic field का इस्तेमाल करके mechanical energy को electrical energy में परिवर्तित कर देता है।

Electrical energy बनने के बाद electricity national grid में जाती है जहाँ पर electrical energy को national grid के हिसाब से high voltage में परिवर्तित किया जाता है। और इसके बाद अंत में transmission lines के जरिये बिजली घरों और अन्य स्थानों तक पहुंचाई जाती है।

इस तरह nuclear power से electricity बनाई जाती है।

GeoThermal Power

GeoThermal Power

ये तो सब जानते हैं की धरती अंदर से बहुत गर्म है। अगर हम एक गड्ढा खोदते हैं और लगातार खोदते जाते हैं तो जैसे-जैसे गड्ढा गहरा होता जाएगा वैसे-वैसे temperature भी बढ़ता जाएगा।

और गड्ढा खोदते समय temperature इसलिए बढ़ता क्योंकि हम धरती के core की तरफ बढ़ते हैं जो की बहुत गर्म होता है। इसलिए जैसे-जैसे हम धरती के core की तरफ बढ़ते जाएंगे वैसे-वैसे तापमान भी बढ़ता जाएगा। और इस तापमान को ही GeoThermal energy कहते हैं।

GeoThermal power धरती के अंदर मौजूद गर्मी को कहते हैं और इससे पैदा होने वाली बिजली को GeoThermal energy या GeoThermal electricity कहते हैं।

अब हम आपको बताएंगे की GeoThermal energy बनती कैसे है।

सबसे पहले गर्म पानी high pressure में ज़मीन के निचे से कुँए के ज़रिये निकाला जाता है। जब पानी धरती की सतह पर आता है तो pressure कम हो जाता जिसके कारण पानी भाप में बदल जाता है।

इसके बाद भाप turbine को घुमाती है जो की एक generator से connect होती है। Turbine के घूमने से बिजली produce होती है और घरों और अन्य स्थलों तक पहुँचती है।

इसके बाद भाप एक cooling tower में चली जाती है जहाँ पर वो पानी में परिवर्तित हो जाती है।  ये प्रक्रिया दुबारा करने के लिए steam से परिवर्तित पानी को वापस धरती में भेज दिया जाता है।

इस तरह geothermal energy produce करी जाती है।

Wind Power

Wind Power

हवा से बनाने वाली ऊर्जा को Wind power या wind energy कहते हैं। हवा से electricity बनाने के लिए बहुत बड़े-बड़े खम्बों पर पंखे लगे होते हैं। इन बड़े-बड़े खम्बों को Wind Mills कहते हैं।

Wind Mills बड़ी-बड़ी और खाली जगहों पर लगाए जाते हैं जैसे – रेगिस्तान आदि। क्योंकि खाली जगहों पर हवा अच्छी चलती है और Wind mills के पंखे अच्छी तरह से घुमते है।

Wind Mill में एक बहुत बड़ा खम्बा होता है जिसके top पर एक बड़ा पंखा लगा होता है। और windmill के अंदर छोटा सा generator होता है जो की windmill के पंखे से से जुड़ा होता है।

हवा चलने पर windmill  घूमता है windmill के घूमने से generator के अंदर electricity produce होती है। इसके बाद ये electricity power house में जाती है और वहां से अलग-अलग कामो के लिए काम में ली जाती है। इस तरह Windmill से electricity produce करी जाती है।

Biomass

Biomass

Biomass का मतलब होता है natural substances से energy को produce करना। Biomass से energy बनाने के लिए natural substances जैसे – गोबर, पेड़-पौधे आदि का इस्तेमाल किया जाता है।

एक boiler में पानी डाला जाता है और boiler को जलाने के लिए गोबर, पेड़-पौधे आदि पदार्थों का इस्तेमाल किया जाता है। Boiler में पड़ा पानी भाप बन जाता है जिसके बाद वो turbine को घुमाता है और turbine एक generator से connect होता है।

Turbine के घूमने से generator में बिजली पैदा होती है और उसके बाद इस बिजली का इस्तेमाल कई काम करने के लिए किया जाता है। इस तरह Biomass से बिजली बनाई जाती है।

Electricity के फायदे

  1. Electricity हमें अँधेरे में रौशनी और ठंडी में गर्मी देती है।
  2. Electricity power को भी generate करती है जिसका इस्तेमाल करके हम कई machines का इस्तेमाल करके अपने जीवन को आसान बनाते हैं जैसे – washing machine, vacuum cleaner, fan आदि।
  3. Electricity का इस्तेमाल करके हम अपने रोज़ इस्तेमाल होने वाले devices को charge करते हैं जैसे – smartphones, laptops आदि।

Electricity के नुक्सान

  1. Electricity में बहुत तेज current होता है जिसकी वजह से कभी-कभी बहुत तेज current लग जाता है और कुछ लोगों की मौत हो जाती है।
  2. Electricity कभी-कभी हमारे devices और machines को नुक्सान भी पहुंचाती है। कभी-कभी घरों में electricity high voltage के रूप में आ जाती है जिसके कारण machines damage (जल) हो जाती हैं।

Electricity से सम्बंधित सवाल

Electricity को हिंदी में क्या कहते हैं?

Electricity को हिंदी में बिजली या विद्युत कहते हैं।

Electricity की Unit क्या है?

Electricity की unit kWh (Kilowatt hour) होती है।

Electricity का आविष्कार किसने और कब किया था?

Electricity का आविष्कार Benjamin Franklin द्वारा 1752 में किया गया था।

निष्कर्ष

इस article में हमने Electricity के बारे में हर एक चीज़ बता दी है। और अगर आपने ये article अंत तक ध्यान से पढ़ा है तो आपको पता चल गया होगा की Electricity क्या है और Electricity कैसे बनती है

हम उम्मीद करते हैं की आपको ये article और इसमें दी गयी जानकारी पसंद आयी होगी। अगर आपको ये article उपयोगी लगा हो तो इसे अपने दोस्तों के साथ share जरूर करें।

अगर आप Electricity से सम्बंधित हमसे कोई सवाल पूछना चाहते हैं तो निचे comment कर सकते हैं।